जम्मू-सियालकोट सड़कः तो आधे घंटे में पहुंच जाएंगे पाकिस्तान, पिछले 10 सालों से जी-तोड़ कोशिश जारी

By सुरेश एस डुग्गर | Published: June 16, 2021 07:50 PM2021-06-16T19:50:23+5:302021-06-16T19:56:11+5:30

जम्मू कश्मीर की जनता को पाकिस्तान पहुंचने के लिए आधे घंटे से कम समय लगेगा अगर दोनों देश उस जम्मू-सियालकोट सड़क को पुनः खोलने पर राजी होते हैं जिसे खुलवाने का बहुतेरा प्रयास स्व मुफ्ती मुहम्मद सईद भी कर चुके हैं।

Jammu-Sialkot road Reaching Pakistan easier since last 10 years hard work continues | जम्मू-सियालकोट सड़कः तो आधे घंटे में पहुंच जाएंगे पाकिस्तान, पिछले 10 सालों से जी-तोड़ कोशिश जारी

श्रीनगर-रावलपिंडी की सड़क एलओसी की परिस्थितियों की शिकार हो गई थी। (फोटो- लोकमत)

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Highlightsजम्मू कश्मीर की एकमात्र यही सड़क है जो दो मुल्कों को मिलाती है और जो पिछले 74 सालों से सही हालात में है।देश के विभाजन के उपरांत श्रीनगर-रावलपिंडी सड़क को बंद कर दिया गया था।कारवां-ए-अमन के परिचालन को आरंभ नहीं किया गया था।

सुचेतगढ़ः किसी भी यात्री बस में बैठ मात्र आधे घंटे में पाकिस्तान पहुंचा जाए तो कैसा लगेगा। यह कोई सपना नहीं बल्कि एक हकीकत है।

देर बस इस बात की है कि इस हकीकत को पूरा करने के लिए पिछले 10 सालों से जी-तोड़ कोशिशें हो रही हैं। यह सच है कि जम्मू कश्मीर की जनता को पाकिस्तान पहुंचने के लिए आधे घंटे से कम समय लगेगा अगर दोनों देश उस जम्मू-सियालकोट सड़क को पुनः खोलने पर राजी होते हैं जिसे खुलवाने का बहुतेरा प्रयास स्व मुफ्ती मुहम्मद सईद भी कर चुके हैं।

जम्मू कश्मीर की एकमात्र यही सड़क है जो दो मुल्कों को मिलाती है और जो पिछले 74 सालों से सही हालात में है। इसका इस्तेमाल आज भी संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों द्वारा हिन्दुस्तान व पाकिस्तान आने-जाने के लिए किया जाता है। इस सड़क की एक सच्चाई यह है कि यह आज भी एकदम अच्छी अवस्था में है जिस प्रकार देश के बंटवारे के पूर्व थी।

देश के विभाजन के उपरांत श्रीनगर-रावलपिंडी सड़क को बंद कर दिया गया था ठीक उसी प्रकार जम्मू-सियालकोट सड़क को बंद किया गया था। श्रीनगर-रावलपिंडी की सड़क एलओसी की परिस्थितियों की शिकार हो गई थी। इस कारण वह तब तक आने जाने के काबिल नहीं रह गई थी जब तक उसको खोल कर उस पर कारवां-ए-अमन के परिचालन को आरंभ नहीं किया गया था।

मगर जम्मू-सियालकोट सड़क अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में आने से आज भी शांति का एक प्रतीक मानी जाती है। यह शांति का प्रतीक इसलिए भी मानी जाती हैै क्योंकि जिस सुचेतगढ़ सैक्टर से होकर यह दोनों देशों में से गुजरती है, हिन्दुस्तान की ओर से आक्ट्राय पोस्ट व पाकिस्तान की ओर से पीली पोस्ट से गुजरती है, वह दोनों सीमा चौकिआं दोनों देशों की सेनाओं के बीच बैठक करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

यह भी सच है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी को रूकवाने तथा घुसपैठ करवाने के लिए पाकिस्तान द्वारा जो गोलीबारी की जाती रही है पिछले कई सालों से उससे यह सड़क बची हुई है। अगर नेताओं व लोगों की बात मानते हुए दोनों देश इस सड़क मार्ग को खोलने पर राजी होते हैं तो पाकिस्तान पहुंचने में मात्र आधा घंटा लगेगा।

ऐसा इसलिए है क्योंकि जम्मू से सियालकोट मात्र 25 किमी की दूरी पर है और इस सीमा चौकी से मात्र 11 किमी। ऐसा होने से जम्मू कश्मीर की जनता को वाघा सीमा से पाकिस्तान जाने की 20 घंटों की यात्रा से बचना आसान होगा। यूं तो पुंछ से मीरपुर मात्र 29 किमी और कोटली 35 किमी की दूरी पर है और सबसे लम्बा रास्ता उड़ी-मुज्जफराबाद की सड़क तय करती है।

Web Title: Jammu-Sialkot road Reaching Pakistan easier since last 10 years hard work continues

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