The mortal body of the great mathematician waiting for an ambulance, the poet Vishwas said - such neglect of Virat Pratibha, Bihar has become such a stone? | कवि विश्वास बोले- विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा, बिहार इतना पत्थर हो गया?, एंबुलेंस के इंतजार में महान गणितज्ञ का पार्थिव शरीर
कवि कुमार विश्वास ने वीडियो जारी कर बिहार सरकार पर निशाना साधा है।

Highlightsवाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर रहे सिंह वर्ष 1972 में भारत लौट आये थे। वे बिहार के मधेपुरा जिला स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे थे।

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पटना में निधन हो गया। 74 वर्षीय सिंह का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में निधन हो गया।

बर्कले के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से वर्ष 1969 में गणित में पीएचडी तथा ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी‘ पर शोध करने वाले सिंह लंबे समय से शिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित थे और पीएमसीएच में उनका इलाज चल रहा था। वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर रहे सिंह वर्ष 1972 में भारत लौट आये थे। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में अध्यापन का कार्य किया। वे बिहार के मधेपुरा जिला स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे थे।

कवि कुमार विश्वास ने वीडियो जारी कर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। कुमार विश्वास ने अपने ट्वीट में बिहार के सीएम नीतीश कुमार, बीजेपी नेता गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे और नित्यानंद राय को टैग करते हुए लिखा, ''आप सबसे सवाल बनता है...भारत मां क्यों सौंपे ऐसे मेधावी बेटे इस देश को, जब हम उन्हें संभाल ही न सकें?''

कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट कर कहा कि उफ़्फ़, इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा? विश्व जिसकी मेधा का लोहा माना उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया? आप सबसे सवाल बनता हैं ! भारतमाँ क्यूँ सौंपे ऐसे मेधावी बेटे इस देश को जब हम उन्हें सम्भाल ही न सकें?

अपनी मेधा से भारत को गौरवान्वित करने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर पटना स्थित उनके आवास ले जाने के लिए समय पर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाए जाने की वजह से बड़ी देर तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा।

 

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