Coronavirus Vaccine: कोरोना के इलाज लिए इस दवा का होगा मानव परीक्षण, जानें क्या होता है ह्यूमन ट्रायल

By प्रिया कुमारी | Published: June 30, 2020 05:31 PM2020-06-30T17:31:27+5:302020-07-01T10:50:39+5:30

Coronavirus Vaccine: भारतीय कंपनी भारत बायोटेक को कोरोना के इलाज के लिए बनाई गई वैक्सीन को आईसीएमआर ने मानव परीक्षण के लिए मंजूरी दे दी गई है। लेकिन क्या होता है मानव परीक्षण कैसे किया जाता है इसका टेस्ट जानिए विस्तार से।

drug will be tested human for corona what is human trials how it is tested on humans | Coronavirus Vaccine: कोरोना के इलाज लिए इस दवा का होगा मानव परीक्षण, जानें क्या होता है ह्यूमन ट्रायल

आखिर क्या होता है मानव परीक्षण, कैसे किया जाता है इंसानों पर इसका ट्रायल

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Highlightsकोरोना की दवाई को लेकर भारत में पहली दवाई पर मानव परीक्षण किया जाएगा। क्या होता है मानव परीक्षण, कैसे किया जाता है इंसानों पर इसका ट्रायल।

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक (Bharat Biotech) कोरोना वायरस के इलाज के लिए COVAXIN वैक्सीन को से मानव परीक्षण के लिए मंजूरी दी है। इसे भारत की पहली कोविड-19 वैक्सीन बताया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि वह अपने 3 कोविड-19 टीकों की घोषणा विस्कोंसिन, आईसीएमआर और थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर करेगी।

कोरोना की वैक्सीन बनाने को लेकर कई देश रेस में लगे हुए हैं। आपने कई बार मानव परीक्षण शब्द सुना होगा, बात मानव परीक्षण पर आकर ही रूक जाती है। कोरोना की दवाई पर भी यही हो रहा है कि वैक्सीन सारे ट्रायल कर मानव परीक्षण पर ही आकर रूक जा रहे हैं। एक बार मानव परीक्षण पर सफलता मिल जाएगी तो इससे अच्छी खबर शायद ही कोई हो। लेकिन इस बात को जानना भी जरूरी है कि आखिर मानव परीक्षण क्या होता है इस लेकर इतनी देरी क्यों लग रही हैं। 


किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए तैयार की गई वैक्सीन को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले दवाई को लैब में टेस्ट किया जाता है। इस ट्रायल में कामयाबी हासिल करने के बाद जानवरों पर ट्रायल किया जाता है। अगर ये ट्रायल भी कामयाब हो जाता है तो उसके बाद इंसानों पर दवाई को ट्रायल किया जाता है। जिसे आखिरी चरण कहते हैं, इस ट्रायल में कुछ ही लोगों को शामिल किया जाता है।  

इसमें कंट्रोल ग्रुप्स के जरिए ये देखा जाता है कि वैक्सीन सेफ है या नहीं। इसी चरण में पता चलता है कि दवाई का क्या असर हो रहा है कितनी मात्रा में दवाई काम कर रही है या वैक्सीन की कितनी खुराक वायरस से बचाने में असरदार होगी। इसे ही ह्यूमन ट्रायल कहते हैं। मानव परीक्षण में सफलता हासिल करने के बाद वैक्सीन को बाजार में बेचने की इजाजत दी जाती है।  

भारत की दवाई COVAXIN को मानव क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी मिल गई है। मानव परीक्षण अगले महीने शुरू होंगे। वैक्सीन कैंडिडेट को बनाने के लिए एनआईवी, पुणे में आइसोलेट कोरोना वायरस स्ट्रेन को भारत बायोटेक को ट्रांसफर किया गया था। कंपनी भारत बायोटेक द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन अध्ययनों के परिणाम आशाजनक रहे हैं और व्यापक सुरक्षा और प्रभावी इम्यून रेस्पोंस दिखाते हैं।

COVAXIN वैक्सीन को संक्रामक और जानलेवा बीमारी कोरोना वायरस के लिए भारत की पहली वैक्सीन बताया जा रहा है। COVAXIN को भारत बायोटेक इंटरनेशनल द्वारा ICMR और NIV के सहयोग के साथ विकसित किया गया है। इसे भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल से मानव परीक्षण के लिए मंजूरी मिल गई है।

Web Title: drug will be tested human for corona what is human trials how it is tested on humans

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