Nirbhaya fund: Government data shows that it is not utilised properly as WCD Ministry puts in Parliament | सरकारी डेटा बताता है कि राज्यों द्वारा निर्भया फंड का उपयोग ठीक से नहीं किया गया
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

Highlightsमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय निर्भया फंड के लिए नोडल मंत्रालय है, जिसने ये डेटा संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में रखा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा भी और कई मंत्रालय इस परियोजना में सहभागी हैं। 

महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने पांच साल पहले 'निर्भया फंड' बनाया था। संसद में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, देशभर में राज्यों द्वारा धन का इस्तेमाल कम किया गया। दिसंबर 2012 में दिल्ली के बसंत विहार में चलती बस में एक मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद देशभर में आंदोलन छिड़ गया था, जिसके बाद निर्भया फंड बनाया गया। 

महिला और बाल मामलों के मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय द्वारा दिए गए फंड का उपयोग इस दौरान क्रमशः 20%, 25% और 15% किया गया। इससे महज 20 फीसदी ज्यादा फंड गृहमंत्रालय द्वारा इस्तेमाल किया गया जोकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया था। 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय निर्भया फंड के लिए नोडल मंत्रालय है, जिसने ये डेटा संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में रखा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा भी और कई मंत्रालय इस परियोजना में सहभागी हैं। 

गृह मंत्रालय के फिलहाल 13 योजनाएं चलाता हैं। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के पास चार योजनाएं, रेल मंत्रालय के पास दो, सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय और न्याय मंत्रालय के पास एक-एक योजना है। 

निर्भया फंड का फ्रेम वर्क कुछ ऐसा है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली अधिकारियों की अधिकार प्राप्त समिति सभी मंत्रालयों के प्रस्तावों को देखती है। शुरू में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को धनराशि जारी करने के लिए अनिवार्य किया गया था लेकिन प्रक्रिया लंबी होने की वजह से यह फैसला किया गया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को अपनी मंजूरी देगा, जो धनराशि जारी करेगा।

2013-14 और 2014-15 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए। 2016-17 और 2017-18 के लिए, आवंटन 550 करोड़ रुपये था। 2018-19 और 2019-20 में यह आंकड़ा 500 करोड़ रुपये था। केंद्र सरकार निर्भया फंड से राज्यों को धन आवंटित करता है और राज्य इसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए खर्च करते हैं।

बता दें कि बीते एक दिसंबर को भी लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान निर्भया कोष के आवंटन के संबंध में सरकार की ओर से आंकड़े बताए गए थे, जिनके अनुसार आवंटित धनराशि में से 11 राज्यों ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

इन राज्यों में महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा के अलावा दमन और दीव शामिल हैं। दिल्ली ने 390.90 करोड़ रुपये में सिर्फ 19.41 करोड़ रुपये खर्च किये। उत्तर प्रदेश ने निर्भया फंड के तहत आवंटित119 करोड़ रुपये में से सिर्फ 3.93 करोड़ रुपये खर्च किए।

कर्नाटक ने 191.72 करोड़ रुपये में से 13.62 करोड़ रुपये, तेलंगाना ने 103 करोड़ रुपये में से केवल 4.19 करोड़ रुपये खर्च किए। आंध्र प्रदेश ने 20.85 करोड़ में से केवल 8.14 करोड़ रुपये, बिहार ने 22.58 करोड़ रुपये में से मात्र 7.02 करोड़ रुपये खर्च किये।

गुजरात ने निर्भया फंड के तहत आवंटित 70.04 करोड़ रुपये में से 1.18 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश ने 43.16 करोड़ रुपये में से 6.39 करोड़ रुपये, तमिलनाडु ने 190.68 करोड़ रुपये में से 6 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल ने 75.70 करोड़ रुपये में से 3.92 करोड़ रुपये खर्च किये।

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जुड़ी योजनाओं के लिये 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को महिला हेल्पलाइन, वन स्टाप सेंटर स्कीम सहित विभिन्न योजनाओं के लिये धन आवंटित किया गया था।

दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दादरा नगर हवेली और गोवा जैसे राज्यों को महिला हेल्पलाइन के लिए दिए गए पैसे जस के तस पड़े हैं। वन स्टाप स्कीम के तहत बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल ने एक पैसा खर्च नहीं किया। महिला पुलिस स्वयंसेवक योजना के मद में आवंटित राशि में अंडमान निकोबार, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और उत्तराखंड ने कोई राशि खर्च नहीं की ।

न्याय विभाग द्वारा 11 राज्यों को दिए गए फंड में से किसी भी राज्य ने एक पैसा खर्च नहीं किया। न्याय विभाग ने निर्भया कोष के तहत परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिये झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, नगालैंड, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा तथा उत्तराखंड को धन आवंटित किया था।

(पीटीआई-भाषा इनपुट के साथ)
 

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