Highlightsअंनत सिंह पर कई संगीन मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या, किडनैपिंग, फिरौती, डैकती जैसे मामले शामिल है।साल 2005 में पहली बार चुनाव जीतने वाले मोकामा के इस ‘डॉन’ की सरकार अलग ही चलती है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में कई बाहुबली और दंबग नेता हैं। बिहार के मोकामा से विधायक अनंत कुमार सिंह उर्फ छोटे सरकार भी इसी लिस्ट में आते हैं। आप इन्हें कई नामों से बुला सकते है, बाहुबली नेता या रॉबिनहुड कह सकते हैं, चाहे तो एक बदनाम गुंडा या अपराधी कह सकते हैं, या फिर विधायक या माननीय कह सकते हैं। इनके ऊपर सारे नाम फिट बैठते हैं। अनंत कुमार सिंह उर्फ छोटे सरकार की कहानी ठीक वैसी ही है, जैसी बॉलीवुड की हिंदी मसाला फिल्मों में दिखाई जाती है। एक बदनाम गुंडा जो नेताओं के लिए काम करते-करते खुद नेता बन जाता है।

लोकसभा चुनाव 2019 में लड़ने का किया था दावा

अनंत कुमार सिंह ने लोकसभा चुनाव 2019 के पहले दावा किया था कि वो कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। लेकिन बाद में उनकी पत्नी नीलम देवी को कांग्रेस ने मुंगेर लोकसभा सीट से टिकट दिया है। अनंत सिंह अपनी पत्नी के लिए प्रचार-प्रसार में इन दिनों जुटे हैं। अनंत सिंह बिहार की राजनीति से निकलकर केन्द्र की राजनीति में कब आएंगे ये तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। लेकिन वो बिहार में अपनी बाहुबली और दंबग छवि के लिए हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। 

आला अधिकारी भी अनंत सिंह के नाम के आगे   "जी" लगाना नहीं भूलते थे

कानून की किताब में शायद ही कोई ऐसी धारा बची हो जिसके तहत अनंत सिंह के नाम पर मुकदमा दर्ज न हो। अंनत सिंह पर कई संगीन मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या, किडनैपिंग, फिरौती, डैकती जैसे मामले शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के सिर्फ  बाढ़ थाने में ही कुल 23 संगीन मामले दर्ज हैं। लेकिन मजाल है कि अनंत सिंह किसी से भी डर जाएं... पुलिस के आला अधिकारी भी उनसे खौफ खाते थे... गिरफ्तारी के बाद भी बिहार के आला अफसर उनके नाम के आगे  "जी" लगाना नहीं भूलते थे।

नीतीश ने चुनाव जीतने के लिए लिया था अनंत का सहारा

अनंत सिंह अपने राजनीतिक पहुंच से इनमें से कई मामलों में बरी हो चुका है। 2005 में लालू प्रसाद के खिलाफ चुनाव लड़ने के दौरान नीतीश ने बिहार को अपराधियों से मुक्त करने का वादा तो किया, लेकिन चुनाव जीतने के लिए अनंत का ही सहारा लिया था। सत्ता में आने के बाद बिहार में हजारों अपराधियों को अदालतों की ओर से दोषी करार दिया गया था। हजारों अपराधी जेल भेजे गए, जिनमें लालू प्रसाद का करीबी मोहम्मद शहाबुद्दीन भी शामिल था। लेकिन मजाल थी कि कोई अनंत सिंह को छूने की हिम्मत भी करें।

मोकामा के इस ‘डॉन’ की अलग सरकार चलती है! 

साल 2005 में पहली बार चुनाव जीतने वाले मोकामा के इस ‘डॉन’ की सरकार अलग ही चलती है। इलाके में अनंत सिंह का इतना खौफ था कि जब भी इलाके में कोई घटना होती है तो लोग पुलिस से पहले उसके पास जाते हैं।

इसका अंदाज आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1990 के दशक में इसके पास के ही गांव के बदमाश ने बाढ़ बाजार से एक व्यापारी को किडनैप कर लिया था। पुलिस कुछ नहीं कर पाई और मामला अनंत सिंह के पास गया। अनंत ने अपने गुर्गो के साथ किडनैपिंग करने वालों के घर धावा बोल दिया। दोनों ओर से जबर्दस्त गोलीबारी हुई जिसमें कई लोग मारे गए। हालांकि बाद में इस घटना ने जातिवादी रंग ले लिया.. मामले में राजनीति शुरू हो गई और कई बड़े नेता भी इस लड़ाई में कूद गए थे। लेकिन उस वक्त के मीडिय रिपोर्ट्स की मानें तो जब  अनंत सिंह जब किडनैपर्स पर  धावा बोलने आया तो वह घोड़े पर सवार होकर सबसे आगे आगे चल रहा था और इतना ही नहीं अनंत सिंह ने सिर पर सोने का मुकुट पहना हुआ था।

जब अनंत सिंह पर कानून ने कसा शिकंजा 

 1990 और 2000 के दशक में अनंत सिंह के खौफ या रसूख के कई किस्से आपको सुनने और देखने को मिल जाएंगे। 2007 में एक महिला से रेप और हत्या के मामले में अनंत सिंह का नाम सामने आया था। लेकिन जब इस बारे में एक चैनले के पत्रकार ने अनंत सिंह ने सवाल किया तो सत्ता नशे में चूर विधायक ने पत्रकार की जमकर पिटाई कर दी। लेकिन वो पहला मौका आया जब अनंत सिंह पर कानून का शिकंजा कसा गया।

2015 के जून महीने में अनंत सिंह के परिवार की किसी महिला के साथ पटना के बाढ़ बाजार इलाके में चार युवकों ने छेड़खानी कर दी थी। खबर जैसी ही अनंत सिंह तक पहुंचती है, पटना के उनके विधायक आवास से गुंडों से भरी एक गाड़ी निकली। चारों लड़कों को भरे बाजार से उठाया जाता है। लेकिन इसी बीच पटना पुलिस को इसकी भनक लग जाती है। पुलिस की स्पेशल टीम अनंत सिंह के गांव पहुंचती है। चार में से तीन लड़के तब तक बुरी तरह पिट चुके थे और उनकी हालत गंभीर थी...मगर ऐन वक्त पर पुलिस उन्हें बचा लेती है और अनंत सिंह के पांच गुंडों को गिरफ्तार कर लेती है। कहा जाता है इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। आरोप है कि अनंत सिंह के इशारे पर उनके गुर्गों ने चारों युवकों को अगवा किया था, जिनमें से एक युवक की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसका शव जंगल में पड़ा मिला था।

बिहार के दो एसएसपी की अनंत की गिरफ्तारी में अहम भूमिका

पुलिस को इस बात का पूरा भरोसा था कि इस घटना को अनंत सिंह के कहने पर अंजाम दिया गया है। लेकिन अनंत सिंह को गिरफ्तार करने की हिम्मत किसी में ना थी और ना ही सबूत जुटाने की। इसी आशा में वक्त बीतता चला गया। लेकिन पटना पुलिस ने अनंत सिंह को आखिरकर 24 जून की शाम को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन अनंत सिंह की गिरफ्तारी आसान नहीं थी।

अनंत सिंह की गिरफ्तारी में पटना के दो एसएसपी की अहम भूमिका थी, एक जितेंद्र राणा, जिनका इसी केस की वजह से नीतीश सरकार तबादल कर रही थी। दूसरे विकास वैभव, जिन्होंने आते ही अनंत सिंह को गिरफ्तार किया।  23 जून की दोपहर एसएसपी जितेंद्र राणा तबादले से पहले अपना प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाते हैं और अनंत सिंह की केस से जुड़ी सारी पोल खोल देते हैं। इसके बाद जब नए एसएसपी विकास वैभव आते ही सबसे पहले अनंत सिंह के घर की तलाशी लेने के लिए सर्च वारंट लिया और 24 जून को पटना के अलग-अलग जिलों से फोर्स इकट्ठा कर उस अनंत सिंह की तलाशी ली। तलाशी के बाद घर से कई सबूत बरामद हुए। जिसके इसी दिन शाम को अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद रात को ही उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जहां से उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में अनंत सिंह को उसी बेऊर जेल भेज दिया गया जहां वो पहले भी रह चुके थे।

2004 में  अनंत सिंह के घर पर एसटीएफ ने की छापेमारी

 ये पहला मौका नहीं था जब अनंत सिंह के घर पर छापेमारी हुई थी। इससे पहले 2004 में अनंत सिंह के घर पर एसटीएफ ने छापेमारी की थी और फिर घंटो गोलीबारी हुई थी। कहा जाता है कि गोली अनंत सिंह को भी लगी थी। मगर वो बच गया। हालांकि इस एनकाउंटर में अनंत सिंह के आठ लोग मारे गए थे। इसके बाद अनंत सिंह ने यहां इस किले जैसे घर में अपने आप को कैद कर लिया था। कहते हैं अनंत सिंह इस मकान में तकरीबन 50 परिवारों को किराए पर रख लिया। ताकि वो फिर कभी पुलिस या एसटीएफ उन पर धावा बोले तो ये परिवार उनके लिए ढाल का काम करें।

2005 में पहली बार जीता चुनाव 

 अनंत सिंह ने जुर्म की दुनिया के साथ साथ सियासी गलियारों में भी अपनी पैठ बढ़ाई और नीतीश कुमार के करीबियों में से एक हो गया। नीतीश की दोस्ती अनंत को रास भी आई और 2005 में वो मोकामा से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीत गया। इसके बाद 2010 में भी वो जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीता लेकिन 2015 में बिहार में विधान सभा चुनाव में जेडीयू ने बढ़ते दबाव की वजह से अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गया। लेकिन विवादों से अनंत सिंह का गहरा नाता है...आइए नजर डालते हैं अनंत सिंह से जुडे़ कुछ विवादों पर..

अनंत सिंह से जुड़े विवाद 

- अनंत सिंह का एक वीडियो आया था जिसमें वह एके 47 राइफल लेकर नाचते दिख रहे थे।
-अनंत पर दो बार जानलेवा हमला भी हो चुका है, लेकिन वह बच गया।
-  बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जीतनराम मांझी को भी अनंत सिंह ने धमकाया था।
-  अनंत नीतीश सरकार में मंत्री रहीं परवीन अमानुल्लाह को भी खुलेआम धमकी दे चुका था।
- 2013 में अनंत उस वक्त चर्चा में आए थे जब वह अपनी लग्जरी कार को छोड़कर बग्घी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे थे।
- पत्रकार से लेकर पुलिस तक से कर चुके हैं हाथा-पाई
- 2013 में अनंत सिंह पर पटना के पॉश पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित अपने होटल के सामने अतिक्रमण करने का आरोप भी लग चुका है।
- विधायक बनने के पांच साल बाद ही अनंत सिंह की संपत्ति कई गुना बढ़ गई थी।
- 2007 में जानवरों के मेले में अनंत सिंह लालू प्रसाद यादव का घोड़ा लेकर पहुंचे थे।


Web Title: Bihar Mokama MLA Anant Kumar Singh crime to political History
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