American president Donald Trump bow down to Saudi Arab | सऊदी अरब के सामने झुक गए डोनाल्ड ट्रंप, ये रहे पांच संकेत
सऊदी अरब के सामने झुक गए डोनाल्ड ट्रंप, ये रहे पांच संकेत

पूरी दुनिया में उस वक्त हलचल मच गई जब सऊदी पत्रकार ख़ाशोज्जी की मौत की खबर सामने आई. शुरुआत में सऊदी अरब ने इस बात को मानने से ही इंकार कर दिया कि ख़ाशोज्जी की हत्या इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में हुई है. लेकिन जब तुर्की और दुनिया के तमाम देशों ने सऊदी हुकूमत के ऊपर दबाव डाला तो उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया कि ख़ाशोज्जी की हत्या सऊदी दूतावास में ही हुई थी लेकिन इसके पीछे सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हांथ नहीं है.

क्राउन प्रिंस को इस हत्या की जानकारी नहीं थी. जिस देश में शाही परिवार की इजाजत के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता है, उस देश के नामी पत्रकार की हत्या दूतावास में कर दी जाये और इस बात से शाही परिवार अनजान रहे यह बात आज भी समझ के बाहर है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय यूनियन के तमाम देशों ने ख़ाशोज्जी की हत्या की जबरदस्त आलोचना की. ऐसा लगने लगा कि मानवाधिकार के ठेकेदार ये देश सऊदी अरब के शाही परिवार को उसके इस कृत्य के लिए सबक सिखायेंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने भी शुरूआती दिनों में खूब हुंकार भरा और कई बार मीडिया के सामने दहाड़ते हुए कहा कि मैं अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूँ. अगर शाही परिवार इस हत्या में शामिल है तो उसे अमेरिका कड़ी से कड़ी सजा देगा.

ऐसा लगा कि अमेरिका अपने कथित वैश्विक न्यायधीश के अंदाज में सबक सिखाएगा. लेकिन इसी बीच अमेरिकी धमकी का सऊदी अरब ने भी जवाब दिया और कहा, 'अगर हमारे खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई एक्शन लिया गया तो सऊदी अरब पूरी ताकत के साथ उसका जवाब देगा'.

तुर्की की जांच से नहीं प्रभावित हुआ अमेरिका 

इसी बीच तुर्की ने अपनी अंदरूनी जांच में इस बात पर बार-बार जोर दिया कि ख़ाशोज्जी की हत्या सऊदी सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के इशारे पर हुई है. लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने भी कभी खुल के शाही परिवार पर आरोप नहीं लगाया. तुर्की और सऊदी अरब के बीच इस्लामिक वर्ल्ड के प्रतिनिधित्व को लेकर हमेशा से एक होड़ रही है. कतर पर लगाये गए सऊदी प्रतिबन्ध के बाद जिस तरह से तुर्की और कतर का कूटनीतिक प्यार परवान चढ़ा है, इसने सऊदी हुकूमत की चिंताओं को बढ़ाने का काम किया है. इसके बाद से सऊदी अरब ने कतर पर अपने प्रतिबन्ध को और भी कड़ा कर दिया और ये एलान कर दिया कि सऊदी कतर से लगी सीमा पर टापू का निर्माण करेगा.

अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआइए ने अपनी जांच रिपोर्ट में अंदरूनी खुलासा किया कि ख़ाशोज्जी की हत्या सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के ही इशारे पर हुई थी. अब पूरी दुनिया डोनाल्ड ट्रंप की तरफ निगाहें लगाये बैठी हुई थी कि आखिर अपने परंपरागत दोस्त सऊदी अरब के खिलाफ अमेरिका किस तरह की कारवाई करता है. लेकिन नतीजा वही निकला जिसकी आशा डोनाल्ड ट्रंप से अक्सर की जाती है. वे अपने पूर्व के बयानों से पलट गए और उन्होंने अपनी ही खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया.

 सऊदी अरब के साथ फिर से जीने-मरने की कसमें खाने लगे. अमेरिका के मानवाधिकार रुपी चेहरे पर उन्होंने 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति का बट्टा लगाया. सऊदी अरब को अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी बताते हुए उन्होंने कहा, ''हो सकता है कि सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के बारे प्रिंस सलमान को सब पता हो. या शायद ना भी पता हो. लेकिन किसी भी मामले में अमरीका सलमान के साथ है.''

110 बिलियन डॉलर का आर्म्स डील 

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान को समझने के लिए हमें थोड़ा और पहले जाना होगा. ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले विदेशी दौरे पर सऊदी अरब जाते हैं. अपने पूरे चुनावी कैंपेन में मुस्लिम देशों पर निशाना साधने वाले ट्रंप का ये फैसला चौंकाने वाला था. अपनी इसी यात्रा पर डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब के साथ 110 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम आर्म्स डील साइन करते हैं और सऊदी अरब को अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी बताते हैं.

स्वदेश लौटने के बाद चीन से लेकर नाटो के सहयोगी यूरोपीय देशों पर टैरिफ का प्रहार करते हैं. डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति का चेहरा पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित हो जाता है. ऐसा नहीं है कि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच का अटूट बंधन डोनाल्ड ट्रंप की दें है. ये तो पिछले सात दशकों से चला आ रहा है और समय के साथ मजबूत भी होता चला गया. यमन के युद्ध में सऊदी गठबंधन को अमेरिका का साथ और ईरान से परमाणु समझौते को तोड़कर डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब को रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते थे. अपने पादरी की गिरफ्तारी को लेकर तुर्की पर प्रतिबन्ध लगाने के बाद ये तय हो गया था कि ट्रंप मध्य-पूर्व में सऊदी अरब की बादशाहत को सुनिश्चित करने का काम कर रहे थे.

यूरोपीय यूनियन भी साध गया चुप्पी 

यूरोपीय यूनियन के भी इक्का-दुक्का देशों को अगर छोड़ दिया जाए तो अभी तक किसी भी देश ने इस मामले को लेकर कोई खास कदम नहीं उठाया है. इसका मतलब साफ है कि सऊदी के भारी निवेश और तेल के सामने पश्चिम के देशों का मानवाधिकार लुप्त हो गया. तुर्की ने भी इस मामले में शाही परिवार के खिलाफ बोलने से परहेज किया. हाल ही में एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में सऊदी के विदेश मंत्री ने उन लोगों को चेतावनी दी जो ये मानते हैं कि ख़ाशोज्जी की हत्या में क्राउन प्रिंस सलमान का हांथ है. वैश्विक मीडिया और दुनिया के तमाम कथित ताकतवर देश सऊदी प्रिंस के सामने घुटने पर हैं. अमेरिका मध्य-पूर्व में ईरान को सबसे बड़ा खतरा बताता है और सऊदी अरब की कारगुजारियों पर पर्दा डालने का बीड़ा उठा रखा है.

जमाल ख़ाशोज्जी की मंगेतर जो इस्तांबुल स्थित दूतावास के सामने अपने होने वाले पति का इंतजार करती रह गईं. उन्होंने अमेरिका से इंसाफ की गुहार लगाई थी, लेकिन आज उन्हें भी दुनिया के तमाम मानवाधिकार के रक्षक देशों का काला चेहरा दिख चुका है और सऊदी अरब की वैश्विक ताकत का भी अंदाजा लग चुका होगा. उन्हें इस बात का फक्र हो सकता है कि उनके पति आखिर कितने बड़े पावर नेक्सस के खिलाफ वैचारिक लड़ाई लड़ रहे थे जिसके सामने दुनिया भर की ताकतें नतमस्तक हैं.


Web Title: American president Donald Trump bow down to Saudi Arab
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