Padampur Assembly seat by-election 2022: बीजद, बीजेपी और कांग्रेस में मुकाबला, सीएम पटनायक के सामने चार केंद्रीय मंत्री प्रचार करने उतरे, 2019 के बाद से पांच उपचुनाव

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: December 3, 2022 10:04 PM2022-12-03T22:04:00+5:302022-12-03T22:05:00+5:30

Padampur Assembly seat by-election 2022: 2024 में होने वाले लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनावों से पहले पदमपुर उपचुनाव को अंतिम चुनाव माना जा रहा है।

Padampur Assembly seat by-election 2022 BJD, BJP and Congress four central ministers came out campaign CM Patnaik five by-elections since 2019 | Padampur Assembly seat by-election 2022: बीजद, बीजेपी और कांग्रेस में मुकाबला, सीएम पटनायक के सामने चार केंद्रीय मंत्री प्रचार करने उतरे, 2019 के बाद से पांच उपचुनाव

बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 2019 के बाद पहली बार प्रचार अभियान शुरू किया।

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Highlightsउपचुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। ओडिशा में 2019 के बाद से कम से कम पांच उपचुनाव हुए हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 2019 के बाद पहली बार प्रचार अभियान शुरू किया।

Padampur Assembly seat by-election 2022: ओडिशा की पदमपुर विधानसभा सीट पर पांच दिसंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान शनिवार शाम चार बजे समाप्त हो गया। पदमपुर में चुनाव प्रचार शोरगुल वाला था क्योंकि उपचुनाव के नतीजे ओडिशा की राजनीति पर असर डाल सकते हैं।

2024 में होने वाले लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनावों से पहले पदमपुर उपचुनाव को अंतिम चुनाव माना जा रहा है। उपचुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। ओडिशा में 2019 के बाद से कम से कम पांच उपचुनाव हुए हैं। बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 2019 के बाद पहली बार प्रचार अभियान शुरू किया।

वहीं, चार केंद्रीय मंत्रियों - नरेंद्र सिंह तोमर, अश्विनी वैष्णव, धर्मेंद्र प्रधान और बिशेश्वर टुडू ने भाजपा उम्मीदवार प्रदीप पुरोहित के लिए प्रचार किया। मतदान सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक होगा और मतगणना आठ दिसंबर को होगी। ओडिशा में पदमपुर विधानसभा सीट पर पांच दिसंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने प्रचार में अलग अलग समुदायों को रिझा रहे हैं। हालांकि राज्य में जाति की राजनीति का दबदबा रहा है।

पश्चिमी ओड़िशा के बारगढ़ जिले की पदमपुर सीट पर कुल 2.57 लाख मतदाताओं में से 29 फीसदी आदिवासी हैं। मतदान की तारीख करीब आने के साथ ही दोनों दल गंधमर्दन पर्वत की तलहटी में स्थित भगवान नृसिंहनाथ मंदिर के पास अलग अलग समुदायों की सभाएं कर रहे हैं।

भाजपा के सुंदरगढ़ से सांसद जुआल ओराम दो दिन पहले यहां आए थे जबकि बीजद विधायक और पार्टी के चुनाव प्रबंधक सुशांत सिंह यहां लगातार आ रहे हैं। पदमपुर सीट 2009 तक अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी लेकिन अब यह सामान्य सीट है। सीट पर बरिहा परिवार का कब्ज़ा रहा है जो बिंझाल समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

बिजय रंजन सिंह बरिहा इस सीट से पांच बार विधायक रहे। अक्टूबर में उनके निधन की वजह से इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। इससे पहले उनके पिता बिक्रमादित्य सिंह बरिहा तीन बार विधायक रहे थे। इस बार मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने दिवंगत विधायक बिजय रंजन सिंह बरिहा की बेटी बर्षा सिंह बरिहा को टिकट दिया है।

इससे पदमपुर में बिंझाल समुदाय के प्रभाव का पता चलता है जिसके तकरीबन 40,000 मतदाता हैं। हालांकि पटनायक उम्मीदवार का नाम घोषित करने से पहले पदमपुर में रहने वाले कुल्टा और मेहर समुदायों के लोगों को रिझाना नहीं भूले थे। उन्होंने चुनाव से पहले कुल्टा और मेहर समुदाय के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

कुल्टा समुदाय के मतदाताओं की संख्या करीब 30,000 और मेहर समुदाय के मतदाताओं की संख्या करीब 20,000 हजार है। सीट पर अनुसूचित जाति के 28.63 प्रतिशत मतदाता हैं। दलित और आदिवासी मतदाताओं की कुल संख्या 44.48 हो जाती है। शेष मतदाता अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के हैं, जबकि बहुत कम लोग सामान्य जातियों के हैं।

पदमपुर में माली, ब्राह्मण, यादव, कुंभार और अगरिया जैसी जातियों की भी अच्छी खासी मौजूदगी है। मुख्यमंत्री ने कुल्टा समाज के सदस्य और ओडिशा प्रशासनिक सेवा के पूर्व सदस्य महेंद्र बडेई को बीजद में शामिल किया और उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया है। बडेही को शुक्रवार को बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक की चुनावी रैली में जनता को संबोधित करने की अनुमति भी दी गई थी।

इसमें भाजपा भी पीछे नहीं है। उसने बृहस्पतिवार को कांग्रेस के पूर्व सांसद संजय भोई को पार्टी में शामिल कर लिया। इससे पार्टी का मकसद कुल्टा समाज के मतों को हासिल करना है। संजय भोई के पिता कृपासिंधु भोई बारगढ़ लोकसभा सीट से चार बार सांसद रहे और संजय भोई के भाजपा में शामिल होने से उपचुनाव में बीजद और कांग्रेस दोनों की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उपचुनाव से पहले समुदायों को रिझाने के लिए पटनायक की आलोचना की है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक संतोष सिंह सलूजा ने बीजद और भाजपा की "समुदाय आधारित राजनीति" करने के लिए आलोचना की और इसके माध्यम से लोगों को विभाजित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "ओडिशा के लोगों ने पहले जाति की राजनीति को खारिज कर दिया था और अब वे समुदाय की राजनीति करने वालों को भी सबक सिखाएंगे।" दूसरी ओर बीजद विधायक सुशांत सिंह ने दावा किया कि पदमपुर विधानसभा सीट पर सभी जाति और समुदाय के लोग उनकी पार्टी का समर्थन करते हैं, क्योंकि पटनायक सभी लोगों के लिए काम करते हैं।

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