Coronavirus Lockdown: Sealed borders to prevent migrants, affected by supply shortage | लॉकडाउन: प्रवासियों को रोकने के लिए सीमाएं सील, मजदूरों की कमी से आपूर्ति हुई प्रभावित
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Highlightsघातक कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की खातिर प्रवासी मजदूरों के आवागमन को रोकने के लिए सोमवार को कई राज्यों ने अपनी सीमाएं प्रभावी रूप से बंद कर दी। ष्ट्रव्यापी बंद के कारण प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

नई दिल्लीः घातक कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की खातिर प्रवासी मजदूरों के आवागमन को रोकने के लिए सोमवार को कई राज्यों ने अपनी सीमाएं प्रभावी रूप से बंद कर दी। राष्ट्रव्यापी बंद के कारण प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। इधर, एफएमसीजी कंपनियों ने आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने में ट्रकों और श्रमिकों की अनुपलब्धता को एक बड़ी चुनौती बताया है। 

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते बेरोजगार होने के कारण हजारों प्रवासी मजदूरों के अपने घरों को वापस लौटने के बीच सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की कि ‘‘भय एवं दहशत’’ कोरोना वायरस से बड़ी समस्या बनती जा रही है। शीर्ष न्यायालय ने इन लोगों के पलायन को रोकने के लिए उठाये जा रहे कदमों के बारे में केंद्र से मंगलवार तक रिपोर्ट देने को कहा है। 

21 दिन के बंद के छठे दिन, देश के विभिन्न हिस्सों से आई रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 के संकट से निपटने के लिए जो पाबंदियां लगाई गई हैं उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को प्रभावित किया है क्योंकि उपलब्ध सामान कम होता जा रहा है और ताजा सामान आना मुश्किल है। 

सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में फिलहाल प्रभावी 21 दिन के लॉकडाउन की अवधि को और बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब आशंका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकथाम के उपायों के तहत देशभर में कारोबार ठप पड़ने से गंभीर आर्थिक संकट एवं सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। 

सेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में आ रही उस खबर को भी गलत बताया है जिसमें कहा जा रहा है कि अप्रैल में संभवत: आपातकाल की घोषणा की जाएगी। दूसरी ओर, रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद (एफएमसीजी) बनाने वाली आईटीसी, डाबर और पारले जैसी कंपनियों को प्रवासी मजदूरों के पलायन से कारखानों को चालू रखने में दिक्कत पेश आ रही है। वहीं माल की ढुलाई के लिए ट्रकों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

डाबर इंडिया के कार्यकारी परिचालन निदेशक शाहरुख खान ने कहा कि कई राज्यों में स्थानीय स्तर पर मुद्दों का समाधान कर आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाने में मदद मिली है। ‘लेकिन कारखानों को चलाने के लिए श्रमिकों की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जो मजदूर अपने घरों से दूर रहकर काम कर रहे थे उनमें से अधिकतर सार्वजनिक पाबंदी के दौरान अपने घरों को लौट रहे हैं। इसलिए कारखानों को ठीक से चलाने में यह बड़ी बाधा है।’’ 

इसी तरह का अनुभव साझा करते हुए आईटीसी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हमने कुछ राज्यों में अपने परिचालन के लिए अनुमति पाने में प्रगति की है। लेकिन ट्रकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कारखानों में मजदूरों की कमी के साथ-साथ ट्रकों का अंतरराज्यीय आवागमन इस सार्वजनिक पाबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।’’ 

पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ अधिकारी मयंक शाह ने कहा, ‘‘ सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों की कमी है। कंपनियों के सामने बड़ी दिक्कत यह है कि श्रमिकों के अभाव में वह अपने कारखाने किस तरह चलाएं।’’’ उन्होंने कहा कि कारखानों में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक प्रवासी होते हैं। वह अपने शहरों की ओर वापस लौट रहे हैं। इसलिए उनकी कम संख्या एक बड़ी चुनौती है। पारले प्रॉडक्ट के सीनियर कैटेगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती मानव संसाधन है। 

उन्होंने कहा, ‘‘कंपनियों के सामने नई चुनौती यह है कि श्रमिकों की अनुपलब्धता में वे अपने संयंत्र कैसे चलाएंगी।’’ उन्होंने कहा कि उत्पादन संयंत्रों के अधिकांश कामगार प्रवासी मजदूर हैं और वे अपने-अपने घर लौट रहे हैं जो एक बड़ी चुनौती है। पंजाब में राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि यहां कि औद्योगिक इकाइयों को संचालन जारी रखने की इजाजत दी जाएगी लेकिन उनका कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह संभव नहीं है। 

हरियाणा पुलिस ने कहा कि उन्होंने सभी अंतरराज्य सीमाएं सील कर दी हैं ताकि प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोका जा सके। उत्तराखंड सरकार ने अंतरराज्यीय आवाजाही को रोकने का अपना पहले का फैसला वापस ले लिया। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1,071 और मृतकों की संख्या 29 हो गई है। 

Web Title: Coronavirus Lockdown: Sealed borders to prevent migrants, affected by supply shortage
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