Maharashtra: Sharad Pawar daughter Supriya Sule third time to contest Lok Sabha Election from Baramati Seat in 28 years long Political legacy | महाराष्ट्र: बारामती लोकसभा सीट पर 28 वर्षों से पवार परिवार का कब्जा, तीसरी बार सुप्रिया सुले मैदान में
लोकसभा चुनाव 2019 में महाराष्ट्र की बारामती सीट से मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले एक बार फिर एनसीपी की उम्मीदवार होंगी।

Highlightsबारामती सीट से एक बार फिर एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी और मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले चुनावी मैदान में28 वर्षों से बारामती लोकसभा सीट पर एनसीपी का कब्जा, सुप्रिया तीसरी बार यहां से लड़ रहीं चुनाव

महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट पर 28 वर्षों से एनसीपी प्रमुख शरद पवार के परिवार का कब्जा है। अब एक बार फिर इस सीट से शरद पवार की बेटी और मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले यहां से चुनाव लड़ेंगी। उनके नाम की घोषणा हो गई है। दरअसल, गुरुवार (14 मार्च) को एनसीपी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों सूची जारी की। सुप्रिया तीसरी बार इस सीट से चुनावी रण में हैं। यहां से लोकसभा का पहला चुनाव उन्होंने 2009 में लड़ा था और जीत गई थीं। इसके बाद यहां से 2014 में भी उन्होंने सफलता दोहराई।

सुप्रिया सुले से पहले इस सीट से पहले उनके पिता शरद पवार चुनाव लड़ते थे। शरद पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा चुनाव लड़ने से सुप्रिया 2006 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। सुप्रिया जन सरोकारों से जुड़े काम करते रहने के कारण लोगों के बीच खासी लोकप्रिय हैं। 2011 में उन्होंने राज्यभर में कन्या भ्रूणहत्या के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ी थी। समाज सेवा में योगदान को लेकर उन्हें मुंबई वूमन ऑफ द डिकेड के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। यही नहीं, 2012 में सुप्रिया सुले के नेतृत्व में राष्ट्रवादी युवती कांग्रेस नाम की शाखा का गठन भी हो चुका है जिसके जरिये युवतियों को राजनीति में आने का मौका दिया जाता है।

बारामती लोकसभा सीट का इतिहास

एनसीपी प्रमुख शरद पवार बारामती से 6 बार चुनाव लड़ चुके हैं। इस सीट से उनकी बेटी सुप्रिया सुले 2 दफा और उनके भतीजे अजीत पवार भी 1 बार एमपी रह चुके हैं। पवार परिवार से पहले बारामती सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। कांग्रेस इस सीट पर 1957 से लेकर 1977 यानी 20 वर्षों तक काबिज रही। 

इस सीट पर 1977 में तीन वर्षों के लिए भारतीय लोकदल को काम करने का मौका मिला। 1980 में एक बार फिर कांग्रेस का उम्मीदवार यहां से जीता। 1984 में कांग्रेस (सोशलिस्ट) यहां से जीती। 1985 उप चुनाव हुआ, जिसमें जनता पार्टी का कैंडिडेट जीता। इसके बाद कांग्रेस ने फिर से बारामती से दमखम दिखाया और 1989, 1991, 1996, 1998 में यहां काबिज रही। 1999 से लेकर 2014 तक बारामती पर एनसीपी ने जीत का परचम लहराया। 

2014 में देश भर में नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर के आगे भी एनसीपी बारामती सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रही। तब एनसीपी उम्मीदवार सुप्रिया सुने भारतीय जनता पार्टी की समर्थक राष्ट्रीय समाज पक्ष पार्टी के उम्मीदवार महादेव जगन्नाथ जानकर को हराया था।


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