खराब जीवनशैली और खाने-पीने से जुड़ीं गलत आदतों के कारण आजकल किडनी के रोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 850 मिलियन से अधिक लोग गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित हैं। क्रोनिक किडनी रोग हर साल 2.4 मिलियन लोगों की मौत होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि पुराने गुर्दे की बीमारियों के पीड़ित भारतीयों की संख्या पिछले 15 वर्षों में दोगुनी हो गई है और वर्तमान में हर सौ में से 17 लोग गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं।  

देश में किडनी की समस्या से जूझ रहे अधिकतर मरीजों के लिए डायलिसिस जिंदगी का जरिया है। एलोपैथी में किडनी की समस्या के उपचार के लिए सीमित विकल्प को देखते हुए पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि सावधानी से भोजन करने और व्यायाम के साथ जड़ी बूटी का सेवन बीमारी के बढ़ने की गति को धीमी कर सकती है और बीमारी के लक्षणों से निजात दिला सकती है। 

पुनर्नवा जड़ी बूटी है कारगर

दो हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों में दावा किया गया है कि पुनर्नवा जैसे पारंपरिक औषधीय पौधे पर आधारित औषधि का फार्मूलेशन किडनी की बीमारी में रोकथाम में कारगर हो सकता है और बीमारी से राहत दिला सकता है। 

एक नए अध्ययन के मुताबिक, किडनी की समस्या से जूझ रही एक महिला को पुनर्नवा से बनाया गया सीरप एक महीने तक दिया गया जिससे उनके रक्त में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर स्वस्थ स्तर पर आ गया।

सर गंगाराम अस्पताल में सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट मनीष मलिक ने कहा कि एलोपैथी में किडनी की बीमारी के उपचार के लिए सीमित संभावना है। उपचार महंगा भी है और पूरी तरह सफल भी नहीं होता। इसलिए, मलिक का कहना है कि पुनर्नवा जैसी जड़ी बूटी पर आधारित नीरी केएफटी की तरह की किफायती आयुर्वेदिक दवा नियमित डायलिसिस करा रहे मरीजों के लिए मददगार हो सकती है।

कमल के पत्ते, पत्थरचूर भी इलाज में सहायक

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में किया गया अध्ययन 2017 में वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड फार्मास्युटिकल्स साइंस प्रकाशित हुआ। इंडो अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में भी कमल के पत्ते, पत्थरचूर और अन्य जड़ी बूटियों सहित पुनर्नवा से बनायी गयी औषधि के प्रभाव का जिक्र किया है। 

बीएचयू के द्रव्यगुण विभाग के प्रमुख के एन द्विवेदी ने कहा कि नीरी केएफटी (सीरप) में औषधीय फार्मूलेशन कुछ हद तक डायलिसिस का विकल्प हो सकता है। दरअसल, एलौपैथी में किडनी की बीमारी के उपचार के लिए सीमित विकल्प होने के कारण आयुर्वेदिक औषधि पर जोर बढ़ रहा है। 

ऐसा हो किडनी मरीजों का डाइट प्लान

किडनी के मरीजों को अपनी डाइट में किसी भी कीमत पर गोभी, मशरूम, ब्‍लूबेरी, करोंदा, लाल अंगूर, अनानास, अंडे का सफेद भाग, शलजम, लहसुन, मूली, जैतून का तेल, प्‍याज, मछली, मैकाडामिया नट्स जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए।

किडनी खराब होने के कई कारण हैं जिनमें दर्दनिवारक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल, कम पानी पीना, पेशाब को देर तक रोकना, ज्यादा नमक का सेवन, पर्याप्त नींद नहीं लेना, ज्यादा मीठा या मांस खाना आदि शामिल हैं। 

किडनी के इलाज के लिए 5 बेस्ट हॉस्पिटल

किडनी के रोगों के इलाज के लिए भारत के पांच बेहतर अस्पतालों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स, दिल्ली), फोर्टिस अस्पताल (बैंगलोर, कर्नाटक), मणिपाल अस्पताल (बैंगलोर, कर्नाटक), कोयंबटूर किडनी अस्पताल और क्रिस्टीन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर शामिल हैं। 


Web Title: Kidney disease treatment: Use these Ayurveda or natural herbs to get rid kidney related problems
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