कोलकाता: पूजा पंडालों के विषयों में कोविड पीड़ितों के लिए स्मारक, नए कपड़ों की लालसा भी शामिल

By भाषा | Published: October 13, 2021 07:21 PM2021-10-13T19:21:10+5:302021-10-13T19:21:10+5:30

Kolkata: The themes of the puja pandals include a memorial for the Kovid victims, the craving for new clothes | कोलकाता: पूजा पंडालों के विषयों में कोविड पीड़ितों के लिए स्मारक, नए कपड़ों की लालसा भी शामिल

कोलकाता: पूजा पंडालों के विषयों में कोविड पीड़ितों के लिए स्मारक, नए कपड़ों की लालसा भी शामिल

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कोलकाता, 13 अक्टूबर कोलकाता की विभिन्न पूजा समितियों ने इस बार भी लोगों को आकर्षित करने के लिए विविध विषयों को चुना है और इनमें चार सदी पहले एक जमींदार द्वारा दुर्गा पूजा के महंगे आयोजन से लेकर कोविड के कारण जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में स्मारक, त्योहारों के लिए बच्चों में नए कपड़े को लेकर उत्साह, ऑक्सीजन संयंत्र तक शामिल हैं।

दुर्गा पूजा त्योहार के तीसरे दिन यानी महाष्टमी को लोग विभिन्न विषयों पर आधारित मूर्तियों और सजावट की एक झलक पाने के लिए पंडालों में आते हैं।

दक्षिण कोलकाता के बरिशा में एक आयोजक ने 400 साल पहले राजसाही (अब बांग्लादेश में) के एक जमींदार द्वारा आयोजित पूजा को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया है। आयोजकों के अनुसार शोध के दौरान पता चला कि 1606 में हुई पूजा के लिए राजा कंगसा नारायण ने नौ लाख रुपये खर्च किए थे।

बरिसा सबरना पारा पूजा समिति ने विशेषज्ञों की मदद से किए गए शोध का हवाला देते हुए दावा किया कि मूर्ति का निर्माण रमेश भास्कर ने किया था जो उस समय के सबसे अच्छे कलाकारों में से एक थे।

पूजा समिति के महासचिव बरुण घोष ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अपने 73वें वर्ष में, हमने तत्कालीन जमींदार कंगसा नारायण द्वारा की गयी पूजा को वापस लाने का प्रयास किया है और यह उस समय की सबसे महंगी पूजाओं में से एक थी। 1606 में नौ लाख रुपये आज 300 करोड़ रुपये के बराबर है।’’

पूजा समिति ने इसे "300 कोटिर पूजा" (300 करोड़ रुपये की पूजा) का नाम दिया है।

उत्तरी कोलकाता की एक पूजा समिति इलाके के उन 20 लोगों को याद कर रही है जिनकी कोविड -19 के कारण मृत्यु हो गई थी।

पूजा समिति के एक प्रवक्ता ने कहा कि उनके पंडाल में इन लोगों की तस्वीरों को लगाया गया है और सब कुछ सादगी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे तर्पण नाम दिया गया है।

सुरुचि संघ ने पूजा से पहले नए कपड़ों की बच्चों की इच्छा को अपनी पूजा का विषय बनाया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Web Title: Kolkata: The themes of the puja pandals include a memorial for the Kovid victims, the craving for new clothes

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