शादी का फैसला जिन्दगी का सबसे अहम फैसला होता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए। सोच समझकर और होने वाले पार्टनर से सलाह करके ही अगला कदम लेना चाहिए। आजकल तो लोग अरेंज्ड मैरिज में भी पहले किसी को पसंद करते हैं, कुछ दिनों या महीनों तक बातचीत करते हैं, मिलना-जुलना बढ़ता है और फिर शादी का फैसला लेते हैं। कयोंकि हर कोई शादी से पहले सामने वाले को कुछ हद तक समझकर ही आगे बढ़ना चाहता है।

मगर बात लव मैरिज की करें तो यहां मामला थोड़ा और आगे बढ़ा हुआ है। पहले के जमाने में बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड महीनों या सैलून के रिलेशनशिप के बाद जब शादी के फैसले तक पहुंचाते थे तो किसी पहचान वाले की मदद लेकर अपने अपने पेरेंट्स से बात करते थे। बस एक दूसरे के स्वभाव को देखकर ही शादी का फैसला ले लेते थे। लेकिन आजकल के कपल्स सिर्फ स्वभाव ही नहीं, साथ रहकर पूरी तरह पार्टनर को टेस्ट करते हैं।

इसे लिव-इन रिलेशनशिप कहते हैं। जहां बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड आपसी रजामंदी से एक दूसरे के साथ रहते हैं। वे साथ रह रहे हैं इस बात का कई बार पेरेंट्स को पता होता है लेकिन अधिकतर मामले में कपल्स पेरेंट्स को बिना बताए ही साथ रहने का फैसला कर लेते हैं। ताकि उनके फैसले में किसी तीसरे का दखल ना हो। बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड से शादी करनी है या नहीं, यह फैसला सिर्फ उनका हो, इस ख्वाहिश से ही वे लिव-इन रिलेशनशिप में आते हैं। चलिए इस रिश्ते के फायदे नुकसान जान लेते हैं। 

लिव-इन रिलेशनशिप के दो फायदे:

1) साथी को करीब से समझने का मौक़ा मिलता है: हफ्ते में एक या दो बार मिलने, कुछ देर या भले ही घंटों तक फोन पर बात करने से आप सामने वाले की छोटी छोटी बातों का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। असल रिश्ता साथ में रहें पर ही शुरू होता है। और इस बात को आजकल के मॉडर्न कपल्स बाखूबी समझने लगे हैं। इसलिए वे साथ रहकर साथी के स्वभाव और उसकी आदतों को समझते हैं। इन सबको अपनाते हुए वे आगे बढ़ पाएंगे या नहीं, इसके बाद ही फैसला लेते हैं।

2) जिम्मेदारियों की समझ आती है: बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड रहते हुए जिम्मेदारी का कभी भी एहसास नहीं होता है। ये रिश्ता सिर्फ प्यार, रोमांस और खट्टी-मीठी यादों का ही बना रहता है। लेकिन एक बार जब साथ रहने लगते हैं तो एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारियों की समझ आ जाती है। महीने के खर्च से लेकर घर और बाहर के कामों में कैसे बंटवारा होना चाहिए, कपल इन चीजों को गहराई से समझ पाता है। भविष्य में आसानी हो जाती है।

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लिव-इन रिलेशनशिप के दो नुकसान:

1) बाद में एक्सप्लोर करने के लिए कुछ नहीं बचता: रोमांस, सेक्स, साथ में रहने का एक्सपीरियंस, फुल टाइम पार्टनर बनने की जिम्मेदारी, सब कुछ तो अनुभव कर लिया। तो अब क्या बचा? इसके बाद अगर शादी हो गई तो ऐसे लगेगा कि पिछले कई साल से शादी हो रखी थी। इस तरह के कपल्स लाइव-इन रिलेशनशिप के बाद जब शादी करते हैं तो उनमें पार्टनर को लेकर कोई चरम नहीं बचता है। उनके लिए नई शादी वाला क्रेज खत्म हो जाता है।

2) सेक्शुअल कनेक्शन का पछतावा: लाइव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए शारीरिक रूप से एक दूसरे के करीब आना कोई बड़ी बात नहीं है। यह बेहद साधारण है। मगर कुछ समय बाद रिलेशनशिप टूट जाए, शादी ना हो, तो यह बड़ी बात बन जाती है। भले ही समाज या होने वाले पार्टनर को इस बात से कोई फर्क ना पड़े, लेकिन जिन भावनातमक दुख से वह इंसान गुजरता है, उसका उस दर्द से बाहर निकलने में समय लगता है। किसी के साथ शारीरिक रूप से जुड़ना आज भी हमारे समाज में बेहद बड़ी बात मानी जाती है। 


Web Title: Merits and demerits of being in a live in relationship
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