कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से प्रसारित वायरल बूंदें आपकी नाक, मुंह या आंखों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती हैं। यह इन बूंदों के जरिये संक्रमण वहां से आपके नाक मार्ग के पीछे और आपके गले के पीछे के श्लेष्म झिल्ली तक जाता है। यह वह जगह है जहां आपको गले में खराश और सूखी खांसी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। 

कोरोना वायरस के यह सबसे सामान्य लक्षण हैं इसलिए ऐसे संकेत मिलने पर आपको सतर्क हो जाना चाहिए। इसके बाद वायरस फेफड़ों और वायुमार्ग मार्ग  में फैलाता है। इससे फेफड़ों की झिल्लियां फूल जाती हैं और उनके लिए ठीक से काम करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए अगर आपको गले में खराश और सूखी खांसी होने लगे तो सतर्क हो जाएं।

आपको बता दें कि ठंडा-गर्म खाने या मौसम में बदलाव के कारण भी गले की खराश हो सकती है। इसलिए आप पहले घर पर ही कुछ उपाय आजमाकर इस समस्या से राहत पा सकते हैं। अगर आपको राहत नहीं मिल रही और लक्षण बढ़ रहे हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

कई बार टॉन्सिल्स होने की वजह से भी गले में खराश हो जाती है। इनके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, सफेद पैच या आपके टॉन्सिल पर मवाद, लाल, सूजी हुई टॉन्सिल, आपकी गर्दन में ग्रंथियो में सूजन, त्वचा पर चकत्ते, पेट में दर्द (आमतौर पर बच्चों में), उल्टी (आमतौर पर बच्चों और जोड़ों में या मांसपेशियों में दर्द) आदि शामिल हैं। 

गले में खराश के अन्य कारण
वायरल संक्रमण, जैसे कि सर्दी या फ्लू, गले में खराश (ग्रसनीशोथ) का सबसे आम कारण है। जबकि एक वायरस के कारण गले में खराश अपने आप ही सही हो जाती है। गले की जटिलताओं को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के साथ उपचार की आवश्यकता होती है। गले में खराश होने की वजह से अन्य जटिलताओं जैसे कान और साइनस संक्रमण, टॉन्सिल के पास फोड़ा होना आदि का भी खतरा हो सकता है।

रात में सोते समय धूम्रपान, मुंह से सांस लेना, पालतू जानवरों, पराग और मोल्ड्स, मांसपेशियों में खिंचाव, गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग, एचआईवी संक्रमण, और साथ ही सर्जरी के दौरान सामान्य संज्ञाहरण के कारण भी गले में खराश हो सकती है।

गले की खराश से कैसे बचें
गले में खराश को रोकने का सबसे अच्छा तरीका उन कीटाणुओं (वायरस और बैक्टीरिया) से बचना है जो उन्हें पैदा करते हैं। इसके लिए सबसे बेहतर उपाय स्वच्छता बनाए रखना है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें। 

अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं, खासकर शौचालय का उपयोग करने से पहले, खाने के बाद और छींकने या खांसने के बाद।
चलते-फिरते हाथों को साफ रखने के लिए शराब पर आधारित हैंड सैनिटाइजर लगाएं।
अपनी आंखों या मुंह को छूने से बचें।
खांसते या छींकते समय अपना मुंह ढक कर रखें।
भोजन, पीने के गिलास या बर्तन साझा करने से बचें।
नियमित रूप से टेलीफोन, टीवी रीमोट और कंप्यूटर कीबोर्ड की सफाई करें।
जो लोग बीमार हैं उनसे निकट संपर्क से बचें।

टॉन्सिल इन्फेक्शन लक्षण
गले में जलन, गले में दर्द, बढ़े हुए टॉन्सिल, खाने में या तरल पदार्थ निगलने में परेशानी। कारण: ठंडी हवा, ठंडी चीजों का सेवन, वायरस या बैक्टीरिया।

टॉन्सिल से कैसे बचें
मौसम ठंडा होने पर अपने बच्चे को कुछ भी खिलाने से बचें। उनके कान और गर्दन को हवा से बचाएं। बच्चों को विटामिन सी वाले फल और सब्जियां दें। उन्हें नट्स भी दें जिससे उनकी प्रतिरक्षा को बढ़ावा मिल सके। नमक के पानी का गरारे करें और गर्म पानी पियें। नमक के पानी से गरारे करें। एक चिकित्सक से परामर्श लें।

नमक के पानी के गरारे भी है फायदेमंद
इनके लिए आप नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट रसोई में मौजूद नमक को इन परेशान करने वाली बीमारियों के उपचार के लिए प्रभावी मानते हैं। नाक, गले और दांतों से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर हमेशा नमक के पानी से गरारे करने की सलाह देते हैं।

सर्दियों में रोजाना रात को सोने से पहले नमक के पानी के गरारे करने से आपको पूरी सर्दियां इन समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है। आपको एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर 5 से 6 बार गरारे करने होंगे। रात को ऐसा करने से आप चैन से सो सकते हैं। ऐसा करने से गले की खराश आपको परेशान नहीं करेगी। चलिए जानते हैं नियमित रूप से इस उपाय पर काम करने से आपको और क्या-क्या फायदे होते हैं।

Web Title: Coronavirus tips: Sore throat a big symptoms of covid-19, home remedies to get rid sore throat, cough pain and tonsils
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