Israel and UAE historic deal Iran, Turkey, Palestine lashed India, China and US welcomed | Israel and UAE historic deal: यूएई पर बरसे ईरान, तुर्की, फलस्तीन ने राजदूत को वापस बुलाया, भारत-चीन और अमेरिका ने किया स्वागत
करीब सभी अरब देश इजराइल को मान्यता नहीं देते हैं और उनके राजनयिक संबंध नहीं हैं। (file photo)

Highlightsऐतिहासिक शांति समझौते के बारे में चर्चा की। इस समझौते से दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।गौरतलब है कि यूएई और इजराइल ने एक समझौते को अंतिम रूप दिया है जिसका मकसद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाना है।पश्चिम एशिया में शांति पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

यरुशलम/तेहरान/ नई दिल्लीः विदेश मंत्री एस जसशंकर ने शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात के अपने समकक्ष अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान के साथ टेलीफोन पर इजराइल और खाड़ी देश के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के बारे में चर्चा की। इस समझौते से दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा कि टेलीफोन पर बातचीत के दौरान यूएई और इजराइल के बीच संबंध पूर्ण रूप से सामान्य होने के बारे में चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘यूएई के विदेश मंत्री द्वारा आज कॉल किये जाने की गहराई से सराहना करते हैं। यूएई और इजराइल के बीच संबंधों को पूर्ण रूप से सामान्य बनाने की कल की गई घोषणा के बारे में चर्चा की।’

गौरतलब है कि यूएई और इजराइल ने एक समझौते को अंतिम रूप दिया है जिसका मकसद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाना है। इसे पश्चिम एशिया में शांति पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। करीब करीब सभी अरब देश इजराइल को मान्यता नहीं देते हैं और उनके राजनयिक संबंध नहीं हैं।

जयशंकर ने नाइजीरिया के चिदेश मंत्री जेफ्री ओनयिएमा के साथ भी टेलीफोन पर बातचीत की और दुनिया के समक्ष मौजूदा चुनौतियों एवं विकास गठजोड़ के बारे में चर्चा की। वहीं, विदेश मंत्रालय ने भी जयशंकर और यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान के बीच टेलीफोन पर बातचीत की जानकारी साझा की । विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने सप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति,स्थिरता और विकास का पक्षधर है। हम इस घटनाक्रम का स्वागत करते हैं । उन्होंने कहा कि यूएई और इजराइन दोनों भारत के महत्वपूर्ण सामरिक साझेदार हैं।

पूर्ण रूप से स्थापित करने संबंधी ऐतिहासिक समझौते का चीन ने शुक्रवार को स्वागत किया

इजराइल और यूएई के बीच राजनयिक संबंध पूर्ण रूप से स्थापित करने संबंधी ऐतिहासिक समझौते का चीन ने शुक्रवार को स्वागत किया और कहा कि मध्य एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से उठाए गए कदमों से उसे “प्रसन्नता” हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते में यूएई और इजराइल ने बृहस्पतिवार को पूर्ण रूप से राजनयिक संबंध स्थापित करने की घोषणा की।

इसके साथ यह घोषणा भी की गई कि इजराइल पश्चिमी तट के हिस्सों पर कब्जा करने की योजना को रोक देगा। यूएई, इजराइल के साथ राजनयिक संबंध रखने वाला अरब का तीसरा देश बन गया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “चीन ने इस बात का संज्ञान लिया है कि इजराइल ने फलस्तीन के क्षेत्र पर कब्जा करने की योजना स्थगित कर दी है और वह फलस्तीन मसले पर उचित और दीर्घकालीन समझौते का पक्षधर है।”

उन्होंने कहा, “चीन को प्रसन्नता है कि ऐसे कदमों से मध्य एशियाई देशों में तनाव कम होगा और क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बल मिलेगा। हम उम्मीद करते हैं कि मसले से संबंधित पक्ष ठोस कदम उठाएंगे ताकि फलस्तीन का मुद्दा हल हो सके।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि फलस्तीन के मुद्दे पर चीन का रवैया स्पष्ट है। 

संयुक्त अरब अमीरात में तैनात फलस्तीनी राजदूत को वापस बुलाया जा रहा

फलस्तीन की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में तैनात फलस्तीनी राजदूत को वापस बुलाया जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इज़राइल ने बृहस्पतिवार को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए समझौते किए जिसके बाद फलस्तीन ने यह कदम उठाया है। फलस्तीन ने समझौते पर निशाना साधते हुए इसे फलस्तीन की मांगों के साथ ‘‘विश्वासघात’’ करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। अमेरिका, इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति लाने में मदद मिलेगी।

ईरान और तुर्की ने शुक्रवार को उस पर गहरी नाराजगी जाहिर की

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा इजराइल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य करने पर ईरान और तुर्की ने शुक्रवार को उस पर गहरी नाराजगी जाहिर की। दोनों देशों ने यूएई पर फलस्तीन से वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया।

अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते को ईरान के विदेश मंत्रालय ने “फलस्तीनी और सभी मुस्लिमों की पीठ पर खंजर मारना करार दिया है।” तुर्की ने कहा कि लोग यूएई के इस कपटपूर्ण बर्ताव को कभी नहीं भूलेंगे और न ही माफ करेंगे। यूएई ने कभी इजराइल के साथ युद्ध नहीं लड़ा और दोनों देशों के बीच कई सालों से संबंध सुधारने की कवायद जारी थी।

यूएई ने कहा कि इस समझौते से इजराइल की उस योजना पर लगाम लगी है जिसके तहत वह पश्चिमी तट के कब्जे वाले इलाकों पर एकतरफा अधिकार करना चाहता था। लेकिन तुर्की के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यूएई को फलस्तीन की ओर से इजराइल के साथ समझौता करने का कोई अधिकार नहीं है।

तुर्की ने कहा कि फलस्तीन के लिए महत्व रखने वाले मुद्दों पर बात करने का यूएई को कोई हक नहीं है। इस समझौते से मिस्र और जॉर्डन के बाद यूएई, इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध रखने वाला तीसरा अरब देश बन जाएगा। फलस्तीन ने इस समझौते को “गद्दारी” करार दिया है और अरब और मुस्लिम देशों से इसका विरोध करने को कहा है।

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