शोधकर्ता और सामाजिक विचारक संदीप मुरारका आज साहित्यिक जगत में एक अलग पहचान बना चुके हैं। उनका लेखन विशेष रूप से भारत के जनजातीय समाज पर केंद्रित है।
जमशेदपुर से शुरू हुआ सफर, 12 फरवरी 1978 को जमशेदपुर में जन्मे संदीप मुरारका ने लेखन और शोध के माध्यम से समाज और इतिहास के अनदेखे पहलुओं को सामने लाने का काम किया।
जनजातीय नायकों को दी पहचान, संदीप मुरारका का लेखन मुख्य रूप से भारत के जनजातीय समाज के योगदान पर आधारित है। उन्होंने कई ऐसे व्यक्तित्वों को सामने लाया, जिनके योगदान की चर्चा कम हुई थी।
इन किताबों से मिली खास पहचान, उनकी चर्चित पुस्तकों में 105 ट्राइबल ल्यूमिनरीज़ ऑफ़ इंडिया, पीपल्स पद्मा, शिखर को छूते ट्राइबल्स और अनकही जनजातीय गाथाएँ शामिल हैं।
राष्ट्रपति भवन तक पहुँची किताब संदीप मुरारका की पुस्तक 105 ट्राइबल ल्यूमिनरीज़ ऑफ़ इंडिया, 29 अगस्त 2023 को भारत के राष्ट्रपति को भेंट की गई, जिससे उनके काम को राष्ट्रीय पहचान मिली।
जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत, संदीप मुरारका की पहल पर जमशेदपुर में पहली बार भव्य लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित हुआ। इसमें देश-विदेश के लेखक और कलाकार शामिल हुए।
साहित्यिक पहचान की ओर जमशेदपुर, उनकी पहल से जमशेदपुर में साहित्यिक गतिविधियों को नई गति मिली है। अब हर वर्ष दिसंबर में यह लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित होगा।
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