Pitru Paksha 2021: श्राद्ध क्यों करना चाहिए, जानें सनातन धर्म में क्या है इस कर्मकांड का महत्व

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: September 22, 2021 09:21 AM2021-09-22T09:21:21+5:302021-09-25T14:09:22+5:30

इस साल 20 सितंबर से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हुआ था, जो 06 अक्टूबर 2021 तक चलेंगे। आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में श्राद्ध का महत्व क्या है और इस कर्मकांड को क्यों किया जाता है।

Pitru Paksha 2021 know about significance of Shradh | Pitru Paksha 2021: श्राद्ध क्यों करना चाहिए, जानें सनातन धर्म में क्या है इस कर्मकांड का महत्व

श्राद्ध पक्ष 2021

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Highlightsश्राद्ध एक महत्वपूर्ण कर्मकांड है, जो पितरों के तर्पण और उनकी आत्मा की शांति के लिए किया जाता है।श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता है और मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है।

सनातन धर्म में हर एक कर्मकांड का विशेष महत्व होता है। श्राद्ध भी एक महत्वपूर्ण कर्मकांड है, जो पितरों के तर्पण और उनकी आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता के इसी भाव को श्राद्ध कहते हैं। श्राद्ध को पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, 16 दिनों तक चलने वाले श्राद्ध भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या) तक चलते हैं। इस साल 20 सितंबर से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हुआ था, जो 06 अक्टूबर 2021 तक चलेंगे।

श्राद्ध क्यों करना चाहिए?

सनातन परंपरा में पितरों को देवतुल्य माना गया है और हम उन्हीं की संतति हैं। उन्हीं के कारण हमारा अस्तित्व है। उन्होंने हमारा लालन पालन-कर हमें कृतार्थ किया है। हम उनके सदैव ऋणी हैं और इसी पितृ ऋण की मुक्ति के लिए ही श्राद्ध किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता है। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है।

तर्पण की विधि

सबसे पहले पितरों का तर्पण करने हेतु उन्हें जल दें। समस्त तर्पण सामग्री लेकर दक्षिण की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, कुशा, अक्षत, पुष्प और काले तिल लेकर दोनों हाथ जोड़कर पितरों का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित करें। इस दौरान अपने पितरों से आग्रह करें कि मेरे दिए जल और भोजन को ग्रहण करें। अंत में जल पृथ्वी पर 5-7 या 11 बार अंजलि से गिराएं।

इन बातों का रखें ध्यान

ब्राह्मणों को भोजन कराने से पूर्व गाय, कुत्ते और चींटी के लिए भोजन निकाल लें। कौवा को पितर के रूप में माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कौवा पक्षी राहु-केतु का प्रतीक माना जाता है और राहु-केतु के कारण ही पितृ दोष लगता है। अत: पितृ पक्ष में कौवे को भोजन कराने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

Web Title: Pitru Paksha 2021 know about significance of Shradh

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