Sarv Pitra Amavasya: Pitru Paksha started with the penance of Akshoda read this story | सर्व पितृ अमावस्याः अक्षोदा की तपस्या से शुरू हुआ पितृ पक्ष, पढ़ें यह पौराणिक कथा
पढ़ें पितृ पक्ष की पौराणिक कथा।

Highlightsजो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से नमन कर अपने पितरों को विदा करता है उसके पितृ देव उसके घर-परिवार में खुशियां भर देते हैं।जिस घर के पितृ प्रसन्न होते हैं पुत्र प्राप्ति और मांगलिक कार्यक्रम उन्हीं घरों में होते हैं।

जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से नमन कर अपने पितरों को विदा करता है उसके पितृ देव उसके घर-परिवार में खुशियां भर देते हैं। जिस घर के पितृ प्रसन्न होते हैं पुत्र प्राप्ति और मांगलिक कार्यक्रम उन्हीं घरों में होते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि पितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर बिना साबुन लगाए स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पितरों के तर्पण के निमित्त सात्विक पकवान बनाएं और उनका श्राद्ध करें। शाम के समय सरसों के तेल के चार दीपक जलाएं। इन्हें घर की चौखट पर रख दें। एक दीपक लें। एक लोटे में जल लें। अब अपने पितरों को याद करें और उनसे यह प्रार्थना करें कि पितृपक्ष समाप्त हो गया है इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक में वापस चले जाएं। यह करने के पश्चात जल से भरा लोटा और दीपक को लेकर पीपल की पूजा करने जाएं। वहां भगवान विष्णु जी का स्मरण कर पेड़ के नीचे दीपक रखें जल चढ़ाते हुए पितरों के आशीर्वाद की कामना करें। पितृ विसर्जन विधि के दौरान किसी से भी बात ना करें। 

सर्व पितृ अमावस्या की पौराणिक कथा
सर्व पितृ अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार श्रेष्ठ पितृ अग्निष्वात और बर्हिषपद की मानसी कन्या अक्षोदा घोर तपस्या कर रही थीं। वह तपस्या में इतनी लीन थीं कि देवताओं के एक हजार वर्ष बीत गए। उनकी तपस्या के तेज से पितृ लोक भी प्रकाशित होने लगा और सभी श्रेष्ठ पितृगण अक्षोदा को वरदान देने के लिए एकत्र हुए। उन्होंने अक्षोदा से कहा कि हे पुत्री हम सभी तुम्हारी तपस्या से बहुत प्रसन्न हैं इसलिए जो चाहों वर मांग लो। लेकिन अक्षोदा ने पितरों की तरफ ध्यान नहीं दिया। वहीं उनमें से अति तेजस्वीं पितृ अमावसु को बिना पलके झपकाए देखती रहीं। पितरों के बार- बार कहने पर उसने कहा कि हे भगवान क्या आप मुझे सच में वरदान देना चाहते हैं। इस पर तेजस्वी पितृ अमावसु ने कहा हे अक्षोदा वरदान मांगो। अक्षोदा ने कहा कि अगर आप मुझे वरदान देना चाहते हैं तो मैं इसी समय आपके साथ आनंद चाहती हूं।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि अक्षोदा की यह बात सुनकर सभी पितृ क्रोधित हो उठे और उन्होने अक्षोदा को श्राप दे दिया कि वह पितृ लोक से पतित होकर पृथ्वी लोक पर जाएगी। जिसके बाद अक्षोदा पितरों से क्षमा याचना करने लगी। इस पर पितरों को दया आ गई और उन्होंने कहा कि तुम पृथ्वी लोक पर मत्स्य कन्या के रूप में जन्म लोगी। वहां पराशर ऋषि तुम्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे और तुम्हारे गर्भ से व्यास जन्म लेंगे। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि जिसके बाद तुम पुन: पितृ लोक में वापस आ जाओगी। अक्षोदा के इस अधर्म के कार्य को अस्वीकार करने पर सभी पितरों ने अमावसु को आर्शीवाद दिया कि हे अमावसु आज यह तिथि आपके नाम से जानी जाएगी। जो भी व्यक्ति वर्ष भर में श्राद्ध या तर्पण नहीं कर पाता और अगर वह इस तिथि पर श्राद्ध और तर्पण करता है तो उसे सभी तिथियों का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

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