Highlightsकोर्ट ने राज्य में बढ़ रही लापारवाही पर नाराजगी जताई.बिहार में देश की 10 फीसदी आबादी रह रही है. ऐसे में यह कहना कि राज्य में कोरोना नहीं है. यह सच्चाई नहीं है.

पटनाः बिहार में कोरोना के बढ़ते मामलों पर पटना हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि बिहार कोरोना को खा गया, यह बात सच नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि यहां पर लोग कोरोना को लेकर सतर्क नहीं है, जो कि गलत है. कोर्ट ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में मामले को लंबित होने के कारण इसपर सुनवाई टाल दिया है. हाईकोर्ट का अभी इस संबंध में कुछ कहना उचित नहीं होगा, लेकिन बिहार के लोगों की सोच बदलनी जरूरी है. यहां के लोग यह समझ रहे हैं कि बिहार से कोरोना चला गया. 

कोर्ट का कहना है कि बिहार घनी आबादी वाला यह राज्य है. यहां देश के दसवें हिस्से के लोग निवास करते हैं. यहां के लोगों को ज़ोर देकर बताना होगा कि कोरोना कितना भयावह संक्रमण है. केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे कोरोना बचाव के सभी कार्यक्रम से लोगों को जागरूक करना होगा.

उन्हें समझाना होगा की शहरों एवं गांवों में कोरोना संक्रमण से लोग प्रभावित हो रहे हैं. पटना हाईकोर्ट में कोरोना के बढ़ते मामले पर सुनवाई हुई, जिसपर राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ महाधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा. महाधिवक्ता ने कहा की राज्य में मौसम परिवर्तन के कारण कोरोना का खतरा बढ़ा है.

कोर्ट ने राज्य में बढ़ रही लापारवाही पर नाराजगी जताई

सरकार लोगों को जागरूक कर रही है. वहीं कोर्ट ने राज्य में बढ़ रही लापारवाही पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार यहां के लोगों को जोर देकर बताएं कि कोरोना का संक्रमण बढ सकता है. पटना में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है.

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि लोगों को जागरूक करने से ही कोरोना से निपटा जा सकता है. मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बरकरार रखना, सार्वजनिक जगहों पर भीड इकट्ठा न होने देना और सभी तरह का प्रयास करने से समस्या से सही तरीके से निपटा जा सकता है. 

वहीं, जयपुर के फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. अंकित बंसल ने कहा है कि कोरोनावायरस या कोविड-19 महामारी पूरी दुनिया में कहर बरपा रही है. लेकिन आंकडे यह बताते हैं कि ट्यूबरकुलोसिस या टीबी हर दिन अधिक लोगों को प्रभावित करती है.

भारत में टीबी की बीमारी एक तिमाही में लगभग 20,000 लोगों (2019 के आंकडों के मुताबिक) की मौत का कारण बनती है, जबकि मार्च महीने से लेकर अब तक कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या काफी कम है. हालांकि, टीबी भी कोविड-19 की तरह संक्रामक है, लेकिन टीबी मरीजों को मौजूदा समय में अधिक सावधान रहना ज्यादा जरूरी है. टीबी मरीज़ों को मास्क पहनने और शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है.

टीबी और कोविड-19 मरीजों को एक जैसे लक्षणों का अनुभव होता

उन्होंने बताया है कि टीबी और कोविड-19 मरीजों को एक जैसे लक्षणों का अनुभव होता है. दोनों ही बीमारियां मरीज के फेफडों को शिकार बनाती हैं और इनमें बुखार, खांसी और थकान जैसे आम लक्षण होते हैं. ऐसे में टीबी मरीजों को भूख लगने में कमी, रात के वक्त पसीना आना, वजन घटना और अत्यधिक थकान का अनुभव भी होता है. जबकि कोविड-19 से प्रभावित लोगों में नाक बंद होना, सांस लेने में तकलीफ या डायरिया आदि लक्षण देखने मिलते हैं.

कोविड-19 के लक्षण सात से चौदह दिनों के अंदर नजर आते हैं और चले भी जाते हैं (लेकिन संक्रमण बना रहता है), लेकिन टीबी के लक्षण काफी लंबे वक्त तक रहते हैं. उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी हवा के जरिये फैलती है (एक स्वस्थ व्यक्ति को टीबी का संक्रमण तभी होगा, जब वह संक्रमित हवा को सांस के जरिये अंदर लेगा). लेकिन कोविड-19 में आपको संक्रमण तभी होगा जब आप एक कोविड-19 मरीज़ के करीब जाएं और उसे छूएं, और फिर अपने नाक, आंख या मुंह को छुएं, तब आपको यह संक्रमण या बीमारी होगी.

डॉ. अंकित बंसल ने बताया कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और इसकी समय पर जांच व इलाज को पूरा करने से बीमारी को वापस लौटने से रोका भी जा सकता है. एक टीबी मरीज़ 2-3 सप्ताह तक नियमित दवाएं लेता है, तो उसकी बीमारी का संक्रमण मिट जाता है. इसके बाद मरीज को सिर्फ अगले 6-9 महीने या फिर जब तक डॉक्टर कहे, तब तक दवाएं जारी रखने की जरूरत होती है. लेकिन कोविड-19 का अब तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है.

घर से बाहर निकलते वक्त हर समय अपने मुंह और नाक को ढंक कर रखें

इसलिए, अपनी सुरक्षा करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि घर से बाहर निकलते वक्त हर समय अपने मुंह और नाक को ढंक कर रखें, हर थोडे समय पर साबुन से अपने हाथ धोते रहें और स्वच्छता बनाए रखें. उन्होंने कहा कि टीबी और कोविड-19 दोनों ही बीमारियों के साथ भय और सामाजिक भेदभाव जुडा होता है और कई मरीज समाज की अनदेखी के कारण तकलीफ झेलते हैं. लेकिन हमें इन मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

उन्हें एक ‘पीडित’, ‘अलग-थलग एकांत में रहने वाला’ या ‘संदिग्ध मामले’ बिल्कुल नहीं कहा जाना चाहिए. बल्कि होना यह चाहिए कि डॉक्टरों, अस्पताल कर्मचारियों, टीबी से ठीक हो चुके मरीजों, टीबी या कोविड-19 मरीज़ों के परिजन और दोस्तों को एकजुट होकर इन दोनों बिमारियों के बारे में समाज को शिक्षित करने एवं जागरूकता फैलाने के लिए काम करना चाहिए. 

साथ ही इन बिमारियों से जुड़ी अवधारणनाओं एवं गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश भी करनी चाहिए. अगर आप भी ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का अनुभव करें, तो जल्द से जल्द अपने निकटतम डॉक्टर के पास जाएं. टीबी और कोविड-19 की जल्द जांच और उपचार से आपकी जान बच सकती है और आपके आसपास के लोग भी सुरक्षित रहेंगे.

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