State Bank of India SBI issues Electoral Bonds worth Rs 2772 crore since March 1 last year: RTI Report | RTI: SBI ने 8 महीनों में जारी किए दो हजार सात सौ 72 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी सामने आई है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 8 महीनों में दो हजार सात सौ 72 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड जारी किए। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighlightsRTI से जानकारी सामने आई है कि SBI ने आठ महीनों में 2772 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल जारी किए।इलेक्ट्रोरल बांड की बिक्री से इसी वर्ष 1-15 मार्च की सेल विंडो के दौरान लगभग आधी राशि 1,365.69 करोड़ रुपये आई।

Lok Sabha Elections 2019: सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के जरिये चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू हुई इलेक्टोरल बांड योजना को लेकर नई जानकारी सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में दावा किया है कि आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार चुनावी बांडों की बिक्री और खरीद के लिए अधिकार रखने वाली एक मात्र भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने पिछले वर्ष 1 मार्च से अब तक 2,772.78  करोड़ रुपये की कीमत के इलेक्ट्रोरल बांड जारी किए हैं। जिसमें से लगभग आधी राशि 1,365.69 करोड़ रुपये बीते 1 से 15 मार्च की सेल विंडो के दौरान आई। 

रिपोर्ट के मुताबिक एसबीआई ने बताया कि 15 दिनों की अवधि के दौरान जारी किए गए 2,742 बांडों में से 1,264 बांडों की कीमत 1 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा थी। 

बता दें कि नियम के मुताबिक इलेक्टोरल बांड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में जारी किए जाते हैं।
 
सरकार ने भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत तमाम राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए नकद चंदे के विकल्प के तौर पर इलेक्टोरल बांड योजना शुरू की थी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में सभी राजनीतिक दलों को अब तक प्राप्त चंदे का विवरण 30 मई तक सीलबंद लिफाफे में चुनाव आयोग सौंपने का निर्देश दिया था। 

दरअसल, एक एनजीओ एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें इलेक्टोरल बांड योजना को चुनौती दी गई थी। याचिका के जरिये इलेक्टोरल बांड पर स्टे लगाने या दानदाता के नामों की घोषणा करने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की बेंच ने राजनीतिक पार्टियों को आदेश दिया था कि वे दानदाताओं की पहचान और चुनावी बांड की रसीदें चुनाव आयोग को पेश करें। 

अदालत ने वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया था कि अप्रैल और मई में चुनावी बांड खरीदने की विंडो 10 दिन से घटाकर पांच दिन की जाए। 

रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष 1-10 जनवरी में सेल विंडो के दौरान 350.36 करोड़ रुपये की कीमत के 937 बांड जारी किए गए थे। पिछले वर्ष 1-10 अक्टूबर में सेल विंडो के दौरान एसबीआई ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों से पहले 401.73 करोड़ रुपये की कीमत के 733 बांड बेचे थे। 

कब-कब जारी किए गए इलेक्टोरल बांड

1-10 मार्च 2018 के दौरान 222 करोड़ रुपये के 520 इलेक्टोरल बांड जारी किए गए।
1-10 अप्रैल 2018 के दौरान 114.90 करोड़ रुपये के 256 बांड जारी किए गए। 
1-10 मई 2018 के दौरान 101.40 करोड़ रुपये की कीमत के 2014 बांड जारी किए गए। 
2-11 जुलाई 2018 के दौरान 82 बांड जारी किए गए जिनकी कीमत 32.50 करोड़ रुपये थी। 
1-10 अक्टूबर 2018 के दौरान 401.73 करोड़ रुपये के 733 इलेक्टोरल बांड जारी किए गए। 
1-10 नवंबर 2018 के दौरान 184.20 करोड़ रुपये के 339 बांड जारी किए गए। 

1-10 जनवरी 2019 के दौरान 350.36 करोड़ रुपये की कीमत के 937 बांड जारी किए गए।
1-15 मार्च 2019 के दौरान 1365.69 करोड़ रुपये के 2742 बांड जारी किए गए। 

बता दें कि कोई भी भारतीय नागरिक, संस्था या फिर कंपनी इलेक्टोरल बांड खरीद सकती है। इसके लिए KYC फॉर्म भरना होता है। बांड देने और खरीदने वाले का नाम गुप्त रखा जाता है। बांड की अवधी 15 दिन के लिए मान्य होती है। हर राजनीतिक पार्टी को चुनाव आयोग को बताना होता है कि बांड के जरिये उसे कितनी राशी मिली है।


Web Title: State Bank of India SBI issues Electoral Bonds worth Rs 2772 crore since March 1 last year: RTI Report