Prem Parivartan AKA Peepal Baba planting the lakhs of trees in India Inspiring story | #KuchhPositiveKarteHain: कहानी 'पीपल बाबा' की जिन्होंने एक करोड़ लोगों का काम अकेले किया!
#KuchhPositiveKarteHain: कहानी 'पीपल बाबा' की जिन्होंने एक करोड़ लोगों का काम अकेले किया!

अंग्रेजी की एक चर्चित कहावत है, 'Each one plant one', अर्थात इंसान को अपने जीवनकाल में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए। अगर सभी लोग पेड़ लगाएंगे और हमारी धरती पर उतने पेड़ हो जाएंगे जितने लोग हैं तो इससे पर्यावरण में स्थायित्व आएगा। प्रदूषण, ओजोन समस्या और ग्लोबल वार्मिंग से अपने आप निजात मिल जाएगी। समाज ने इस कहावत को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों ने पेड़ों को एक वस्तु समझा। उसमें लाभ देखा। जिसका खामियाजा आज की पीढ़ी को भुगतना पड़ रहा है। इस सबके बीच एक ऐसा शख्स है जिसने 'Each one plant one' को पूरी गंभीरता से लेते हुए 1 करोड़ से ज्यादा लोगों का काम खुद कर दिया। हम बात कर रहे हैं स्वामी प्रेम परिवर्तन उर्फ पीपल बाबा की, जिन्होंने पिछले 40 सालों में अकेले 1 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए हैं। 

बचपन में नानी और दादी कहती थी कि जब भी दुख में हो तो पेड़ों के नीचे बैठ जाओ। इस प्रैक्टिस से मुझे एक चीज़ समझ आ गई कि पेड़ हमारे परिवार हैं। मेरी नानी ने एक दिन कहा कि कोई ऐसा काम करो जिसका असर हजार साल तक रहे। इस बात ने मेरे मन में गहरा असर किया। : पीपल बाबा

10 साल की उम्र में प्रेम परिवर्तन की एक टीचर थी मिसेज विलियम्स। उन्होंने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता कूट-कूटकर भर दी थी। 11 साल की उम्र में सबसे पहला पेड़ लगाया। 1977 से पेड़ों के साथ शुरू हुई यह यात्रा अनवरत जारी है। प्रेम परिवर्तन का मानना है कि पेड़ों का परिवार 40 करोड़ साल पुराना है। मनुष्य चेतना महज 60 हजार साल पुरानी है। पेड़ो के कारण मनुष्य पैदा हुए। अगर कोई पुख्ता उपाय नहीं किए गए तो जल्दी ही आदम जात का विनाश हो जाएगा। पेड़ों के जीवन से मनुष्यों का जीवन जुड़ा है। हमने पेड़ों को एक वस्तु (कमोडिटी) बना दिया।

स्वामी प्रेम परिवर्तन कैसे बने पीपल बाबा?

बचपन से ही प्रेम परिवर्तन का पेड़ों से लगाव रहा है। उन्होंने पेड़ों को हमेशा अपने दोस्त के रूप में पाया। 1977 में पहली बार पेड़ लगाया और उसके बाद यह सिलसिला शुरू हो गया। 1984 में राजस्थान के किसी गांव में उन्होंने पीपल के पेड़ लगाने का बीड़ा उठाया। उनके जुनून को देखते हुए लोगों ने चिढ़ाने के लिए पीपल बाबा बुलाना शुरू कर दिया। 1990 तक आते-आते पीपल बाबा व्यापक रूप से पुकारा जाने लगा। उनके काम की मीडिया कवरेज और चर्चाओं के बाद अब तो कई लोग पीपल बाबा का असली नाम जानते ही नहीं हैं।

'Give Me Trees Trust' की स्थापना

पीपल बाबा का कहना है कि उन्होंने 1977 से 2004 तक व्यक्तिगत  तौर पर काम किया। फिर उनके दिमाग में आया कि अकेले काम करने से अच्छा है एक संगठन बनाया जाए जिसमें लोगों को जोड़ सकें। अक्टूबर 2011 में गिव मी ट्रीज ट्रस्ट की औपचारिक शुरुआत हुई। यह एक एनजीओ है तो पर्यावरण के लिए काम करता है। पीपल बाबा के दावे के अनुसार इस ट्रस्ट ने देशभर में 2 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए हैं जिसमें अधिकांश पीपल के वृक्ष हैं। पौधारोपण के अलावा वो जैविक खेती, कम्पोस्ट खाद और लोगों को प्रेरित करने का भी काम करते हैं।

आप टाइगर और हाथी को बचाने के लिए करोड़ों रुपये लगा देते हैं। उनपर क्या इन्वेस्ट करेंगे। उन्हें उनका जंगल दे दो। वो अपने आप जीवित रहेंगेः पीपल बाबा

पीपल का वृक्ष ही क्यों?

पीपल बाबा के अनुसार, 'पीपल के आस-पास हजारों गाथाएं हैं। लोगों को लगता है कि पीपल पर भूतों का वास होता है। उसके कुछ और कारण हैं। जैसे वो बहुत विशाल होता है और उसकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं। पीपल के पेड़ में जल्दी कीड़ा नहीं लगता। इसका पौधा आसानी से मिल जाता है। इसमें पानी की कमी लगती है। ये जल्दी से नष्ट नहीं होता। काफी अरसा चलता है।'

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पर्यावरण के लिहाज से ये संकट की घड़ी है। इस मुद्दे पर पूरी दुनिया की सरकारों को साथ आना होगा। उन्हें ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे ना सिर्फ प्रकृति का दोहन रुके बल्कि नए जंगलों का निर्माण हो। पूरी मनुष्य जाति को अपने स्तर पर भी इसके लिए कदम उठाने चाहिए। पीपल बाबा कहते हैं, 'इंसान को इस धरती का आधा हिस्सा प्रकृति के लिए छोड़ देना चाहिए और आधे हिस्से पर वास करना चाहिए। सारी समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी।'

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Web Title: Prem Parivartan AKA Peepal Baba planting the lakhs of trees in India Inspiring story

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