Highlightsअगले 5 साल में विकास के उन सभी कामों की प्रमुखता दी जाएगी.सभी चारों घटक दलों के घोषणापत्र को किए गए वादों को शामिल किया जाएगा.

पटनाः बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार बनने के साथ ही चुनाव के दौरान जनता से किये गए वादों को भी पूरा करने की तैयारी हो रही है.

कारण कि इस बार सरकार का समीकरण बदला-बदला है. जनता दल यूनाइटेड की ताकत से सरकार में कम और भाजपा का कद बढ़ा हुआ है और यही वजह है कि अब सरकार केवल नीतीश कुमार के एजेंडे पर नहीं चलने जा रही. राज्य में एनडीए सरकार के कामकाज के लिए जल्द ही कॉमन मिनिमम प्रोगाम बनाए जाने की तैयारी है. 

सत्ताधारी गठबंधन के अंदर से आ रही खबर के मुताबिक बिहार में विकास की योजनाएं अब कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत ही होंगी. हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय पार्ट 2 का एजेंडा इसमें शामिल रहेगा. इस प्रोग्राम में भाजपा, जदयू, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और वीआईपी के शीर्ष नेतृत्व आपस में बैठकर कॉमन मिनिमम प्रोगाम पर चर्चा करेंगे.

बिहार के विकास से जुडे़ उन सभी कार्यों को प्रमुखता दी जाएगी

बताया जाता है कि आने वाले 5 वर्षों में बिहार के विकास से जुडे़ उन सभी कार्यों को प्रमुखता दी जाएगी जो एनडीए के घटक दलों ने बिहार की जनता से वादा किया था. इसके तहत सभी चारों घटक दलों के घोषणापत्र को किए गए वादों को शामिल किया जाएगा और विकास कार्य को जोर शोर से शुरू किया जाएगा.

कॉमन मिनिमम प्रोगाम के तहत जहां सरकार में होने वाले नए कैबिनेट विस्तार को लेकर के भी आपस में बैठकर तय करने की रणनीति बनी है तो वहीं एनडीए के चारों घटक दल आपस में मिलकर नए कैबिनेट विस्तार में मंत्रिमंडल का बंटवारा करेंगे ताकि साथियों के बीच आपसी तालमेल बना रहे और विकास के कारण ज्यादा से ज्यादा हो सके. इस प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सेवा, साथ निश्चय कानून, तकनीकी सेवा, रोजगार, बिजली की समस्या आदि हर मुद्दों कर चर्चा और कार्य किये जायेंगे. 

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के लिए सुझाव मांगा जाएगा

इसके साथ ही सात निश्चय पार्ट 2 के साथ-साथ भाजपा अपने एजेंडे को सरकार की कार्यसूची में शामिल कराएगी साथ ही हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी की तरफ से भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के लिए सुझाव मांगा जाएगा. चारों दलों की सहमति से कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की रूपरेखा तय होगी और इसी पर बिहार में एनडीए सरकार काम करेगी.

भाजपा की तरफ से 19 लाख रोजगार मुहैया कराए जाने का एजेंडा इस में सबसे ऊपर होगा. नीतीश कुमार बिहार में सरकारी नौकरी को लेकर चुनाव के दौरान ही अपनी असमर्थता जाहिर कर चुके हैं. इसके बावजूद भाजपा बिहार में रोजगार सृजन के लिए सरकार की तरफ से नीति तय कर आएगी. साथ ही साथ दलित उत्थान के लिए जीतन राम मांझी कई एजेंडों को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में शामिल करेंगे, जबकि मुकेश सहनी के तरफ से भी इसमें महत्वपूर्ण बातों को रखा जाएगा।

तब भी नीतीश कुमार का एजेंडा ही सरकार में लागू हुआ था 

यहां उल्लेखनीय है कि साल 2015 में जब महागठबंधन की सरकार बनी थी तब भी नीतीश कुमार का एजेंडा ही सरकार में लागू हुआ था. राजद के ज्यादा विधायकों के बावजूद नीतीश कुमार ने सरकार में लालू प्रसाद यादव का एजेंडा नहीं चलने दिया.

लालू ने जब शासन में दखलदांजी शुरू की तब नीतीश कुमार की नाराजगी सबके सामने आई थी, बाद में रिश्ते और खराब हुए और साल 2017 में महागठबंधन टूट गया था. लेकिन अब नीतीश कुमार कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लेकर सहमत नजर आ रहे हैं. जानकार बता रहे हैं कि नीतीश कुमार खुद चाहते हैं कि केवल जदयू ही नहीं बल्कि भाजपा और अन्य सहयोगी दलों का एजेंडा भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में शामिल किया जाए.

हालांकि, कॉमन मिनिमम प्रोगाम को लेकर विपक्षी दल के नेताओं ने सवाल भी खडे़ कर दिए हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता राजेश राठौर ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि दरअसल यह भाजपा के नीतियों को लागू करने की कोशिश है. नीतीश कुमार अब तक स्वतंत्र होकर अपना एजेंडा चलाते रहे हैं पर अब वह भाजपा के नीतियों को लागू करने के लिए मजबूर हैं. 

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