बिहार: पूर्व विधायकों और पूर्व विधान पार्षदों के पेंशन पर सरकार हर साल खर्च करती है 59 करोड़ रुपये, कई सजायाफ्ता भी हैं लाभार्थी

By एस पी सिन्हा | Published: October 9, 2021 03:26 PM2021-10-09T15:26:46+5:302021-10-09T15:37:10+5:30

बिहार में वर्तमान में 991 ऐसे पूर्व विधायक हैं, जिनकी पेंशन पर नीतीश सरकार हर महीने 4,94,44,000 रुपये खर्च करती है. बिहार में कर्मचारियों के पेंशन खत्म कर दिए गए, लेकिन पूर्व विधायक, पूर्व विधान पार्षद और सांसदों के पेंशन में लगातार वृद्धि होती गई.

bihar ex mla govt pension rti | बिहार: पूर्व विधायकों और पूर्व विधान पार्षदों के पेंशन पर सरकार हर साल खर्च करती है 59 करोड़ रुपये, कई सजायाफ्ता भी हैं लाभार्थी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फाइल फोटो.)

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Highlightsबडी संख्या में ऐसे सदस्य हैं जो एक से अधिक सदन के सदस्य हैं और उन्हें पेंशन भी एक से अधिक स्थानों से मिल रहा है.चारों सदनों के अलावा कुछ तो जेपी सेनानी का भी पेंशन उठा रहे हैं.10 साल में पूर्व विधायकों और उनके परिवार को मिलने वाले पेंशन में 6 गुणा वृद्धि हो चुकी है.

पटना:बिहार में पूर्व विधायकों को पेंशन देने में सरकार को हर साल 59 करोड़ से भी ज्यादा की राशि खर्च करनी पडती है. आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय ने विधायकों की पेंशन को लेकर सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी थी. इसके बाद उन्हें जो जवाब मिले उनमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. 

कई पूर्व विधायक ऐसे हैं जो दागी रहे हैं. जिन पर चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने पर रोक लगा रखा है, लेकिन उन्हें भी पेंशन मिल रहा है. 

कई ऐसे पूर्व विधायक हैं जो दूसरे सदन के भी सदस्य रहे हैं और उन्हें विधानसभा के अलावा दूसरे सदन से भी पेंशन मिल रहा है.

दरअसल, बिहार में वर्तमान में 991 ऐसे पूर्व विधायक हैं, जिनकी पेंशन पर नीतीश सरकार हर महीने 4,94,44,000 रुपये खर्च करती है. बिहार में कर्मचारियों के पेंशन खत्म कर दिए गए, लेकिन पूर्व विधायक, पूर्व विधान पार्षद और सांसदों के पेंशन में लगातार वृद्धि होती गई. 

बडी संख्या में ऐसे सदस्य हैं जो एक से अधिक सदन के सदस्य हैं और उन्हें पेंशन भी एक से अधिक स्थानों से मिल रहा है. 

आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय ने बताया कि चारों सदनों के अलावा कुछ तो जेपी सेनानी का भी पेंशन उठा रहे हैं. सरकारी नौकरी में थे तो उसका भी पेंशन ले रहे हैं. 10 साल में पूर्व विधायकों और उनके परिवार को मिलने वाले पेंशन में 6 गुणा वृद्धि हो चुकी है. 

सूबे के जिन पूर्व विधायकों को पेंशन मिल रही है, उनमें चारा घोटाला में सजा पाने वाले लालू प्रसाद यादव, हत्या के मामले में सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, चारा घोटाला में सजायाफ्ता पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, दुष्कर्म केस में सजायाफ्ता और जेल में बंद राजवल्लभ यादव, डीएम हत्याकांड के मामले में सजायाफ्ता आनंद मोहन और हत्या के मामले में सजायाफ्ता विजय कृष्ण के नाम शामिल हैं.

यहां बता दें कि 2018 में नीतीश सरकार ने वर्तमान विधायक और विधान पार्षदों के साथ पूर्व विधायक और विधान पार्षदों के पेंशन में वृद्धि का फैसला किया था. 

एक साल तक विधायक और विधान पार्षद रहने वाले नेता को न्यूनतम 35 हजार रुपये पेंशन मिलता है. पहले 25 हजार रुपये मिलता था. जितने साल तक विधायक और विधान पार्षद रहेंगे हर साल पेंशन में तीन हजार रुपये की वृद्धि होगी. इससे पहले 2014 में भी पेंशन और भत्ते में वृद्धि की गई थी. 

इनमें से 254 ऐसे विधायक और विधान पार्षद सदस्य हैं, जिन्हें 50-75 हजार रुपये पेंशन मिलता है. 70 से अधिक जनप्रतिनिधि ऐसे हैं, जिन्हें 75 हजार से एक लाख रुपये तक पेंशन मिलता है. 12 जनप्रतिनिधि ऐसे हैं जिन्हें एक से डेढ लाख रुपये पेंशन मिलता है. 

9 बार विधायक रहे रमई राम को हर महीने सबसे अधिक 1.46 लाख रुपये का पेंशन मिलता है. इसके बाद जगदीश शर्मा को हर महीने 1.25 लाख रुपये पेंशन मिल रहा है. विधानसभा से लालू प्रसाद यादव को 89 हजार रुपये पेंशन मिल रहा है. लालू यादव लोकसभा के भी सदस्य रहे हैं. ऐसे में उन्हें वहां से भी पेंशन मिल रहा है.

इसके अलावा पिछले वित्त वर्ष के दौरान 446 दिवंगत विधायक और विधान परिषद के सदस्यों के परिवार पर पारिवारिक पेंशन के तौर पर 23 करोड 85 लाख रुपये खर्च किए गए. इसमें सबसे ज्यादा 1,09,500 रुपए पूर्व कांग्रेस नेता महावीर चौधरी की विधवा पत्नी वीणा देवी को मिले. 

आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय के अनुसार, आरटीआई से जो सूचना बिहार विधानसभा ने दी है, उसके अनुसार 991 पूर्व सदस्यों और उनके परिवार के सदस्यों पर सरकार को पेंशन के रूप में 59 करोड 33 लाख 28 हजार रुपये खर्च करना पडता है. 
10 साल में पेंशन 6 गुणा बढ गया है. बिहार में विधायकों के वेतन और भत्ते के साथ पूर्व विधायकों के पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार फैसला करती है. 

दूसरे देशों में इसके लिए आयोग बना हुआ है. ब्रिटेन में आयोग फैसला लेता है कि कितना पेंशन दिया जाए. भारत में नेता खुद तय करते हैं. 

शिव प्रकाश राय ने कहा कि विधानसभा से जो जानकारी दी गई है उसमें पूर्व विधायक और उनके परिवार के सदस्य के निधन के बाद भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पेंशन अभी भी जारी है.

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