Corona virus Delhi March 21 1,746 persons staying in Hazrat Nizamuddin Markaz 216 foreigners 1530 Indians | Coronavirus Cases: गृह मंत्रालय ने कहा- 1 जनवरी से देश में 2100 विदेशी मरकज भारत आए, कुल 303 तबलीगी कार्यकर्ताओं में कोविड-19 के लक्षण थे
अभी तक ऐसे 2,137 लोगों की पहचान की जा चुकी है, उनकी चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। (photo-ani)

Highlightsनयी दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन स्थित बंगले वाली मस्जिद में तबलीगी मरकज में अपने आगमन की आमतौर पर सूचना देते हैं।पुलिस से भारतीय तबलीगी जमात कर्मियों का स्थानीय समन्वयकों से पता लगाने, उनकी चिकित्सकीय जांच कराने ओर उन्हें पृथक करने को कहा गया था।

नई दिल्लीः सरकार ने मंगलवार को कहा कि इस साल 1 जनवरी से देश में तबलीगी गतिविधियों के लिये 2100 विदेशी भारत आए और उनमें से सभी ने पहले दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित उसके मुख्यालय में आमद दर्ज कराई।

निजामुद्दीन स्थित तबलीगी मुख्यालय से कोरोना वायरस के कई मामले सामने आए हैं। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि कुल 303 तबलीगी कार्यकर्ताओं में कोविड-19 के लक्षण थे और उन्हें दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है। एक बयान में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि अब तक तबलीगी जमात के 1,339 कार्यकर्ताओं को नरेला, सुल्तानपुरी और बक्करवाला पृथक केंद्रों के अलावा दिल्ली के एलएनजेपी, आरजीएसएस, जीटीबी, डीडीयू अस्पतालों के साथ ही एम्स, झज्जर (हरियाणा) भेजा गया है।

बाकी लोगों की अभी कोविड-19 संक्रमण को लेकर चिकित्सा जांच की जा रही है। बयान में कहा गया कि एक आकलन के मुताबिक जनवरी के बाद से तबलीगी गतिविधियों के लिये करीब 2100 विदेशी भारत आए। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 21 मार्च तक उनमें से लगभग 824 देश के विभिन्न हिस्सों में चले गए, 216 निजामुद्दीन मरकज में रह रहे हैं, जिनमें से कई कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं।

अन्य लोग हो सकता है कि 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी बंद की घोषणा से पहले ही देश से चले गए हों। यह बंद घोषणा के अगले दिन से प्रभावी हुआ था। तबलीगी जमात के देसी और विदेशी कार्यकर्ता वर्ष भर देश के अलग-अलग इलाकों में उपदेश देने या ‘चिल्ला’ के लिये दौरे पर रहते हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यामां, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान समेत विभिन्न राष्ट्रों से लोग तबलीगी गतिविधियों के लिये आते हैं। बयान में कहा गया कि ऐसे सभी विदेशी नागरिक सामान्य तौर पर अपने आने की सूचना सबसे पहले हजरत निजामुद्दीन स्थित बंगलेवाली मस्जिद में तबलीगी मरकज में देते हैं।

यहां से उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में चिल्ला गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जाती है। चिल्ला गतिविधियों का समन्वय सभी राज्यों में विभिन्न जिलों में जिला समन्वयकों द्वारा किया जाता है जिनकी निगरानी का काम कुछ राज्यों में ‘प्रदेश अमीर’ के द्वारा किया जाता है। इसमें कहा गया, “इसके साथ ही, 21 मार्च को देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 824 विदेशी चिल्ला गतिविधियों में शामिल थे।” गृह मंत्रालय ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय तबलीगी जमात कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा कि 21 मार्च को 824 विदेशियों का विवरण सभी राज्य पुलिस बलों से साझा किया गया जिससे उनकी पहचान हो सके और चिकित्सा जांच के बाद उन्हें पृथक रखा जा सके। इसके अलावा, 28 मार्च को सभी राज्यों की पुलिस से कहा गया है कि वे स्थानीय समन्वयक से सभी तबलीगी कार्यकर्ताओं के नामों की सूची तैयार करें, उनका पता लगाएं और चिकित्सा जांच के बाद उन्हें पृथक करें। बयान में कहा गया, “अब तक विभिन्न राज्यों में ऐसे 2,137 लोगों की पहचान हुई है।”

उन्हें पृथक किया गया है और उनकी जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया अब भी चल रही है तथा ऐसे और लोगों की पहचान कर उनका पता लगाया जाएगा। मंत्रालय ने कहा, ‘’21 मार्च को हजरत निजामुद्दीन मरकज में करीब 1,746 लोग रह रहे थे। इनमें से 216 विदेशी थे और 1530 भारतीय।’’ मंत्रालय के मुताबिक 28 मार्च को गृह मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को विस्तृत परामर्श जारी किया गया था। यह परामर्श दिल्ली के पुलिस आयुक्त को भी भेजा गया था।

खुफिया ब्यूरो के निदेशक द्वारा 29 मार्च को एक बार फिर राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को यह परामर्श दिया गया कि वे अपने इलाकों में ऐसे सभी तबलीगी कार्यकर्ताओं की आवाजाही पर नजर रखें, उनके संपर्क में आने वालों पर भी नजर रखी जाए और उनकी चिकित्सा जांच के लिये कदम उठाए जाएं।

बयान में कहा गया कि कई राज्यों ने पहले ही यह करना शुरू कर दिया है। हजरत निजामुद्दीन मरकज में रह रहे तबलीगी जमातके सभी कार्यकर्ताओं की 26 मार्च से ही चिकित्सा जांच की जा रही है। अब तक 1203 तबलीगी जमात कार्यकर्ताओं की जांच हो चुकी है। मंत्रालय ने कहा कि आव्रजन ब्यूरो राज्यों से प्रभावित देशों से आए लोगों के बारे में जानकारी (एक फरवरी से) साझा कर रहा है। इसके अलावा आव्रजन ब्यूरो राज्यों के साथ छह मार्च से सभी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर आने वाले भारतीयों और विदेशियों की जानकारी साझा कर रहा है।

‘तबलीगी’ गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए इस साल करीब 2,100 विदेशी भारत आए। दिल्ली में इस्लामी धार्मिक सभा में भाग लेने वाले गुजरात निवासियों की पहचान करने के लिए जांच के आदेश दिए गए है।भारत आने वाले विदेशियों में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमा, बांग्लादेश, श्री लंका और किर्गिस्तान के लोग शामिल थे।

गृह मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार के सभी विदेशी नागरिक नयी दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन स्थित बंगले वाली मस्जिद में तबलीगी मरकज में अपने आगमन की आमतौर पर सूचना देते हैं। 28 मार्च को सभी राज्यों की पुलिस से भारतीय तबलीगी जमात कर्मियों का स्थानीय समन्वयकों से पता लगाने, उनकी चिकित्सकीय जांच कराने ओर उन्हें पृथक करने को कहा गया था।

अभी तक ऐसे 2,137 लोगों की पहचान की जा चुकी है, उनकी चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है, उन्हें पृथक किया गया है। ऐसे ही और लोगों की पहचान की जाएगी और उनका पता लगाया जाएगा। 303 तबलीगी कार्यकर्ताओं में कोविड-19 संक्रमण के लक्षण थे और उन्हें दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है।

अधिकारियों के अनुसार 16 देशों के इन विदेशियों सहित कुल 1,830 लोग 24 मार्च को 21 दिवसीय लॉकडाउन लागू होने के बाद भी तब्लीगी जमात के मरकज में बने रहे। इन विदेशियों में इंडोनेशिया (72), श्रीलंका (34), म्यांमार (33), किर्गिस्तान (28), मलेशिया (20), नेपाल (9), बांग्लादेश (9), थाईलैंड (7), फिजी (4), इंग्लैंड (3), अफगानिस्तान, अल्जीरिया, जिबूती, सिंगापुर, फ्रांस और कुवैत का एक..एक नागरिक शामिल हैं। बाकी 1,549 लोगों में से तमिलनाडु (501), असम (216), उत्तर प्रदेश (156), महाराष्ट्र (109), मध्य प्रदेश (107), बिहार (86), पश्चिम बंगाल (73), तेलंगाना (55), झारखंड (46), कर्नाटक (45), उत्तराखंड (34), हरियाणा (22), अंडमान निकोबार द्वीप समूह (21), राजस्थान (19), हिमाचल प्रदेश, केरल और ओडिशा से 15..15, पंजाब (9) और मेघालय (5) के निवासी शामिल हैं।

केजरीवाल ने कहा: निजामुद्दीन मरकज से 1,500 लोग निकाले गए, आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि यहां निजामुद्दीन मरकज से 1,548 लोगों को निकाला गया है जिनमें से 441 को कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निजामुद्दीन (पश्चिम) में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए 1,107 लोगों को पृथक रखा गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना वायरस के 97 मामलों में से 24 लोग वे हैं जो इस महीने के शुरू में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

केजरीवाल ने कार्यक्रम के आयोजकों की निन्दा की और कहा कि इन लोगों ने महामारी के चलते दूसरे देशों में हजारों लोगों की मौत को देखते हुए ऐसे समय में इस तरह का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर बहुत ही ‘‘गैर जिम्मेदाराना’’ काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पहले ही उपराज्यपाल अनिल बैजल से सिफारिश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि निजामुद्दीन इलाके में हुई इस घटना को लेकर अधिकरियों की किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शहर में कोरोना वायरस के 97 मामलों में से 86 रोगियों की हालत स्थिर है। दो लोगों को ऑक्सीजन दी जा रही है और एक अन्य को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लगभग 3,775 स्कूलों और रैन बसेरों से बुधवार से लगभग 10-12 लाख लोगों को भोजन के पैकेट बांटने शुरू करेगी। केजरीवाल ने कहा कि हालांकि भोजन के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना नहीं है, लेकिन अधिक वितरण बिन्दु भौतिक दूरी बनाए रखने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि मदद की कोशिश कर रहे उद्योगपतियों को मेडिकल स्टाफ के लिए रक्षात्मक उपकरण, जांच किट और वेंटिलेटर दान करने में मदद करनी चाहिए जिनकी इस समय सर्वाधिक आवश्यकता है।

मरकज पर पुलिस का छापा : 11 बांग्लादेशी नागरिकों समेत 14 को पृथक वार्ड में भेजा

भदोही जिले में पुलिस ने तब्लीग जमात के मरकज़ पर मंगलवार को छापा मार कर वहां से 11 बांग्लादेशी नागरिकों सहित कुल 14 लोगों को सरकारी अस्पताल में जांच के बाद पृथक वार्ड में भर्ती कराया। पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह ने बताया, ‘‘यह सभी लोग 27 फरवरी को ढाका से चलकर दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन मरकज़ गये थे। 14 लोगों का यह दल वहां से लौटकर चार मार्च से ही शहर के काजीपुर स्थित मरकज़ के गेस्ट हॉउस में रुका था।

इनमें असम का एक और पश्चिम बंगाल के दो युवक भी शामिल हैं। इन लोगों ने पिछले 25 दिन में जगह-जगह लोगों से मिलकर धर्म का प्रचार-प्रसार किया है।’’ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन लोगों ने चार मार्च के बाद से गेस्ट हाउस और काजीपुर स्थित एक मस्जिद में कई धार्मिक आयोजन भी किये, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया, ‘‘गेस्ट हाउस में कर्मचारियों सहित उनके संपर्क में आये लोगों की पहचान की जा रही है। प्राथमिक जांच में इन लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं। फिर भी सभी को महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल में बने पृथक वार्ड में 14 दिन के लिए रखा गया है।’’ 

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