CoronaVaccine: कितनी कारगर है कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ? शोध से बड़ा खुलासा! स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिया फैसला

Published: June 15, 2021 12:24 PM2021-06-15T12:24:24+5:302021-06-15T12:24:24+5:30

Next

अगर आप कोरोना के टीके की एक खुराक भी ले लेते हैं तो भी आपको कोरोना संक्रमण होने की संभावना 98 फीसदी कम हो जाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देश में चल रहे टीकाकरण अभियान को देखते हुए चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों द्वारा किया गया यह शोध बेहद महत्वपूर्ण है।

चंडीगढ़ पीजीआई द्वारा किए गए शोध के खुलासे के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने देश के अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और कॉरपोरेट अस्पतालों से इस संबंध में शोध करने को कहा है। कई संस्थाओं ने शोध भी शुरू कर दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, चंडीगढ़ पीजीआई ने उन मरीजों पर शोध किया, जिन्हें वैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी और जिन्हें वैक्सीन की दो खुराक दी गई थी।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को टीके की एक खुराक दी गई उनमें संक्रमण का केवल दो प्रतिशत जोखिम था, और जिन्हें टीके की दो खुराक दी गई थी उनमें संक्रमण का जोखिम केवल दो प्रतिशत था।

इस शोध से पता चला कि वैक्सीन की पहली खुराक से कोरोना संक्रमण का खतरा 98 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में देश के टीकाकरण की निगरानी करने वाली समिति के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि पीजीआई के शोध से पता चलता है कि टीकाकरण की पहली खुराक के बाद ही लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश अपने टीकाकरण कार्यक्रम में बदलाव करेगा और दो के बजाय एक ही खुराक देगा।

डॉ. एनके अरोड़ा के मुताबिक, कोरोना की पहली डोज अपना बचाव करती है और वैक्सीन की दूसरी डोज इम्यून सिस्टम को बूस्ट करती है. शोध में पाया गया है कि एंटीबॉडी भी वायरस से लड़ने में पूरी तरह सक्षम हैं।

चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च के साथ-साथ देश के कई बड़े अस्पतालों और कॉरपोरेट अस्पतालों में भी इसी तरह की रिसर्च शुरू की गई है। अगले कुछ दिनों में शोध भी सामने आ जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उस शोध के बाद कोविड नेशनल टास्क फोर्स और टीकाकरण समिति अगली रणनीति पर काम करेगी.

कोरोना से बचाव के लिए बेहद जरूरी है कोरोना वैक्सीन...