Rajasthan: Dalit murdered in custody and Woman Gangraped, case registered against accused policeman | राजस्थान: पुलिसकर्मियों पर दलित को हिरासत में मार डालने और उसकी भाभी से सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप, मामला दर्ज
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर थाने के एक निलंबित पुलिस निरीक्षक और 5-7 अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक महिला की कथित रूप से पिटाई करने, उसे प्रताड़ित करने और उससे सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला रविवार को दर्ज किया गया है। पुलिस ने चोरी के एक मामले में छह जुलाई को नेमीचंद नायक को पकड़ा था। नायक की पुलिस हिरासत के दौरान उसी रात अस्पताल में मौत हो गयी। इस बीच नायक की भाभी ने आरोप लगाया था कि उसे अवैध तरीके से थाने में हिरासत में रखा गया और उससे कथित रूप से बलात्कार किया गया।

जयपुर के सवाई मान सिंह चिकित्सालय में भर्ती दलित महिला ने आरोप लगाया कि थानाधिकारी और पुलिस कर्मियों ने उसे और उसके देवर को अवैध तरीके से थाने में हिरासत में रखा। महिला ने थानाधिकारी रणवीर सिंह और 5-7 अन्य पुलिसकर्मियों पर उसे और उसके देवर को अवैध तरीके से पुलिस हिरासत में रखने, पिटाई करने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगया है। पुलिस हिरासत में मौत का मामला प्रकाश में आने के बाद सरदारशहर थानाधिकारी और छह अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया और शेष पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया। मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

सरदारशहर के वर्तमान थानाधिकारी महेन्द्र दत्त शर्मा ने बताया कि शनिवार को महिला के बयान के आधार पर तत्कालीन थानाधिकारी और 5-7 अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ रविवार को मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच सीआईडी-सीबी द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी (सामूहिक दुष्कर्म), 343 (अवैध तरीके से तीन या इससे अधिक दिन तक बंदी बनाने), 323 (जानबूझ कर हमला करने) सहित एससी/एसटी कानून की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

मृतक नेमीचंद के भाई ने आरोप लगाया कि उसके भाई को पुलिस ने 30 जून को पकड़ा था और उसे अवैध तरीके से हिरासत में रखा। उन्होंने बताया, ‘‘उसके बाद पुलिसकर्मी 3 जुलाई को मेरे भाई के साथ घर आए थे और वे उसी दिन मेरे भाई और मेरी पत्नी को अपने साथ ले गए थे। पुलिस थाने के रास्ते में मेरे भाई ने मेरी पत्नी को बताया कि पुलिस कर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे प्रताड़ित किया। उन्होंने (पुलिसकर्मियों ने) मेरे भाई और मेरी पत्नी को अवैध तरीके से हिरासत में रखा। 6 जुलाई को पुलिस ने मेरे भाई की हत्या कर दी।’’

नेमीचंद के भाई ने आरोप लगाया, ‘‘पुलिसकर्मियों ने मेरी पत्नी के साथ मारपीट की। उसकी उंगलियों को कुचलने के साथ ही नाखून तक उखाड़ डाले और उसे प्रताड़ित करने के साथ उससे सामूहिक दुष्कर्म किया।’’ उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी पुलिस हिरासत में उसके छोटे भाई की हत्या की गवाह है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने मृतक नेमीचंद का अंतिम संस्कार 7 जुलाई को करने के लिए परिजनों पर दबाव बनाया।

जयपुर के सवाईमानसिंह चिकित्सालय में इलाज करा रही पीड़िता की हस्ताक्षरित शिकायत परिजनों की ओर से पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह के नाम शुक्रवार को भेजी गई थी जिसके बाद शनिवार को पीड़िता का बयान दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने चुरू के जिला पुलिस अधीक्षक को हटा दिया है। वहीं इस मामले में सीओ को निलंबित किया गया है। राज्य सरकार ने शुक्रवार देर रात यह कार्रवाई की। कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार चुरू के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेंद्र कुमार को प्रशासनिक कारणों के चलते एपीओ पदस्थापन की प्रतीक्षा में कर दिया गया है। वहीं सरदारशहर के सीओ भंवरलाल को निलंबित किया गया है।

पीड़ित परिजनों की मदद कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुनील क्रांति ने बताया कि हम आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग करते है। यह पुलिस का क्रूर चेहरा है और पीड़ित परिजनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर हम राज्यव्यापी प्रदर्शन-आंदोलन करेंगे। पुलिस ने बताया कि मृतक नेमीचंद को सरदारशहर पुलिस ने 6 जुलाई को गिरफ्तार किया था और उसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहां उसकी उसी रात मौत हो गई थी।


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