बिहारः 148 घड़ियाल के बच्चों को छोड़ा, चंबल के बाद गंडक नदी देश की दूसरी नदी, घड़ियालों की संख्या बढ़कर 500

By एस पी सिन्हा | Published: July 2, 2022 06:24 PM2022-07-02T18:24:58+5:302022-07-02T18:26:11+5:30

सर्वेक्षण में वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक के 320 किलोमीटर में 250 घड़ियाल पाए गए थे. 2021 तक घड़ियालों की संख्या बढ़कर 350 के करीब पहुंच गई.

bihar 148 children alligators Gandak river Chambal second river country number alligators increased 500 | बिहारः 148 घड़ियाल के बच्चों को छोड़ा, चंबल के बाद गंडक नदी देश की दूसरी नदी, घड़ियालों की संख्या बढ़कर 500

इंडो-नेपाल सीमा से होकर गुजरने वाली गण्डक नदी घड़ियालों के लिए बेहतर अधिवास साबित हो रहा है. 

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Highlightsवाल्मीकि टाइगर रिजर्व(वीटीआर) प्रशासन ने 2018 में सर्वेक्षण कराया था. गण्डक नदी घड़ियालों के लिए एक बेहतर अधिवास साबित हो रहा है.घड़ियालों के संरक्षण के लिए आईटी डब्ल्यू एच के तहत घडियाल संरक्षण का कार्य शुरू कर दिया.

पटनाःबिहार में गंडक नदी घड़ियालों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है. बगहा में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा ग्रामीणों और स्थानीय मछुआरों के सहयोग से 148 घड़ियाल के बच्चों को गंडक में छोड़ा गया है, जिसके बाद घड़ियालों की संख्या बढ़कर तकरीबन 500 पहुंच गई है.

गंडक नदी में घड़ियालों की सुरक्षा एवं संवर्धन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व(वीटीआर) प्रशासन ने 2018 में सर्वेक्षण कराया था. वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मुताबिक गण्डक नदी घड़ियालों के लिए एक बेहतर अधिवास साबित हो रहा है. बताया जाता है कि गंडक नदी के किनारे रेत में मादा घड़ियाल मई माह में 30 से 40 सेमी़ गहरा गड्ढा खोदकर 30 से लेकर 40 तक अंडे देती हैं.

लेकिन यह अंडे पानी के दबाव से खराब हो जाते हैं. जिसे बचाने के लिए डब्लूटीआई के सहयोग एक्सपर्ट के मदद से ऊंचे स्थान पर घड़ियालों के अंडों को रखा जाता है. इस वर्ष भी ऐसा ही किया गया था. इसके कारण 148 अंडों से शिशु घड़ियाल बाहर निकले हैं. जिन्हें सुरक्षित गंडक नदी में छोड़ दिया गया है.

पिछले दिनों कराये गये सर्वेक्षण में वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक के 320 किलोमीटर में 250 घड़ियाल पाए गए थे. 2021 तक घड़ियालों की संख्या बढ़कर 350 के करीब पहुंच गई, लेकिन लक्ष्य के अनुरूप यह संख्या काफी कम थी. इसे देखते हुए घड़ियालों के संरक्षण के लिए आईटी डब्ल्यू एच के तहत घडियाल संरक्षण का कार्य शुरू कर दिया.

जानकारों का कहना है कि इंडो-नेपाल सीमा से होकर गुजरने वाली गण्डक नदी घड़ियालों के लिए बेहतर अधिवास साबित हो रहा है. वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अधिकारी सुब्रत बहेरा ने बताया कि गण्डक नदी किनारे पता कर पाना मुश्किल होता है कि घड़ियालों ने रेत में कहां अंडा दिया है.

नतीजतन इसके लिए डब्लूटीआई और फारेस्ट डिपार्टमेंट ने स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों को प्रशिक्षित किया और अंडों के संरक्षण व उसके प्रजनन का गुर सिखाया. यही वजह है कि वर्ष 2022 में गंडक नदी किनारे वाल्मीकिनगर से रतवल पुल तक 5 जगह घड़ियालों के अंडे मिले. इन अंडों को मछुआरों ने संरक्षित किया और फिर उसका हैचिंग कराया गया.

इसके बाद तीन जगहों के अंडों से सुरक्षित प्रजनन हुआ जबकि दो जगहों के अंडे बर्बाद हो गए. घडियालों के प्रजनन के मामले में चंबल के बाद गंडक नदी देश की दूसरी नदी बन गई है, लिहाजा डब्लूटीआई और वन एवं पर्यावरण विभाग भविष्य में भी घड़ियालों के प्रजनन के लिए ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों व मछुआरों को प्रशिक्षित करेगी और हैचिंग करा इनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा.

Web Title: bihar 148 children alligators Gandak river Chambal second river country number alligators increased 500

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