Bihar: RJD is giving tough competition to the claim of Nitish Kumar's reputation in the by-elections in five assembly seats, one in the Lok Sabha. | बिहार: विधानसभा की पांच, लोकसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव में नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा लगी दांव पर, RJD दे रही है कड़ी टक्कर
उल्लेखनीय है कि चार सीटें जदयू की रहीं हैं, जिसे फिर से हासिल करने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है

Highlightsसत्ताधारी जदयू को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'चेहरे' पर वोट मिलने का भरोसा हैउपचुनाव में नीतीश के 'चेहरे' की साख दांव पर रहेगी.

बिहार में विधानसभा की पांच और लोकसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. सत्ताधारी जदयू को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'चेहरे' पर वोट मिलने का भरोसा है, लेकिन राजनीति के गलियारे में माना जा रहा है कि इस उपचुनाव में नीतीश के 'चेहरे' की साख दांव पर रहेगी. 21 अक्टूबर को होने वाला उपचुनाव एक प्रकार से नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा से जुड़ा है.

यहां उल्लेखनीय है कि चार सीटें जदयू की रहीं हैं, जिसे फिर से हासिल करने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. इन चारों ही सीटों पर जदयू का मुकाबला राजद से है, हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल साथ थे. एक अन्य सीट किशनगंज की है, जिसपर कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से है. वहां एमआइएम के भी प्रत्याशी मैदान में है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 17 एवं 18 अक्टूबर को इन सीटों पर जदयू के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करेंगे. वह भाजपा उम्मीदवार के लिए किशनगंज में भी चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. वहीं, दूसरी ओर राजद के चुनाव प्रचार की कमान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संभाल रखी है. महागठबंधन में दो सीटों पर आपसी तालमेल नहीं बन पाया है, जिसका लाभ स्वाभाविक रूप से एनडीए को मिलेगा. हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा ने नाथनगर और विकासशील इंसान पार्टी ने सिमरी बख्तियारपुर में अपने उम्मीदवार उतार रखे हैं, हालांकि मैदान में महागठबंधन की ओर से राजद के प्रत्याशी हैं. 

वहीं, जदयू की कृपा से बिहार सरकार में शामिल भाजपा केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने के कारण दावा कर रही है कि 'डबल इंजन' सरकार की जीत होगी. जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि इस उपचुनाव में नीतीश कुमार का जादू चल जाएगा और ये चुनाव कोई सेमीफाइनल नहीं है. नीतीश कुमार के किए विकास के नाम पर बिहार में फिर से हमें वोट मिलेंगे. वैसे, बिहार की राजनीतिक फिजा में यह सवाल तैर रहा है कि इस उपचुनाव में जदयू अध्यक्ष नतीश कुमार की साख भी दांव पर लगी है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपचुनाव का परिणाम अगर अनुकूल रहा तो नीतीश कुमार के लिए 2020 का रास्ता बहुत हद तक आसान कर देगा. इसके अलावा यह भी साफ हो जाएगा कि क्या बिहार में नीतीश के चेहरे का जादू बरकरार है या फिर एनडीए को 2020 का चुनाव किसी और के 'चेहरे' पर लड़ना होगा. राजनीतिक जानकार कहते हैं, 'यह सच है कि इस उपचुनाव के परिणाम को भले ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में नहीं लिया जाए, लेकिन जदयू के लिए यह अग्निपरीक्षा है. अगर परिणाम अनुकूल नहीं रहे तो नीतीश के चेहरे का सिक्का अगले विधानसभा चुनाव में फिर चल पाएगा, इसमें संदेह है और तब भाजपा का पलड़ा अधिक भारी हो जाएगा.

हालांकि, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह सधे अंदाज में कहते हैं, 'मतदाता अब विकास के नाम पर वोट देते हैं. नीतीश कुमार के विकास की चर्चा पूरा देश करता है, उसका फायदा उपचुनाव में भी मिलेगा. 'वैसे, यह भी कहा जा रहा है कि जदयू अगर अपनी चार सीटों पर कब्जा बरकरार रखता है, तब नीतीश की अहमियत गठबंधन में और बढ़ेगी जिसका फायदा अगले विधानसभा चुनाव के सीट बंटवारे के समय देखने को मिल सकता है. इधर, भाजपा के नेता इस उपचुनाव को लेकर नीतीश कुमार के चेहरे पर खुलकर बहुत कुछ नहीं बोलते हैं. भाजपा के विधायक संजीव चौरसिया का कहना है कि बिहार और केंद्र में एक ही गठबंधन की सरकार होने का लाभ बिहार को मिल रहा है. इस उपचुनाव में भी 'डबल इंजन' का लाभ मिलेगा. फिलहाल, इस उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में सिर्फ परिणाम भर नहीं, बल्कि अगले चुनाव को लेकर नीतीश के 'चेहरे' की साख पर भी दांव लगाएगा और उनके 200 सीट पार के दावे को भी मजबूत और कमजोर कर सकता है. जदयू की जिन चार सिटिंग सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, उनमें से नाथनगर पर जदयू ने 2015 में करीब आठ हजार वोटों से जीत दर्ज की थी. मुकाबला लोजपा से था. इस बार लोजपा जदयू के साथ है. महागठबंधन के वोट में सेंध मारने के लिए यहां हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अलावा नवगठित वंचित समाज पार्टी के उम्मीदवार सक्रिय हैं.

वहीं, वंचित समाज पार्टी का आधार वोट भी वही है जिस पर राजद निर्भर है. बेलहर में पिछली बार जदयू ने भाजपा उम्मीदवार को करीब 16 हजार मतों से पराजित किया था. इस बार भाजपा और जदयू एकसाथ हैं. सिमरी बख्तियारपुर में भी ऐसी ही स्थिति है. पिछली बार जदयू ने लोजपा उम्मीदवार पर करीब 38 हजार वोटों के बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की थी. लोजपा इस बार फिर जदयू के साथ है. दरौंदा में जदयू ने करीब 13 हजार मतों से भाजपा को हराया था. इन चारों ही सीट पर राजद दूसरे नंबर पर नहीं था. नीतीश कुमार की पार्टी ने या तो भाजपा या लोजपा के उम्मीदवार को पराजित किया था. बता दें कि बिहार की पांच विधानसभा सीटों- किशनगंज, सिमरी बख्तियारपुर, दरौंदा, नाथनगर एवं बेलहर तथा समस्तीपुर की एक लोकसभा सीट के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होना है. परिणाम 24 अक्टूबर को आएंगे.


Web Title: Bihar: RJD is giving tough competition to the claim of Nitish Kumar's reputation in the by-elections in five assembly seats, one in the Lok Sabha.
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