The world can progress only when technology, financial support is available to developing countries: Modi | विश्व तभी प्रगति कर सकता है जब विकासशील देशों को प्रौद्योगिकी, वित्तीय सहायता उपलब्ध हो: मोदी
विश्व तभी प्रगति कर सकता है जब विकासशील देशों को प्रौद्योगिकी, वित्तीय सहायता उपलब्ध हो: मोदी

नयी दिल्ली/रियाद, 22 नवंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को जी-20 शिखर सम्मेलन में कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अलग-थलग होकर लड़ाई लड़ने के बजाय एकीकृत, व्यापक और समग्र सोच को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संपूर्ण विश्व तभी तेजी से प्रगति कर सकता है, जब विकासशील राष्ट्रों को बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी और वित्तीय सहायता मुहैया करायी जाएगी।

जी-20 सम्मेलन में ‘‘पृथ्वी के संरक्षण’’ विषय पर अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि भारत न सिर्फ पेरिस समझौते के अपने लक्ष्य को हासिल कर रहा है, बल्कि उससे भी अधिक कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पर्यावरण के अनुरूप रहने की हमारी पारम्परिक प्रकृति और सरकार की प्रतिबद्धता से भारत ने कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु अनुकूल विकास की प्रक्रिया को अपनाया है।’’

उन्होंने कहा कि पूरा विश्व तभी तेज गति से प्रगति कर सकता है जब विकासशील देशों को बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी और वित्तीय सहायता मुहैया करायी जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मानवता की समृद्धि के लिए हर एक को समृद्ध होना पड़ेगा। श्रम को सिर्फ उत्पादन से जोड़कर देखने की अपेक्षा हर श्रमिक की मानव गरिमा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा कि ऐसे रुख से ही पृथ्वी का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।

सऊदी अरब द्वारा आयोजित दो दिवसीय 15 वें जी-20 शिखर सम्मेलन में मोदी ने पहले दिन भी शिरकत की थी। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों के शासनाध्यक्षों या राष्ट्राध्यक्षों, यूरोपीय संघ, अन्य आमंत्रित देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर यह शिखर सम्मेलन डिजिटल माध्यम से संचालित किया गया।

मोदी ने कहा कि वैश्विक महामारी के प्रभाव से नागरिकों और अर्थव्‍यवस्‍थाओं को बचाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष पर भी ध्‍यान केंद्रित करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन की चुनौती से अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत, व्‍यापक और समग्र दृष्टिकोण के साथ निपटना होगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत न सिर्फ पेरिस समझौते के अपने लक्ष्य को हासिल कर रहा है बल्कि उससे भी अधिक कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन के तहत भारत पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में शामिल है। इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना है। इसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर हुए सम्मेलन ‘‘कोप-21’’ में अंगीकार किया गया था।

भारत की ओर से जलवायु परिवर्तन की दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि देश ने कम कार्बन उत्‍सर्जन करने वाली और जलवायु के अनुकूल विकास प्रक्रियाएं अपनाई हैं।

इस दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में एलईडी बल्ब के उपयोग को लोकप्रिय बनाया गया है, जिससे प्रति वर्ष तीन करोड 80 लाख टन कार्बन डाईऑक्‍साइड उत्‍सर्जन में कमी आई है।

उन्‍होंने कहा कि उज्‍ज्‍वला योजना के तहत तकरीबन आठ करोड परिवारों को धुआंरहित ईंधन उपलब्‍ध कराई गई है। यह दुनिया में सबसे बडा स्‍वच्‍छ ऊर्जा अभियान है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश में सिंगल यूज (एक बार इस्‍तेमाल होने वाली प्‍लास्टिक) के उन्‍मूलन के प्रयास किए जा रहे हैं। देश का वन क्षेत्र बढ रहा है। शेर और बाघों की आबादी बढ़ रही है। सरकार ने 2030 तक दो करोड 60 लाख हेक्‍टेयर खराब भूमि को सामान्‍य भूमि बनाने का लक्ष्‍य रखा है।’’

उन्होंने कहा कि भारत मेट्रो नेटवर्क, जलमार्ग और इनकी तरह के अगली पीढी के बुनियादी ढांचे तैयार कर रहा है।

उन्‍होंने उम्मीद जताते हुए कहा, ‘‘भारत 2022 से पहले 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादित करने का लक्ष्‍य हासिल कर लेगा और 2030 तक 450 गीगावाट का लक्ष्‍य प्राप्‍त हो जाएगा।

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