उत्तर भारत के बिहार राज्य का प्रसिद्ध त्यौहार छठ पूजा इस बार 13 और 14 नवंबर को मनाया जाएगा। 11 नवंबर से नहाय खाय से इस पर्व का शुभारम्भ हो जाएगा। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को ही मनाया जाता है। इस पर्व में सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा की जाती है। छठी मैया को षष्ठी देवी भी कहा जाता है। छठ पूजा के पहले दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। दूसरे और तीसरे दिन पूरे दिन निर्जला उपवास किया जाता है। तीसरे दिन की शाम और उससे अगली सुबह पवित्र नदी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

छठ पूजा को ध्यान में रखते हुए इंडियन रेलवे ने यात्रियों के लिए कुछ विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया था। लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें टिकेट नहीं मिल पाई या उनकी टिकट कंफर्म नहीं हो पाई है। बता दें कि छठ पूजा को बिहार में बहुत प्रसिद्ध त्योहार के रूप में माना जाता है। इसलिए अपने घर से दूर काम कर रहे लोग इस मौके पर अपने घर पहुंचते हैं। अगर आपको बिहार जाना है और टिकट नहीं मिली है तो घबराने की जरूरत नहीं है। छठ के अभी भी दो दिन बाकी हैं। अगर आप समय पर घर पहुंचना चाहते हैं, तो आपके लिए रास्ते अभी खुले हुए हैं। बेशक इसके लिए आपको थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं लेकिन आप बिना किसी परेशानी के बिहार जा सकते हैं।

कौशाम्बी, आनंद विहार से मिलेंगी बस
बिहार जाने के लिए अगर आपकी ट्रेन में टिकट कंफर्म नहीं हो पाई है या आपको काम से छुट्टी नहीं मिल पाई है, तो आप थोड़े पैसे खर्च करके आनंद विहार बस अड्डे के पास कौशाम्बी से बस ले सकते हैं। यहां से बिहार के गया, भागलपुर, जयनगर, पटना, दरभंगा, बरौनी, मुजफ्फरपुर जिलों के लिए बस चलती हैं। यहां से बिहार के लिए वॉल्वो बस चलती हैं जिसमें सीटिंग और स्लीपर दोनों तरह की व्यवस्था होती है। 

टिकट के दाम
बिहार जाने के लिए ट्रेन में आपको 500 से 600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन छठ उत्सव के दौरान टिकट मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। टिकट मिलने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपकी सीट मिल ही जाए। अगर आप सहुलियत से बिहार जाना चाहते हैं, तो थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करके यहां से बस में जा सकते हैं। यहां आपको बिहार जाने के लिए एक यात्री के लिए 2000 हजार से 2500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। बस से बिहार का सफर 20 से 22 घंटे का है यानि अगर आप आज शाम 4 बजे बस में बैठेंगे तो कल दोपहर तक बिहार में अपने घर होंगे। 

क्यों मनाते हैं छठ पूजा?
पौराणिक वर्णन के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने ही पहली बार 'छठी माई' की पूजा की थी। इसी के बाद से छठ पर्व मनाया जाने लगा। कहा जाता है कि लंका पर जीत हासिल करने के बाद जब राम और सीता वापिस अयोध्या लौट रहे थे तब उन्होंने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठी माता की पूजा की थी। इसमें उन्होंने सूर्य देव की पूजा भी की थी। तब से ही यह व्रत लोगों के बीच इतना प्रचलित है। 


Web Title: Chhath Puja 2018: Ways to reach Bihar at last minute to celebrate Chhath with family, through train and bus
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