india's forest cover marginally increases over last 2 years | कटते वनों की कौन लेगा सुध, क्षेत्रफल में हुआ इजाफा पर चिंता अभी बरकरार, पढ़ें आंकड़ा

देश की जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है उसी तेजी से वनों के गायब होने की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। बीते लंबे समय से देखा जा रहा है वनों के पेड़ों को काटकर घरों का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन कटते वनों के बीच एक खुशखबरी आई है। दरअसल एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक क्षेत्रफल की दृष्टि से बीते दो सालों में भारत के वनों में तेजी से इजाफा हुआ है। दरअसल इस बात का खुलासा पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट में हुआ है।

क्या कहते हैं रिपोर्ट के आंकड़े

 रिपोर्ट के मुताबिक देश में जहां 2015 में वन  का क्षेत्र 701495 वर्ग किमी का था। वहीं, 2017 में बढ़ गया है। अब बढ़कर ये आंकड़ा 708273 वर्ग किमी पर पहुंच गया। ये इजाफा 2015 से 17 के बीच में हुआ है। यह इजाफा  लगभग 6778 वर्ग किमी का आंका गया है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि भारत में बीते दो सालों में वन क्षेत्र में एक फीसदी की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं वन के सात साथ देश के वृक्षों के क्षेत्रफल में भी बीते दो सालों में इजाफा देखने को मिला है। रिपोर्ट की मानें तो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 24.3 प्रतिशत हिस्से पर वन या फिर वृक्ष मौजूद हैं। 

कौन है वनों में आगे और कौन पीछे

वनों के लिहाज से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओड़ीशा और तेलंगाना सबसे आगे हैं। यहां वनों के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है जो बाकियों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। वहीं, इस सबसे कुछ जगहों के आंकड़ों को लेकर चिंता अभी भी बरकरार है। पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के वनों का क्षेत्रफल घटा है। जो काफी चिंता जनक है। वहींस बात पूर्वी हिमाचल की जाए तो वहां 630 वर्ग किलोमीटर हिस्से में फैला वन क्षेत्र भी सिकुड़ा है। 

आंकड़ों पर सरकार का रूख

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद  पर्यावरण मंत्री हषवर्धन ने खुशी जताई है। उनके मुताबिक ‘2015 की तुलना में 2017 में देश के अत्यंत सघन वन के क्षेत्रफल में 1.36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जो कि पर्यावरण के लिहाज से अच्छी खबर है। वहीं, 2015 में पेश की वनों की रिपोर्ट में देश के 589 जिलों को शामिल किया गया था जबकि इस बार की रिपोर्ट में 633 जिलों को शामिल किया गया है।