aaj ka taja samachar bihar education minister dr mevalal chaudhary not singing full national anthem rjd video | बिहारः राष्ट्रगान नहीं गा सके नए शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी, राजद ने शेयर किया वीडियो, पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मामला उठाया
नीतीश ने पहली कैबिनेट में नियुक्ति घोटाला करने वाले मेवालाल को मंत्री बना अपनी प्राथमिकता बता दिया. (file photo)

Highlightsमहाराष्ट्र कांग्रेस के नेता पूर्व सांसद संजय निरुपम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है.भ्रष्टाचार के मामले में विपक्ष के निशाने पर आए मेवालाल चौधरी पत्नी की संदेहास्पद मौत के मामले में भी फंसते दिख रहे हैं.राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने ट्वीटर हैंडल से भाजपा पर निशाना साधा है.

पटनाः बिहार के नये शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी चौतरफा घिरते दिख रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है. भ्रष्टाचार के मामले में विपक्ष के निशाने पर आए मेवालाल चौधरी पत्नी की संदेहास्पद मौत के मामले में भी फंसते दिख रहे हैं.

इस बीच अब महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता पूर्व सांसद संजय निरुपम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें मेवालाल ठीक से राष्ट्रगान भी नहीं गा पा रहे हैं. संजय निरुपम ने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘ये बिहार के नए शिक्षा मंत्री हैं. कहते हैं, ये जनाब पहले किसी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर थे. राष्ट्रगान भी नहीं गा पाते. भ्रष्टाचार के संगीन आरोप इन पर हैं सो अलग.

भारतीय लोकतंत्र के इन पापों को कौन धोएगा?’ इसके बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने ट्वीटर हैंडल से भाजपा पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी जहां पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख नौकरियां देने को प्रतिबद्ध था. वहीं, नीतीश ने पहली कैबिनेट में नियुक्ति घोटाला करने वाले मेवालाल को मंत्री बना अपनी प्राथमिकता बता दिया.

विडंबना देखिए जो भाजपाई कल तक मेवालाल को खोज रहे थे

विडंबना देखिए जो भाजपाई कल तक मेवालाल को खोज रहे थे. आज मेवा मिलने पर मौन धारण किए हैं. यही नही लालू प्रसाद यादव ने भी मेवालाल से जुडे भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी के उस बयान को शेयर किया है, जिसमें उन्होंने एक समय उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी.

लालू प्रसाद ने पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का जो बयान शेयर किया है उसमें उन्होंने कहा था, ‘राजभवन के निर्देश पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति महफूज आलम कमेटी की जांच के बाद मेवालाल चौधरी पर सहायक प्राध्यापक, जूनियर इंजीनियर एवं वैज्ञानिकों की बहाली में धांधली का आरोप प्रमाणित हो गया है. आरोपित तत्कालीन कुलपति व वर्तमान विधायक चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हो गई है, मुख्यमंत्री अविलंब आरोपित विधायक को पार्टी से निष्कासित करें.’

इसबीच बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में वर्ष 2012-13 के दौरान हुए नियुक्ति घोटाले में तत्कालीन वीसी और वर्तमान में मंत्री बनाये गये मेवालाल चौधरी पर लगे आरोप सही पाये गये थे. राजभवन द्वारा नियुक्ति में हुई अनियमितता की जांच का निर्देश दिये जाने के बाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति महफूज आलम ने इसकी जांच की थी.

2017 में पूर्व कुलपति के खिलाफ सबौर थाना में केस दर्ज किया गया था

राजभवन के निर्देश पर ही फरवरी, 2017 में पूर्व कुलपति के खिलाफ सबौर थाना में केस दर्ज किया गया था. पुलिस की जांच में उन पर लगे आरोप सही पाये गये थे पर अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है. बताया जाता है कि केस दर्ज किये जाने के बाद भागलपुर के डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार केस के आईओ बनाये गये थे. लंबे समय तक उन्होंने केस की जांच की.

कई से पूछताछ हुई और कई को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया. नियुक्त घोटाले में प्रो. राजभवन वर्मा, अमित कुमार और पूर्व कुलपति के भतीजे रमेश चौधरी को एसआईटी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. रमेश चौधरी पर सुल्तानगंज थाने के कटहरा गांव के हिमांशु कुमार ने बहाली के दो लाख का चेक देने का आरोप लगाया था. केस के आईओ रमेश कुमार को तारापुर का एसडीपीओ बना दिया गया जिसके बाद केस का आईओ डीएसपी मुख्यालय 2 सुनील कुमार को बनाया गया है.

यहां बता दें कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में वर्ष 2012-2013 में लगभग 160  सहायक प्राध्यापक व कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरती गई थी. बहाली के लिए चयन समिति के अध्यक्ष व तत्कालीन कुलपति मेवालाल चौधरी ने प्रो. राजभजन वर्मा को ऑफिसर इंचार्ज (नियुक्ति) और अमित कुमार को सहायक निदेशक (नियुक्ति) बनाया था. आरोप लगा था कि दोनों ने बहाली में धांधली की और पास अभ्यर्थिर्यो को फेल कर वेबसाइट पर रिजल्ट जारी कर दिया था. इसके बाद विश्वविद्यालय से बहाली से जुडे़ कागजात भी गायब कर दिए थे.

हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति महफूज आलम ने इसकी जांच की थी

मामला प्रकाश में आया तो राजभवन के निर्देश पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति महफूज आलम ने इसकी जांच की थी. राजभवन के निर्देश पर फरवरी, 2017 में पूर्व कुलपति के खिलाफ सबौर थाना में केस दर्ज किया गया था. पूर्व कुलपति से भी एसआईटी ने पूछताछ की थी. उसके बाद वे भूमिगत हो गये थे और बाद में पता चला कि उन्होंने हाइकोर्ट से बेल भी ले लिया.

इस संबंध में भागलपुर के एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि बीएयू में नियुक्ति में हुई अनियमितता की जांच में तत्कालीन कुलपति पर लगे आरोप सही पाये गये थे. उन्होंने कोर्ट से बेल ले लिया है. कुछ बिंदुओं पर अभी भी जांच की जा रही है. इसलिए अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी है.

यहां उल्लेखनीय है कि तारापुर के नवनिर्वाचित जदयू विधायक डॉ मेवालाल चौधरी को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया है. राजनीति में आने से पहले वर्ष 2015 तक वह भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे. वर्ष 2015 में सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए. इसके बाद जदयू से टिकट लेकर तारापुर से चुनाव लडे़ और जीत गए.

लेकिन, चुनाव जीतने के बाद डॉ चौधरी नियुक्ति घोटाले में आरोपित किए गए. कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले का मामला सबौर थाने में वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था. इस मामले में विधायक ने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी. वहीं, मेवालाल चौधरी की पत्नी स्व. नीता चौधरी राजनीति में काफी सक्रिय रही थीं.

वह जदयू के मुंगेर प्रमंडल की सचेतक भी थीं. 2010-15 में तारापुर से विधायक चुनी गई थीं. वर्ष 2019 में गैस सिलेंडर से लगी आग में झुलसने से उनकी मौत हो गयी थी. वहीं, इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी की पत्नी की मौत के मामले में उनसे पूछताछ की मांग की है. इसके लिए उन्होंने डीजीपी एसके सिंघल को पत्र लिखा है.

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