Highlightsपौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव रावण की तपस्या से खुश हुए। माना जाता है कि स्वर्गरोहिणी वह जगह है जहां से युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग गए थे।

हिन्दू धर्म से जुड़ी बहुत सारी पौराणिक मान्यताओं के साथ बहुत सारी लोक कथाएं भी शामिल हैं। जिनमें कुछ रोचक कहानियां या मान्यता सुनने को मिलती हैं। उन्हीं में से एक है स्वर्ग की सीढ़ियों से जुड़ी मान्यता। 

दरअसल ये स्वर्ग की सीढ़ी से जुड़ी कहानी महाभारत से जोड़ी गई है। बताया जाता है कि स्वर्गारोहण पांडवों ने किया था। आइए आपको बताते हैं क्या है ये पौराणिक मान्यता और लोक कथा। 

माना जाता है कि स्वर्गरोहिणी वह जगह है जहां से युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग गए थे।  लोक कथाओं की मानें तो पांचों पांडवों और द्रौपदी अपने अंतिम समय में सब कुछ त्यागकर सशरीर स्वर्ग जाने के लिए बदरीनाथ से आगे माणा गांव(भारत का आखिरी गांव) से होते हुए स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गए। 

मगर मार्ग में आई कठिनाइयों और प्रतिकूल मौसन के कारण एक-एक कर उनका देहावसान होता चला गया और केवल युधिष्ठिर ही जीवित रहे। वही धर्मराज के साथ सशरीर स्वर्ग जा सके। कुछ लोग ऐसा भी मानकर चलते हैं कि बाकी चारों पांडवों और द्रौपदी को कुछ घमंड हो गया था जिसके परिणामस्वरूप वे लोग सशरीर स्वर्ग नहीं पहुंच पाए।

रावण से भी जुड़ा है इसका इतिहास

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव रावण की तपस्या से खुश हुए। भोलेनाथ ने वर देते हुए एक शर्त रखी कि अगर रावण एक दिन में पांच पौड़ियां यानी सीढ़ियों बना लेती है उसे असरता प्राप्त हो जाएगी। 

शर्त के अनुसार रावण पौढियां बनाने में लग गया लेकिन वो सिर्फ चार ही सीढ़ी बना पाया, क्योंकि सीढ़ी बनाते-बनाते उसकी नींद आ गई थी और पांचवी पौड़ी का निर्माण नहीं कर पाया था। इस तरह उसे स्वर्ग जाने और अमरता पाने का सपना भी अधूरा रह गया। 

हलांकि इस बात का कोई सच सामने नहीं आता कि ये सीढ़ियां सच में हैं। ऊपर दी हुई कहानियां सिर्फ और सिर्फ लोक कथाओं से जुड़ी हुई हैं।

Web Title: temple in Uttarakhand where ravana made stair way to heaven
पूजा पाठ से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करे