Bihar: Liquor Ban causes sale increase of opium-hashish like other drug additives | बिहार: शराबबंदी के बाद बढ़ गई अन्य मादक पदार्थों की बिक्री, ओपियम-हशीश जैसे ड्रग्स के जब्ती में राज्य अव्वल
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

बिहार में शराबबंदी के बाद से मादक पदार्थों के जब्त किए जाने का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (स्वापक नियंत्रण ब्यूरो) के पटना जोन के मुताबिक ओपियम और हशीश जैसे ड्रग्स के जब्ती मामले में बिहार देश में अव्वल है. बिहार के मुख्यमंत्री भी ड्रग्स के फैलते जाल पर हैरत में हैं. 

इधर विपक्ष ने अब भी शराबबंदी को ही मुख्य मुद्दा बनाया है. राजद सांसद मनोज झा कहते हैं कि नीतीश जी ने जब शराबबंदी की घोषणा की थी तो यह आत्ममुग्धता वाला कदम था कोई फ्रेमवर्क नहीं था, कोई तैयारी नहीं थी. नशाबंदी में कोई कमी नहीं आई. नतीजा पूरा बिहार भुगत रहा है. शराबबंदी के बाद बिहार में विकल्प के तौर पर लोगों ने विभिन्न ड्रग्स का प्रयोग शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार ड्रग्स के फैल रहे भयावह जाल को तोड़ पाएगी?

दरअसल यह ग्राफ सरकार ही दिखा रही है और यह भी बता रही है कि कैसे ट्रेन और हवाई जहाज से अब मादक पदार्थ बिहार पहुंच रहा है. गांजा जब्ती में आंध्र प्रदेश के बाद बिहार दूसरे नंबर पर है. सबसे खास बात यह है कि साल 2015 के बाद बिहार में ड्रग्स की जब्ती में 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. 2015 में गांजा 14.4 किग्रा जब्त हुआ, 2016 में यह 10,800 किग्रा हो गया और 2017 में 28,888 किग्रा जब्ती बताने को काफी है कि शराब का विकल्प गांजा बना. वहीं, 2015 में बिहार में हशीश जैसे मादक पदार्थ की कोई जब्ती नहीं हुई, जबकि 2017 में ये 244 किग्रा हो गया. ओपियम 2015 में 1.7 किग्रा जब्त हुआ, जबकि 2016 में 14 किग्रा और 2017 में ये आंकड़ा 329 किग्रा पहुंच गया. 

नशे के बाजार की हाल यह है कि राजधानी पटना की सड़कों पर महज 10 साल के बच्चे नशीले पदार्थों की बिक्री करते और यहां तक कि सेवन करते मिल जाते हैं. राज्य सरकार की तमाम बंदिशों को ठेंगा दिखाते हुए एक लड़के ने पटना के भीड़भाड़ वाले इलाके पटना जंक्शन के पास बताया कि हर दुकान में इन दिनों नशे का कारोबार चलता है.

इस जाल में फंसे लोगों की निजात में जुटे पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच के डॉक्टर के साथ मरीजों का भी कहना रहा कि नशे का करोबार अब हर गली मुहल्ले में होने लगा है. शराब नही मिलने से अन्य नशीली पादार्थों का बाजार परवान चढ़ने लगा है. नशे के मकड़जाल में फंसे लोगों को इस जाल से निकालने में जुटे संस्थाओं की भी माने तो इनके संस्थानों में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है.

अब हर चौक-चौराहे पर नौजवान गांजा और स्मैक का सेवन करते मिल जाते हैं. बिहार में अब शराब से ज्यादा मादक पदार्थों की बिक्री ज्यादा होने लगी है. ऐसे में अब तो लोग यह कहने लगे हैं कि उड़ता पंजाब के बाद कहीं उड़ता बिहार न बन जाये?


Web Title: Bihar: Liquor Ban causes sale increase of opium-hashish like other drug additives
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