Corona Vaccination: कोवैक्‍सीन या कोविशील्‍ड में कौन सी वैक्‍सीन ज्यादा एंटीबाडी बना रही है ? जानें एक्सपर्ट्स का जवाब

Published: June 7, 2021 01:26 PM2021-06-07T13:26:06+5:302021-06-07T13:26:06+5:30

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कौन सा टीका कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी है? कौन सा टीका कोरोना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है? किस टीके के सबसे कम दुष्प्रभाव हैं? कौन सा टीका शरीर में तेजी से एंटीबॉडी बना सकता है? कोरोना वैक्सीन को लेकर आम जनता के मन में इस तरह के तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं.

ऐसे में कोरोना वैक्सीन इंड्यूस्ड एंटीबॉडी ट्रीटमेंट (COVAT) का अध्ययन सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका द्वारा बनाई गई वैक्सीन कोविशील्ड, कोवैक्सिन से ज्यादा एंटीबॉडी का उत्पादन करती है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक मिली, उन्होंने कोवाचील्ड वैक्सीन प्राप्त करने वालों की तुलना में अधिक एंटीबॉडी का उत्पादन किया। शोध में कुल 552 स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे।

अध्ययन का दावा है कि कोवोशील्ड वैक्सीन प्राप्तकर्ताओं में एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी कोवासिन की पहली खुराक लेने वालों की तुलना में बहुत अधिक सेरोपोसिटिविटी दर होती है।

लेकिन इतना ही नहीं, अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस के लिए दोनों टीके, कोविशील्ड और कोवासिन, शरीर में एंटीबॉडी के उत्पादन के लिए अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन कोविशील्ड में सेरोपोसिटिविटी दर और एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी अधिक हैं।

सर्वे में शामिल 456 स्वास्थ्य कर्मियों और 96 कर्मियों को कोविशील्‍ड की पहली खुराक दी गई। पहली खुराक के बाद, समग्र सेरोपोसिटिविटी दर 79.3 प्रतिशत थी। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन स्वास्थ्य कर्मियों को दो टीकों में से किसी एक के साथ टीका लगाया गया था, उनमें प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हुई थी।

COVAT के एक अध्ययन से दोनों टीकों की दूसरी खुराक के बाद प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के मामले में और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इस अध्ययन में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों को कोवशील्ड और कोवासिन दोनों में से कोई भी टीका दिया गया था।

कुछ ऐसे भी थे जो Sars Cov 2 से संक्रमित थे। तो कुछ ऐसे भी थे जो कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं थे। एंटीबॉडी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली है जो वायरस के जोखिम को कम करती है और उन्हें उनसे लड़ने की ताकत देती है।

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर को एंटीबॉडी बनाने में अक्सर एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग जाता है। जब कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होता है, तो उसका शरीर एंटीबॉडी का उत्पादन करता है। वह वायरस से लड़ने में मदद करती है।

ठीक हुए 100 कोरोना मरीजों में से 70-80 मरीजों में एंटीबॉडी विकसित की जा चुकी हैं। ठीक होने के 2 सप्ताह के भीतर एंटीबॉडी का उत्पादन होता है। कुछ मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद कई महीनों तक एंटीबॉडी नहीं बनती है।