Supreme Court Slaps Rs 1 lakh Cost on 7 States for Not Filing Response on Setting up Human Rights Courts | मानवाधिकार अदालतों की स्थापना के बारे में SC को नहीं दिया जवाब, तो ठोका गया सात राज्यों पर जुर्माना
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Highlightsउच्चतम न्यायालय ने जनवरी, 2018 के निर्देश के बावजूद मानवाधिकार अदालतों की स्थापना के बारे में शीर्ष अदालत में जवाब दाखिल नहीं करने वाले सात राज्यों पर मंगलवार को एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया।पीठ ने कहा कि जुर्माने की रकम का भुगतान करने के साथ ही ये सात राज्य चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने जनवरी, 2018 के निर्देश के बावजूद मानवाधिकार अदालतों की स्थापना के बारे में शीर्ष अदालत में जवाब दाखिल नहीं करने वाले सात राज्यों पर मंगलवार को एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया। शीर्ष अदालत ने राजस्थान और उत्तराखंड पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुये कहा कि इन राज्यों ने न तो जवाब दाखिल किया है और न ही सुनवाई के दौरान उनके वकील मौजूद थे।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ को बताया गया कि तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मेघालय और मिजोरम ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है। इसके बाद इन राज्यों पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

पीठ ने कहा कि जुर्माने की रकम का भुगतान करने के साथ ही ये सात राज्य चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। जुर्माने की यह राशि उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा समिति के यहां जमा करानी होगी जिसका इस्तेमाल किशोरों से संबंधित मामलों में किया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अपील पर सुनवाई के दौरान चार जनवरी, 2018 को मानवाधिकार संरक्षण कानून, 1993 के प्रावधानों के तहत मानवाधिकार अदालतें गठित करने और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति के बारे में सभी राज्यों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में अनाथ बच्चों के अधिकारों का गंभीर रूप से हनन होने से संबंधित एक मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत को मंगलवार को सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस मामले में सभी राज्यों में मानवाधिकार अदालतों की स्थापना और इनके लिये विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का ही मसला है।

पीठ ने टिप्पणी की कि एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने 25 जुलाई को निर्देश दिया था कि बाल यौन उत्पीड़न से संबंधित एक सौ से अधिक प्राथमिकी वाले प्रत्येक जिले में केन्द्र से वित्त पोषित अदालत गठित की जाये जो सिर्फ इन्हीं मुकदमों की सुनवाई करेगी।

पीठ ने कहा, ‘‘हम नहीं समझते कि विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति के बारे में किसी और आदेश की आवश्यकता है।’’ न्यायालय इस मामले में अब छह सप्ताह बाद आगे सुनवाई करेगा। 


Web Title: Supreme Court Slaps Rs 1 lakh Cost on 7 States for Not Filing Response on Setting up Human Rights Courts
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