loan waiver farmers still awaited Shivraj chauhan to congress CM kamalnath | शिवराज का कमलनाथ पर तंज, हस्ताक्षर तो CM बनते ही हुए लेकिन 25 दिन बाद भी किसानों का एक नया पैसा नहीं हुआ माफ
शिवराज का कमलनाथ पर तंज, हस्ताक्षर तो CM बनते ही हुए लेकिन 25 दिन बाद भी किसानों का एक नया पैसा नहीं हुआ माफ

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बनने पर 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। कांग्रेस की सरकार बन गई, जिसे 10 दिन नहीं 25 दिन हो गए, लेकिन व्यावहारिक रूप से किसान के कर्ज का एक नया पैसा माफ नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश में 50 लाख से अधिक किसानों का 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक कर्ज माफ होना है, लेकिन अनुपूरक बजट में केवल 5 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान है। कांग्रेस सरकार स्पष्ट करे कि 5 हजार करोड़ रुपए कितने लोगों को, कब दिए जाएंगे।

चौहान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस कहती है कि किसानों के ऋण माफी के लिए 15 से 22 जनवरी तक फार्म भरवाए जाएंगे, किसी के खाते में पैसा नहीं आएगा। इतनी जटिलताएं पैदा कर दी गई हैं कि कई किसान अपात्र हो जाएंगे। कर्जमाफी को मुश्किल बना रही प्रक्रिया क्यों अपना रही, कांग्रेस बताए। लोकसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर्जमाफी का अधिक प्रचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 22 फरवरी से पैसा खाते में आएगा। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता लग जाएगी, फिर किसान के खाते में पैसा कैसे आएगा? मैं सीधे-सीधे कहना चाहता हूं, कोई आवेदन या फार्म भराने की जरूरत नहीं है। आन रिकार्ड है राष्ट्रीयकृत बैंकों की किस शाखा का कितने किसानों पर कितना बकाया है। सहकारी बैंकों के आंकड़े भी हैं, तो इधर-उधर की बात क्यों कर रहे हो? सीधे किसान के खाते में पैसा डालो। बैंकों को पैसा दे दो। कर्जमाफी के मुद्दे और किसानों को उलझाया जा रहा है, इसलिए प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि सीधे किसान के खाते में या बैंकों में पैसा डालकर इस कर्जमाफी को अंजाम दिया जाए, इधर-उधर की बातें न करें।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भावांतर में भी केवल 1500 करोड़ रुपए की बात कह रही है, जबकि हमने तो अकेले 1700 करोड़ रुपया केवल गेहूं का बांट दिया था और अब 2100 रुपए प्रति क्विंटल में कांग्रेस को गेहूं खरीदना है तो आनाकानी कर रही है। गेहूं के लिए बजट का इंतजार नहीं कर सकते, क्योंकि आचार संहिता मई तक लग जाएगी, फिर बरसात आ जाएगी, तो गेहूं कब खरीदेंगे। गन्ना किसान परेशान हैं। किसानों को ठीक दाम देने के लिए भावांतर योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान अनुपूरक बजट में किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया है। इससे नीयत जाहिर होती है कि किसान को कुछ देना नहीं था, सिर्फ वोट लेना था और अब ऐसे ही बहकाकर कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भी वोट लेना चाहती है। मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि सभी किसानों का 2 लाख रुपए तक का लोन माफ करने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किया जाए और जो समर्थन मूल्य के नीचे बोनस व अतिरिक्त राशि देने का फैसला हमने किया था, उसे लागू कर किसानों को राहत दी जाए।


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