Prime Minister Narendra Modi first charter taxpayers’ rights and duties and evoked a national appeal ahead of 74th Independence Day | नए कर सुधारों पर पीएम मोदी का बड़ा कदम, ‘पारदर्शी कराधान - ईमानदार का सम्मान’ मंच की शुरुआत, जानिए क्या हुए बदलाव
‘‘जो कर देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो कर दायरे में नहीं है, वे स्वयं से आगे आएं और कर का भुगतान करें व देश निर्माण में योगदान दें।’’

Highlightsभ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और अधिकारियों के कर मामलों में जरूरत से अधिक दखल पर अंकुश लगेगा।निष्पक्ष और पारदर्शी कर परिवेश सुनिश्चित करने के लिये करदाता चार्टर (अधिकार पत्र) लागू किये जाने की भी घोषणा की।‘पारदर्शी कराधान - ईमानदार का सम्मान’ मंच की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि भारत में कर भुगतान करने वालों की संख्या केवल 1.5 करोड़ है जो 130 करोड़ की जनसंख्या में बहुत कम है।

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को देश की कर व्यवस्था में बड़े सुधारों का ऐलान करते हुए कहा कि अब कर रिटर्न का ‘फेसलेस’ आकलन होगा।

इसमें करदाताओं और कर अधिकारियों को एक दूसरे से मिलने अथवा पहचान रखने की जरूरत नहीं होगी। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और अधिकारियों के कर मामलों में जरूरत से अधिक दखल पर अंकुश लगेगा। साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी कर परिवेश सुनिश्चित करने के लिये करदाता चार्टर (अधिकार पत्र) लागू किये जाने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कर प्रणाली अड़चन रहित, कष्टरहित और पहचान रहित हो। प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये कर व्यवस्था में सुधारों को आगे बढ़ाते हुए ‘पारदर्शी कराधान - ईमानदार का सम्मान’ मंच की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि भारत में कर भुगतान करने वालों की संख्या केवल 1.5 करोड़ है जो 130 करोड़ की जनसंख्या में बहुत कम है।

स्वयं से आगे आएं और कर का भुगतान करें व देश निर्माण में योगदान दें

उन्होंने कहा, ‘‘जो कर देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो कर दायरे में नहीं है, वे स्वयं से आगे आएं और कर का भुगतान करें व देश निर्माण में योगदान दें।’’ प्रत्यक्ष कर सुधारों की दिशा में ‘करदाता चार्टर’ और ‘फेसलेस आकलन’ और ‘फेसलेस अपील’ अगला चरण है। इसका मकसद अनुपालन को सरल करना तथा ईमादार करदाताओं को पुरस्कृत करना है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार कोविड-19 संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये अनेक प्रोत्साहन उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि फेसलेस आकलन के तहत करदाताओं को आयकर विभाग के दफ्तर के चक्कर लगाने या अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं होगी।

वहीं करदाता चार्टर कर अधिकारियों और करदाताओं के कर्तव्यों और अधिकारों को निर्धारित करता हैं ये दोनों सुधार बृहस्सपतिवार से अमल में आ गये जबकि ‘फेसलेस अपील’ का प्रावधान 25 सितंबर से लागू होगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर के कर अधिकारी करदाताओं की जांच, अपील और नोटिस देने का जिम्मा संभालते थे। लेकिन अब ये भूमिका एक प्रकार से खत्म हो गई है, अब इसको प्रौद्योगिकी की मदद से बदल दिया गया है।’’

देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास औचक रूप से आबंटित किया जाएगा

प्रधानमंत्री ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘अब जांच के मामलो को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास औचक रूप से आबंटित किया जाएगा। जैसे अब मुंबई के किसी करदाता के रिटर्न से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो इसकी छानबीन का जिम्मा अब मुंबई के अधिकारी के पास नहीं जाएगा, बल्कि संभव है वो चेन्नई की फेसलेस टीम के पास जा सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘और वहां से भी जो आदेश निकलेगा उसकी समीक्षा किसी दूसरे शहर, जैसे जयपुर या बेंगलुरु की टीम को जा सकता है। अब फेसलेस टीम कौन सी होगी, इसमें कौन-कौन होगा ये भी औचक किया किया जाएगा। इसमें हर साल बदलाव भी होता रहेगा।’’

यह पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत होगी। इसमें अगर किसी को नोटिस भेजा जाता है, तो वह पूरी तरह से केंद्रीयकृत कंप्यूटर प्रणाली द्वारा ही भेजा जाएगा। उसके लिये किसी कर कार्यालय या किसी अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से करदाता और आयकर दफ्तर को जान-पहचान बनाने का, प्रभाव और दबाव का मौका ही नहीं मिलेगा। सब अपने-अपने दायित्वों के हिसाब से काम करेंगे। ‘‘विभाग को इससे लाभ ये होगा कि अनावश्यक मुकदमेबाज़ी नहीं होगी। दूसरा ‘ट्रांस्फर-पोस्टिंग’ में लगने वाली गैरज़रूरी ऊर्जा से भी अब राहत मिलेगी।’’

विभाग के अधिकारियों के कर्तव्यों के साथ करदाताओं के अधिकारों को स्पष्ट करता

करदाता चार्टर के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विभाग के अधिकारियों के कर्तव्यों के साथ करदाताओं के अधिकारों को स्पष्ट करता है। कर विभाग जब तक कुछ गलत साबित नहीं हो, प्रत्येक करदाता के साथ ईमानदार करदाता के रूप में व्यवहार करेगा और उन्हें निष्पक्ष, विनम्र तथा उपयुक्त सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

साथ ही चार्टर में यह भी अपेक्षा की गयी है कि करदाता समय पर कर का भुगतान करेंगे, ईमानदार रहेंगे और नियमों का अनुपालन करेंगे। सक्षम और कर के दायरे में आने वाले लोगों से स्वयं से कर देने का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘बीते 6-7 साल में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में करीब ढाई करोड़ की वृद्धि हुई है। लेकिन ये भी सही है कि 130 करोड़ के देश में ये अभी भी बहुत कम है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े देश में सिर्फ डेढ़ करोड़ लोग ही आयकर जमा करते हैं। इस पर देश को आत्मचिंतन करना होगा। आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मचिंतन जरूरी है। और ये जिम्मेदारी सिर्फ कर विभाग की नहीं है, हर भारतीय की है। जो कर देने में सक्षम हैं, लेकिन अभी वो कर नेट में नहीं है, वो देशवासी स्वप्रेरणा से आगे आएं...।’’

कभी दबाव में कुछ फैसले हो जाते थे, तो उन्हें सुधार कह दिया जाता था

सुधारों के बारे में मोदी ने कहा कि पूर्व में कभी मजबूरी में कुछ फैसले ले लिए जाते थे, कभी दबाव में कुछ फैसले हो जाते थे, तो उन्हें सुधार कह दिया जाता था। इस कारण इच्छित परिणाम नहीं मिलते थे। अब ये सोच और रुख, दोनों बदल गये हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर सुधारों में बुनियादी और संरचनात्क सुधारों की जरूरत है क्योंकि इसे उस समय लाया गया जब भारत गुलाम था।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां जटिलता होती है, वहां अनुपालन कठिन होता है... कानून की संख्या कम होनी चाहिए और ऐसा होना चाहिए जिससे करदाता खुश हों।’’ मोदी ने कहा, ‘‘हमने विवाद से विश्वास योजना लायी ताकि ज्यादातर मामले अदालत के बार निपटाये जा सकें। इसके परिणामस्वरूप, कम समय में करीब 3 लाख मामलों का निपटान किया गया।’’

उन्होंने कहा कि कर सुधारों की दिशा में काम जारी है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लाया गया जिसमें दर्जनों करें समाहित हुई। रिटर्न से लेकर रिफंड ऑनलाइन हुआ है। मोदी ने कहा कि यही नहीं, पहले 10 लाख रुपए से ऊपर के विवादों को लेकर सरकार उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय पहुंच जाती थी।

उच्चतम न्यायालय में 2 करोड़ रुपए तक के मामले ले जाने की सीमा तय की गई

अब उच्च न्यायालय में 1 करोड़ रुपए तक के और उच्चतम न्यायालय में 2 करोड़ रुपए तक के मामले ले जाने की सीमा तय की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रक्रियाओं की जटिलताओं के साथ-साथ देश में कर की दर भी कम की गयी है। 5 लाख रुपए की आय पर अब कर शून्य है। बाकी स्लैब में भी कर कम हुआ है।

कंपनी कर के मामले में हम दुनिया में सबसे कम कर लेने वाले देशों में से एक हैं।’’ उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कंपनी कर की दर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत तथा नई विनिर्माण इकाइयों के लिए इसे 15 प्रतिशत किया गया। साथ ही कंपनियों को लाभांश वितरण कर से मुक्त कर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘उनकी सरकार का पिछले छह साल में इस बात पर जोर रहा कि बैंक से वंचित लोगों तक बैंक सुविधा उपलब्ध करायी जाए, असुरक्षित को सुरक्षित किया जाए और वित्त पोषण से रहित को वित्त पोषण उपलब्ध कराया जए। आज एक तरह से एक नई यात्रा शुरू हो रही है।’’

उन्होंने कहा कि हमारा जोर कर प्रणाली को लोगों के अनुकूल बनाना है और इसके लिये चार कदम उठाये जा रहे हैं। ‘‘ये कदम हैं, नीति आधारित संचालन व्यवस्था, लोगों की ईमानदारी पर भरोसा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और सरकारी मशीनरी, नौकरशाही को दक्ष बनाना।’’ इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर तथा वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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