Wholesale inflation falls 25 months low to 1.08 percent in July | थोक मुद्रास्फीति 25 महीने का न्यूनतम स्तर, जुलाई में घट कर 1.08 प्रतिशत पर पहुंची
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

खाद्य सामग्री, ईंधन तथा विनिर्मित उत्पादों की कीमतें कम होने के कारण थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति जुलाई महीने में 1.08 प्रतिशत पर आ गयी। यह थोक मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने आयी कमी है। यह 25 महीने के निम्नतम स्तर पर है। थोक मुद्रास्फीति जून में 2.02 प्रतिशत तथा पिछले साल जुलाई में 5.27 प्रतिशत थी।

इससे पहले जून 2017 में यह इससे नीचे 0.90 प्रतिशत पर थी। जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति भी जून के 3.18 प्रतिशत की तुलना में नरम होकर 3.15 प्रतिशत रही है। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति पर निर्णय करते समय खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ही गौर करता है। लेकिन इसमें तेज गिरावट के कारण अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में भी रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दर घटाये जाने की संभावना को बल मिलता है।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य वर्ग की मुद्रास्फीति जून के 6.98 प्रतिशत से नरम होकर 6.15 प्रतिशत पर आ गयी।

थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं को 15 प्रतिशत भारांश दिया गया है। खाद्य वस्तुओं के वर्ग में आलू के भाव में गिरावट जारी रही। आलू में जून का भाव एक साल पहले की तुलना में 24.27 प्रतिशत नीचे रहा। जुलाई में यह सालाना आधार पर 23.63 प्रतिशत सस्ता था।

सब्जियों के वर्ग में मुद्रास्फीति 24.76 प्रतिशत से गिरकर 10.67 प्रतिशत रह गयी। हालांकि फलों में थोक मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि देखने को मिली और यह जून के 1.87 प्रतिशत की तुलना में जुलाई में 15.38 प्रतिशत पर पहुंच गयी।

ईंधन एवं बिजली वर्ग में थोक भाव सालाना आधार पर और गिरे है। गत जून में इस वर्ग में थोक मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 2.20 प्रतिशत कम था। जुलाई दरें एक साल पहले से 3.64 प्रतिशत नीचे आ गयीं।

अखाद्य सामग्रियों में थोक मुद्रास्फीति 5.06 प्रतिशत से कम होकर 4.29 प्रतिशत पर आ गयी। विनिर्मित उत्पादों में थोक मुद्रास्फीति 0.94 प्रतिशत से गिरकर 0.34 प्रतिशत पर आ गयी।

थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मात उत्पादों की 64.23 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है। इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि निकट भविष्य में थोक मुद्रास्फीति के नरम रहने का ही अनुमान है। हालांकि रुपया के कमजोर रहने से आयात की लागत में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुद्रा शोध प्रमुख राहुल गुप्ता ने कहा कि थोक मुद्रास्फीति में गिरावट अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण खाद्य सामग्रियों की मुद्रास्फीति में कमी आना रहा है।

Web Title: Wholesale inflation falls 25 months low to 1.08 percent in July
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