muzaffarpur Shelter case: 40 number list from brajesh thakur, CBI releases his son | मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड के कितने राज? आरोपी ब्रजेश ठाकुर के पास से मिले 40 नंबर, मंत्री जी का नाम भी शामिल!
मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड के कितने राज? आरोपी ब्रजेश ठाकुर के पास से मिले 40 नंबर, मंत्री जी का नाम भी शामिल!

पटना, 12 अगस्त: बिहार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में यौन शोषण के मामले ने पूरे देश को हिलाकर कर रख दिया है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। आए दिन मामले में कोई-न-कोई नए खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई ने इसी सिलसिले में केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के बेटे राहुल आनंद को शनिवार को हिरासत में लेकर लंबी और कड़ी पूछताछ की है। रविवार सुबह सीबीआई ने आनंद को छोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी के बेटे से लंबी पूछताछ में सीबीआई को कई अहम सबूत मिले हैं।

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि इस केस में और कितने रहस्य हैं। ममाला जून में ही सामने आ गया था लेकिन पहले राज्य सरकार की पुलिस ने इस मामले पर चुप्पी साध ली। जब विपक्ष के दबाव में शेल्टर चलाने वाले और इस कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुरको जेल भेजा गया तो वहां भी उसकी मदद करने की बात सामने आई। 



 

बिहार में 15 अगस्त आने से पहले सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए हर जेल में छापा मारा जाता है। शनिवार को जब यह कार्रवाई की गई तो मुजफ्फरपुर जिला जेल में बंद ब्रजेश ठाकुर को लेकर जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला था। ब्रजेश ठाकुर जेल में मुलाकातियों से मिलने वाले एरिया में आराम से टहलते नजर आया। इसके साथ ही उसके पास दो पन्नों में तकरीबन 40 लोगों के नाम और फोन नंबर लिखे हुए थे। 

बताया जा रहा है कि इसमें कई प्रभावी लोगों के नाम शामिल हैं। जिसमें एक मोबाइल नंबर के आगे मंत्री जी का नाम भी लिखा था। अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या जेल में कैद ब्रजेश ठाकुर को अब भी बाहर के लोगों से मदद मिल रही है क्या? हालांकि सीबीआई ने सभी कागजात जब्त कर सील कर दिए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ब्रजेश ठाकुर को उस जगह पर देखा जहां लोग कैदियों से मिलने आते हैं। वहां उसके हाथ से पुलिस ने दो पर्चियां बरामद की। ऐसे में यह कहा जाने लगा है कि ब्रजेश ठाकुर की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह जांच के बाद हीं पता चल पाएगा

 इस छापेमारी के बाद प्रशासन ब्रजेश ठाकुर की बीमारी को बहाना बना रहा है। उम्मीद की जा रही है कि अब मेडिकल बोर्ड का गठन कर उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ और कागजात मिले हैं, जिससे लग रहा है कि वो अपने वकीलों के साथ बैठ कर कैसे लोगों को फंसाना है, उसकी प्लानिंग कर रहा है।  

क्या है पूरा मामला 

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस), मुम्बई द्वारा अप्रैल में राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले सामने आया था।

बालिका गृह में रहने वाली 42 में से 34 लड़कियों के चिकित्सकीय परीक्षण में उनके साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह का मालिक बृजेश ठाकुर इस मामले में मुख्य आरोपी है। इस मामले में 31 मई को 11 लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ठाकुर समेत 10 लोगों को तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। एक व्यक्ति फरार है। 

बिहार पुलिस ने 26 जुलाई को इन आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। राज्य सरकार ने 26 जुलाई को इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी और बाद में सीबीआई ने इसकी जांच राज्य पुलिस से अपने हाथ में ले ली थी।

यौन उत्पीड़न कांड का खुलासा होने के बाद से पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के परामर्श के साथ संस्थागत प्रणालियां विकसित करने को कहा है। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है क्योंकि समाज में सभी तरह के लोग रहते हैं और वे एक छोटा सा मौका मिलते ही गलत काम में शामिल हो सकते हैं।” 

(भाषा इनपुट)

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