Court bans two primaries lodged against BJP leader in clash with TMC activists | न्यायालय ने टीएमसी कायकताओं से झड़प मामले में भाजपा नेता के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों पर लगाई रोक
न्यायालय ने टीएमसी कायकताओं से झड़प मामले में भाजपा नेता के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों पर लगाई रोक

नयी दिल्ली, 13 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकताओं और भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के सुरक्षाकर्मियों के बीच हुयी झड़प की घटना के बारे में सीआईएसएफ की विशेष घटना रिपोर्ट के अवलोकन के बाद बोस के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों की कार्यवाही पर बुधवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऋषिकेष राय की पीठ ने इसके साथ ही प.बंगाल के भाजपा नेता कबीर बोस की याचिका पर राज्य सरकार और राज्य पुलिस को नोटिस जारी किये। बोस ने इस घटना की किसी स्वतंत्र एजेन्सी से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान बोस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अनुपमलाल दास तथा अधिवक्ता समीर कुमार ने ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार सीआईएसएफ ने सीलबंद लिफाफे में पिछले साल छह दिसंबर की घटना के बारे में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है।

केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने भी इस बात की पुष्टि की सीआईएसएफ की रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।

न्यायालय ने इस मामले में पांच जनवरी को तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के सुरक्षा दस्ते के बीच हुयी कथित झड़प के संबंध में सीआईएसएफ द्वारा दायर विशेष घटना रिपोर्ट पेश करने का केन्द्र को निर्देश दिया था। न्यायालय ने इसके अलावा घटना वाले दिन भाजपा नेता से संबंधित मूवमेंट लॉग बुक सीलबंद लिफाफे में पेश करने का भी निर्देश दिया था।

विशेष घटना रिपोर्ट वह औपचारिक रिपोर्ट है जो क्षेत्रीय केन्द्र में कार्यरत व्यक्ति के किसी अपराध या घायल होने जैसी किसी अप्रत्याशित घटना में संलिप्त होने के बारे में दाखिल की जाती है।

बोस ने अपनी याचिका में इस घटना की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस से इतर सीबीआई, विशेष जांच दल या किसी स्वतंत्र एजेन्सी से कराने और छह दिसंबर को कथित झड़प से संबंधित घटना के सिलसिले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में जांच और आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया था।

बोस ने अपनी याचिका में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल के सेरामपुर में वह और उनके साथ चल रही सीआईएसएफ की टुकड़ी पर उनके घर के बाहर ही रात में करीब आठ बजे संतोष कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के नेतृत्व में जबर्दस्त पथराव किया गया था। यह हमला होते ही सीआईएसएफ याचिकाकर्ता को तुरंत ही सुरक्षित स्थान पर ले गयी और इसके बाद सवेरे दो बजे तक इस क्षेत्र के सांसद कल्याण बनर्जी के नेतृत्व में राज्य पुलिस के सक्रिय समर्थन से टीएमसी के 200 से ज्यादा गुंडों ने पूरी इमारत की घेराबंदी कर रखी थी।

बोस ने कहा है कि सात दिसंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने पूरी इमारत की घेराबंदी कर ली थी और उन्हें कानून व्यवस्था की समस्या का हवाला देते हुये इमारत से बाहर निकलने से रोका।

याचिकाकर्ता के अनुसार थाने में पुलिस अधिकारी बार बार कह रहे थे कि कल्याण बनर्जी याचिकाकर्ता को तुरंत गिरफ्तार करने के लिये जबर्दस्त दबाव डाल रहे थे और इसीलिए याचिकाकर्ता को थाने में ही गिरफ्तार कर लिया गया और संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हुये उसे जानबूझ कर कोविड पृथकवास वार्ड में दूसरे कोविड मरीजों के साथ करीब चार घंटे तक रखा गया।

न्यायालय ने पिछले साल 18 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी के पांच नेताओं को उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में दर्ज आपराधिक मामलों में अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था और राज्य की पुलिस को निर्देश दिया था कि इन नेताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाये।

न्यायालय से अंतरिम संरक्षण प्राप्त करने वाले नेताओं में भाजपा के इन नेताओं में मुकुल रॉय के अलावा दो सांसद कैलाश विजयवर्गीय और अर्जुन सिंह भी शामिल हैं। इनके अलावा, भाजपा के दो अन्य नेताओं-सौरव सिंह और पवन कुमार को भी न्यायालय ने इसी तरह का अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।

इन सभी नेताओं ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में आरोप लगाया है कि विधानसभा के आसन्न चुनावों से संबंधित राजनीतिक गतिविधियों से उन्हें दूर रखने के लिये उन पर आपराधिक मामले थोपे जा रहे हैं।

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