मध्य प्रदेश: शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर गोशाला चलाएगी शिवराज सरकार, 100 करोड़ का फंड इकट्ठा करने की योजना

By विशाल कुमार | Published: November 20, 2021 12:21 PM2021-11-20T12:21:26+5:302021-11-20T12:26:15+5:30

पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि (गौ संवर्धन) बोर्ड को 1,300 गोशालाओं में रहने वाली 2.6 लाख गायों को खिलाने के लिए 160 करोड़ रुपये की जरूरत है। लेकिन बजट केवल 60 करोड़ रुपये का है।

madhya pradesh cow shelters liquor bjp shivraj chouhan | मध्य प्रदेश: शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर गोशाला चलाएगी शिवराज सरकार, 100 करोड़ का फंड इकट्ठा करने की योजना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. (फाइल फोटो)

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Highlightsमध्य प्रदेश की 1,300 गोशालाओं में 2.6 लाख गाय.गायों की देखभाल के लिए 160 करोड़ रुपये की जरूरत लेकिन बजट केवल 60 करोड़ रुपये।शराब और अन्य सेवाओं पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने की योजना।

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार राज्य में गौशाला चलाने के खर्च को पूरा करने के लिए 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने के लिए शराब और स्थानीय निकायों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की योजना बना रही है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ गौ संवर्धन बोर्ड की बैठक के बाद वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में फैसला भोपाल में गुरुवार को गौ संवर्धन बोर्ड की बैठक में लिया गया था, क्योंकि लोगों ने दान देने में उदासीनता दिखाई और 2020 में नए कृषि कानूनों के लागू होने के कारण मंडी बोर्ड से गौ संरक्षण के राजस्व में गिरावट आई।

पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि (गौ संवर्धन) बोर्ड को 1,300 गोशालाओं में रहने वाली 2.6 लाख गायों को खिलाने के लिए 160 करोड़ रुपये की जरूरत है। लेकिन बजट केवल 60 करोड़ रुपये का है।

प्रतिदिन प्रति गाय व्यय की आवश्यकता 20 रुपये है, जबकि प्रति दिन छह रुपया प्रदान किया जाता है। चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में केवल फंड इकट्ठा करने पर चर्चा हुई।

पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया ने कहा कि वित्त और वाणिज्य कर विभाग को प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।

अधिकारी ने कहा कि हम उन उत्पादों और सेवाओं पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगा सकते जो पहले से ही जीएसटी के अंतर्गत आते हैं। हमारे पास दो विकल्प बचे हैं - मानव उपभोग के लिए उपयोग की जाने वाली शराब और पेट्रोलियम उत्पाद पर अधिभार लगाना। चूंकि ईंधन की कीमतें पहले से ही अधिक हैं, इसलिए हम शराब, बिजली और नगर निकायों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर कर लगाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इससे पहले, तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अक्टूबर 2019 में गौ उपकर लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मार्च 2020 में उनके इस्तीफा देने के बाद प्रस्ताव समाप्त हो गया।

विपक्षी कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आयोजनों पर पैसा खर्च करने और कल्याणकारी गतिविधियों को चलाने के लिए कर लगाकर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए हमला किया।

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