यौन संचारित रोग या एसटीडी (STDs) यौन संपर्क के माध्यम से संक्रमित संक्रमण होते हैं। ये रोग किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि के माध्यम से फैल सकते हैं। आजकल के जवान लड़के-लड़कियों में एसटीडी को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। तेजी से बदलते लाइफस्टाइल का असर यह है कि कई लड़के-लड़कियां एक से अधिक लोगों के साथ यौन रिश्ता रखते हैं। आपको बता दें कि आपके इस कदम से आप कई जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त में आ सकते हैं। दिल्ली के मशहूर सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर विनोद रैना आपको कुछ ऐसी ही बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जो सीधे रूप से किसी भी तरह की यौन गतिविधि से जुड़ी हैं। आपको इनके कारण और लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए ताकि आप खुद को और अपने साथी को जोखिम से बचा सकें।

1) क्लैमाइडिया (Chlamydia) 
क्लैमाइडिया बैक्टीरिया से होने बाला यौन संचरित संक्रमण (STD) है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में होता है। इससे महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा में संक्रमण, पुरुषों में मूत्रमार्ग, गुदा और गले पुरुषों और महिलाओं दोनों की आंखों में संक्रमण हो सकता है। यह खतरनाक बीमारी महिलाओं के गर्भवती होने की क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। इससे पीड़ित महिलाओं को उनके पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द होता रहता है। कुछ मामलों में इससे शिकार महिलायें गर्भधारण करने की क्षमता पूरी तरह खो देती हैं। 

2) गोनोरिया (Gonorrhoea) 
गोनोरिया, निसेरिया गोनोरीए नामक बैक्टीरिया से होता है। यह वायरस बहुत तेजी से फैलता है। यह आपके गले, मूत्र नली, योनि और गुदा को संक्रमित कर सकता है। हालांकि इसका इलाज संभव है, लेकिन इसके दुष्‍प्रभावों को रोकने के लिए सही समय पर इलाज किया जाना जरूरी है। असुरक्षित यौन, गुदा या मुख मैथुन गोनोरिया के मुख्‍य कारण हो सकते हैं। इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति का वीर्यपात का होना जरूरी नहीं है। यह संक्रमण गर्भवती महिलाओं से उनके होने वाले बच्‍चों में भी हो सकता है। किसी नए साथी के साथ सेक्स करने या एक से अधिक लोगों के साथ सेक्स करने से गोनोरिया का खतरा बढ़ जाता है।

3) ट्रिकोमोनिसिस (Trichomoniasis) 
ट्रिकोमोनिसिस परजीवी की वजह से होने वाला यौन संचारित रोगहै। संक्रमित साथी के साथ संभोग से आपको यह हो सकता है। कई लोगों में लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। यदि आपको लक्षण दिखाई देते हैं तो सामान्यतः ये संक्रमित होने के 5 से 28 दिन बाद होते हैं। इसकी वजह से महिलाओं को वैजिनाइटिसया योनिशूल हो सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं- योनि से पीला या हरा स्राव, सेक्स के दौरान पीड़ा, योनि की बदबू, पेशाब में जलन, योनि में या इसके आसपास खुजली। ज्यादातर पुरुषों में कोई लक्षण नहीं होता है। यदि होता है तो उनके लिंग से सफेद स्राव हो सकता है या पेशाब और वीर्यपात में दर्द या कठिनाई हो सकती है।

4) एचआईवी (HIV) 
एचआईवी ( ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस) वायरस के संक्रमण से मनुष्य में एड्स होता है। एचआईवी मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून) को खत्म देता है। जिससे मनुष्य अन्य बीमारियों से लड़ने की ताकत को खो देता है। इसीलिए एड्स को सिंड्रोम कहते हैं। एड्स से बीमार आदमी को कोई अन्य बीमारी हो जाए तो ज्यादातर चांस होता है कि उस बीमारी का इलाज नहीं हो पाएगा। इसलिए आप कह सकते हैं कि एड्स का मरीज एड्स के कारण नहीं मरता है, वह तो किसी अन्य बीमारियों या संक्रमण या दोनों से मरता है। 

5) हर्पीस (Herpes) 
ओरल हर्पीस ओरल हर्पीस में मुंह या होंठो पर इंफेक्‍शन हो जाता है जिसकी वजह से उस जगह पर लाल रंग के दर्द भरे छाले निकल आते हैं। यह दानें दाद की तरह दिखाई देते हैं। ओरल हर्पीस एचएसवी 1 वायरस और संक्रमित व्‍यक्‍ति से ओरल सेक्‍स से फैलता है। यहां तक कि अगर आप रोगी का लिप बाम भी शेयर कर रहे हों तो भी आपको यह हो जाएगा। जेनाइटल हर्पीस यौन-अंगों के ऊपर अथवा आसपास या गुदा मार्ग में छाले दिखाई देते हैं। इनमें जलन और खुजलाहट होती है। एक बार ठीक होने के बाद कुछ हफ्तों अथवा महीनों के बाद ये छाले फिर से हो सकते हैं।  

6) जेनाइटल वार्टस (Genital Warts) 
जेनाइटल वार्टस पूरे विश्व में सबसे आम पाया जाने वाला यौनसंचारित रोग है। इसमें जननांगों पर मस्‍से (वार्टस) हो जाते है। जननांगों पर मस्से होने का कारण ह्यूमन पैपीलोमावारस (एचपीवी) होता है। जननांग पर होने वाले वार्टस का कोई इलाज नहीं है। यह या तो अपने-आप ठीक हो जाते हैं अथवा इन्हें दबाने के लिए आपको उपाय तलाशने होते हैं। जेनाइल वार्टस, लिंग, योनि या गुदा (जननांगों) पर एचपीवी संक्रमण हो सकता है, इसके साथ-साथ यह आपके मुंह और गले में भी हो सकता है। वार्टस का पता नहीं होने से एचपीवी से संक्रमित अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता नहीं चलता। फिर भी संक्रमित व्यक्ति से यह दूसरों को हो जाता है।

7) हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) 
यह एक संक्रामक बीमारी है, जो हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के कारण होती है। यह बीमारी लीवर को संक्रमित करती है। यह बीमारी धीरे-धीरे खतरनाक रूप ले लेती है। इससे सिरोसिस (लीवर की संरचना में क्षति, जिससे उसके क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं),लीवर का काम नहीं करना, लीवर कैंसर आदि हो जाते हैं। हेपेटाइटिस बी यौन क्रिया के द्वारा भी फैल सकता है।

8) सिफलिस (Syphilis) 
सिफलिस एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में फैलने वाली यौन संचारित बीमारी है। सिफलिस की शुरुआत ट्रेपोनेमा पल्लिडम नामक जीवाणु से होती है। यदि गर्भवती महिला को यह बीमारी है, तो यह उसके गर्भ में पल रहे बच्‍चे को भी हो सकती है। जब आप किसी सिफलिस से संक्रमित किसी व्‍यक्ति से संबंध बनाते हैं, तो यह बीमारी 9 से 10 दिन बाद शुरू हो जाती है। इसमें होने वाला घाव संक्रमण के स्थान पर फुन्सी यानी सूजन के साथ शुरू होता है। कुछ दिनों बाद उस जगह पर छाला बन जाता है। महिलाओं में घाव योनि के बाहर या अन्दर या गर्भाशयग्रीवा में हो सकता है।  


Web Title: 8 STDs or sexually transmitted diseases all adults should Know about
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