नन बलात्कार मामलाः बिशप फ्रैंको मुलक्कल के बरी होने पर ननों में आक्रोश, हाईकोर्ट में करेंगी अपील

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: January 15, 2022 07:39 AM2022-01-15T07:39:11+5:302022-01-15T08:01:18+5:30

बिशप को बरी करते हुए कोट्टायम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत-प्रथम के न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता का यह दावा कि उसके साथ 13 बार बलात्कार किया गया, उसके एकमात्र गवाही पर भरोसा के लायक नहीं है।

Nun rape case Anger among nuns over the acquittal of Bishop Franco Mulakkal they will appeal against the court decision | नन बलात्कार मामलाः बिशप फ्रैंको मुलक्कल के बरी होने पर ननों में आक्रोश, हाईकोर्ट में करेंगी अपील

नन बलात्कार मामलाः बिशप फ्रैंको मुलक्कल के बरी होने पर ननों में आक्रोश, हाईकोर्ट में करेंगी अपील

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Highlightsबिशप को बरी करते हुए जज ने कहा कि कोई ठोस सबूत नहीं मिलाबरी होने के बाद बिशप ने कहा जिन पेड़ों पर फल लगते हैं, पत्थर उन पर ही फेंके ही जाते हैंपीड़िता का समर्थक ननों ने कहा कि वह न्याय के लिए कुछ भी करेंगी

कोट्टायम (केरल): केरल में कोट्टायम की एक अदालत ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल को नन से बलात्कार के आरोपों से शुक्रवार को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद पीड़िता की समर्थक ननों ने अदालत के फैसले पर स्तब्धता जताते हुए निराशा प्रकट की और कहा कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं प्रसन्न दिख रहे बिशप ने अपने अनुयायियों से ‘प्रभु का गुणगान करने एवं प्रसन्न रहने’ की अपील की। अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत, प्रथम, ने बिशप को बरी कर दिया क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ सबूत पेश करने में विफल रहा था।

बिशप को बरी करते हुए जज ने दी ये दलीलें

बिशप को बरी करते हुए कोट्टायम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत-प्रथम के न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता का यह दावा कि उसके साथ 13 बार बलात्कार किया गया, उसके एकमात्र गवाही पर भरोसा के लायक नहीं है। यह रेखांकित करते हुए कह पीड़िता की गवाही एक समान नहीं रही है, अदालत ने कहा कि पीड़िता ने अपनी साथियों के साथ जो तकलीफ बांटी है उसमें कहा कि उसके (बिशप) यौन इच्छाओं के सामने नहीं झुकने पर उसे (नन) परेशान किया जा रहा है, वहीं पीड़िता ने अदालत में अपने बयान में कहा कि 13 बार उसके साथ बलात्कार किया गया है। अदालत ने कहा, ‘‘अभियोजन बयानों में बदलाव के संबंध में उचित स्पष्टीकरण देने में असफल रहा है।’’ यह रेखांकित करते हुए कि पीड़िता ने सबसे पहले डॉक्टर के समक्ष कहा था कि उसके साथ यौन संबंध नहीं बनाया गया है, अदालत ने विभिन्न फैसलों का हवाला दिया और कहा कि पीड़िता के बयान में बार-बार हुए बदलाव को देखते हुए अदालत का मानना है कि उसे ठोस गवाह नहीं माना जा सकता है और ना ही उसे पूरी तरह विश्वास योग्य माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान के अलावा ‘‘अभियोजन के मुकदमे को साबित करने के लिए अन्य कोई ठोस सबूत नहीं है।’’

बरी किए जाने के बाद बिशप की आंखें हुईं नम

फैसला सुनने के लिए अदालत पहुंचे मुलक्कल ने राहत की सांस ली और इस दौरान उनकी आंखें भी नम हो गई। फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने अपने समर्थकों और वकीलों को गले भी लगाया। मुलक्कल (57) ने पत्रकारों से कहा, ‘‘भगवान का शुक्रिया।’’ फैसले के बाद उनके कुछ अनुयायी खुशी से रोते हुए भी दिखाए दिए। फैसले के तुरंत बाद जारी एक संक्षिप्त बयान में जालंधर डायोसिस ने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया, जो लगातार बिशप की बेगुनाही में विश्वास करते रहे और उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान करते रहे। बिशप के कानूनी दल के एक वकील ने कहा, ‘‘ अभियोजन पक्ष, बिशप के खिलाफ आरोपों को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है।’’

मुलक्कल ने कहा, ‘‘ जिन पेड़ों पर फल लगते हैं, पत्थर उन पर ही फेंके ही जाते हैं। प्रभु का गुणगान करिए।’’ अदालत का फैसला सुनकर उनकी आंखों से आंसू निकल आए। पीड़िता एवं उनकी समर्थक नन दक्षिण केरल के इस जिले में कुराविलांगड कानवेंट में रहती हैं। न्याय के लिए ननों के संघर्ष का चेहरा रही सिस्टर अनुपमा ने संवाददाताओं से कहा कि वे निश्चित ही इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी और अपनी बेबस सहयोगी की लड़ाई को आगे ले जायेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘जो धनी एवं प्रभावशाली हैं वे इस समाज में कुछ भी कर सकते हैं। समाज में यही हम अपने आसपास देखते हैं। हमने इस मामले की बहस के समय तक कुछ भी अजीब महसूस नहीं किया । हमारा मानना है कि उसके बाद इसे (मामले को) बिगाड़ दिया गया।’’

पीडि़ता के न्याय के लिए कुछ भी करने को तैयार

सिस्टर अनुपमा ने कहा कि वह पीडि़ता के न्याय के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बिशप की कानूनी टीम का नेतृत्व करने वाले जाने-माने आपराधिक मामलों के वकील बी. रमन पिल्लई ने कहा कि उन्हें फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का अधिकार है। पिल्लई ने  कहा, "यहां तक कि अगर वे अपील के लिए जाती हैं, तो भी कोई समस्या नहीं है क्योंकि बिशप के खिलाफ अभियोजन के आरोप झूठे हैं।" भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी एस. हरिशंकर ने कहा कि फैसला स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ अपील की जानी चाहिए। हरिशंकर ने बिशप के खिलाफ बलात्कार मामले में विशेष जांच दल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘ यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। हमें इस मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाने की पूरी उम्मीद थी।’

फैसला स्वीकार नहीं

 लोक अभियोजक जितेश जे. बाबू ने भी यही भावना व्यक्त की और कहा कि पीड़िता के बयान के बावजूद ऐसा फैसला आया। उन्होंने कहा, ‘‘ इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’ सरकार की मंजूरी मिलने के बाद फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। नन ने जून 2018 में पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 2014 से 2016 के बीच मुलक्कल ने उनका यौन शोषण किया था। वह तब रोमन कैथोलिक चर्च के जालंधर डायोसिस के बिशप थे। कोट्टायम जिले की पुलिस ने जून 2018 में ही बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया था। मामले की तहकीकात करने वाले विशेष जांच दल ने बिशप को सितंबर 2018 में गिरफ्तार किया था और उन पर बंधक बनाने, बलात्कार करने, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाये थे। मामले में नवंबर 2019 में सुनवाई शुरू हुई, जो 10 जनवरी को पूरी हुई थी। अदालत ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर उसकी अनुमति के बिना मुकदमे से संबंधित किसी भी सामग्री को प्रकाशित/प्रसारित करने से रोक लगा दी थी।

Web Title: Nun rape case Anger among nuns over the acquittal of Bishop Franco Mulakkal they will appeal against the court decision

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