Highlightsशोधकर्ताओं का दावा है कि 20 फीसदी लोगों के संक्रमित होने के बाद महामारी खत्म होने लगेगीआमतौर पर 60 फीसदी आबादी के संक्रमित होने के बाद हर्ड इम्यूनिटी पैदा होती है

कोरोना वायरस का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं मिला है। इस बीच कई दवाओं पर ट्रायल जारी है और कहा जा रहा है कि इस साल के आखिरी तक ही कोई प्रभावी दवाई या टीका तैयार हो सकता है।

चीन से निकले इस खतरनाक वायरस की चपेट में अब तक 10,985,656 लोग आ चुके हैं और 524,088 की मौत हो गई है। इस बीच एक शोध में दावा किया गया है कि कोविड-19 की दवा आने से पहले ही हर्ड इम्यूनिटी के जरिये यह महामारी खत्म हो सकती है। 

हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं का दावा है कि 20 फीसदी लोगों के संक्रमित होने के बाद हर्ड इम्यूनिटी पैदा होने से कोरोना महामारी खत्म होने लगेगी। वैज्ञानिकों के दावों में कितना दम है, यह मैड्रिड के आंकड़ों से साफ हो जाएगा जहां 20 फीसदी लोग संक्रमित हो चुके हैं।

Herd Immunity Threshold Could Be As Low As 43%

मैड्रिड के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। नेचर जर्नल में प्रकाशित एक शोध में कहा गया है कि आमतौर पर 60 फीसदी आबादी के संक्रमित होने के बाद हर्ड इम्यूनिटी पैदा होती है। 

हाल ही में साइंस जर्नल में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना के मामले में 43 फीसदी लोगों के संक्रमित होने से हर्ड इम्यूनिटी हासिल की जा सकती है। एक नया शोध मैड रैक्सिव में प्रकाशित हुआ है जिसमें दावा किया गया है हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए 20 फीसदी लोगों का संक्रमित होना ही काफी है। 

शोधकर्ता मान रहे हैं कि इससे पूरी दुनिया को कोरोना से निपटने में मदद मिल सकती है। चलिए जानते हैं कि हर्ड इम्यूनिटी क्या है और यह कोरोना वायरस को खत्म करने में कैसे सहायक हो सकती है? 

What is

हर्ड इम्यूनिटी क्या है (What Is Herd Immunity)

हर्ड इम्युनिटी यानी बड़े समूह की मजबूत होती प्रतिरक्षा प्रणाली। हर्ड इम्युनिटी का हिंदी में अनुवाद सामुहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता है। वैसे हर्ड का शाब्दिक अनुवाद झुंड होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोरोना वायरस को सीमित रूप से  फैलने का मौका दिया जाए तो इससे सामाजिक स्तर पर कोविड-19 को लेकर एक रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी।

आसान शब्दों में ऐसे समझें, जब दुनिया की बड़ी आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाएगी, तब उसमें प्रतिरोधक क्षमता भी पैदा हो जाएगी। इसके बाद कोरोना वायरस का लोगों पर अधिक असर नहीं होगा। इसका मतलब यह होता है कि जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से ‘इम्यून’ हो जाते हैं, यानी उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं।

इसे एक उदहारण से समझें। मान लीजिए किसी व्यक्ति को संक्रमण हुआ और उसके बाद उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ने वायरस का मुकाबला करने में सक्षम एंटी-बॉडीज तैयार कर लिया।

जैसे-जैसे ज्यादा लोग इम्यून होते जाते हैं, वैसे-वैसे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता जाता है। इससे उन लोगों को भी परोक्ष रूप से सुरक्षा मिल जाती है जो ना तो संक्रमित हुए और ना ही उस बीमारी के लिए ‘इम्यून’ हैं।

Covid-19

कितनी कारगर है हर्ड इम्यूनिटी

ऐसा माना जाता है कि किसी समुदाय में कोरोना वायरस खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी तभी विकसित हो सकती है, जब उस समुदाय की करीब 60 फीसदी आबादी को कोरोना वायरस संक्रमित कर चुका हो और वे उससे लड़कर इम्युन हो गए हों। कोरोना से निपटने में हर्ड इम्यूनिटी कितनी कारगर साबित हो सकती है, इस बारे एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। 

कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अभी पूरे यकीन के साथ ये नहीं कहा जा सकता कि जो लोग नए कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और ठीक होने के बाद उनके शरीर में जो एंटीबॉडी बनी हैं, वो उन्हें दोबारा इस वायरस के संक्रमण से बचा पाएंगी भी या नहीं।

डब्ल्यूचओ के अनुसार, अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार कोविड-19 से पूरी तरह ठीक हुए लोगों में से बहुत कम में ही एंटीबॉडी बन पाई हैं। 

English summary :
Researchers claim that the corona epidemic will begin to end after 20 percent of people are infected with herd immunity. How much the scientists claim, it will be clear from the data of Madrid where 20 percent people have been infected.


Web Title: Coronavirus Treatment: Herd immunity can stop spreading covid-19 before vaccine, know what is herd immunity, meaning, effects in Hindi
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