India's Wholesale Inflation Eases to 4.53 percent in August | अगस्त में थोक मुद्रास्फीति आई गिरावट, घटकर 4 माह के न्यूनतम स्तर पर पहुंची
अगस्त में थोक मुद्रास्फीति आई गिरावट, घटकर 4 माह के न्यूनतम स्तर पर पहुंची

नई दिल्ली, 14 सितंबरः थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में घटकर चार माह के न्यूनतम स्तर 4.53 प्रतिशत तक गिर गयी है। खाद्य पदार्थों खासकर सब्जियों के भाव में कमी से मुद्रास्फीति में नरमी रही। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया कि रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत दर में वृद्धि कर सकता है।

खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई कमी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी के प्रभाव को कम किया। जिसके परिणामस्वरूप अगस्त में थोक मुद्रास्फीति दर में गिरावट रही। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में 5.09 प्रतिशत रही थी जबकि एक साल पहले अगस्त में यह 3.24 प्रतिशत पर थी। 

शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों की थोक मुद्रास्फीति अगस्त में 4.04 प्रतिशत घटी है। पिछले महीने इसमें 2.16 प्रतिशत की कमी हुयी थी। सब्जियों में थोक महंगाई अगस्त में 20.18 प्रतिशत घटी जबकि जुलाई में इसमें 14.07 प्रतिशत की गिरावट आई थी। अगस्त में ईंधन एवं बिजली क्षेत्र की मुद्रास्फीति 17.73 प्रतिशत पर रही। घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि से इसमें तेजी आई। 

अगस्त में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की मुद्रास्फीति 46.08 प्रतिशत रही। डीजल में 19.90 प्रतिशत और पेट्रोल में 16.30 प्रतिशत रही।

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति जुलाई में 4.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5 प्रतिशत हो गयी। यह संकेत है कि बाजार में कीमतें निर्धारित करने की क्षमता रखने वाली कंपनियों ने रुपये में गिरावट और ईंधन के साथ बढ़ी लागत का बोझ अंतिम कीमतों पर डालना शुरू कर दिया है।

नायर ने कहा कि अगस्त 2018 में मुख्य-थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि, रुपये में गिरावट के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की मुद्रास्फीति के मामले में जोखिम, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एमएसपी में संशोधन को देखते हुये लग रहा है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के अधिकांश सदस्य नीतिगत दर में वृद्धि के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। 

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक 5 अक्तबूर से होनी है। हालांकि, उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि थोक एवं खुदरा मुद्रास्फीति दोनों में गिरावट से धारणा मजबूत होगी और आरबीआई द्वारा नीतिगत दर में कटौती से निवेश को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "मुद्रास्फीति में गिरावट आरबीआई के मध्यम-अवधि मुद्रास्फीति लक्ष्य के अनुरूप है।" खाद्य वस्तुओं में, आलू की मुद्रास्फीति अगस्त में 71.89 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही, जबकि प्याज और फलों के थोक भाव में क्रमश: 26.80 प्रतिशत और 16.40 प्रतिशत की कमी रही। दाल के भाव में भी कमी जारी रही और अगस्त में यह 14.23 प्रतिशत घटी।

अगस्त में मुद्रास्फीति का 4.53 प्रतिशत का स्तर चार महीने का न्यूनतम स्तर है। इससे पहले अप्रैल में मुद्रास्फीति 3.62 प्रतिशत थी। मई 2018 में यह 4.78 प्रतिशत, जून में 5.68 प्रतिशत और जुलाई में 5.09 प्रतिशत दर्ज की गई। 

ब्रेंट कच्चे तेल के दाम 79 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास चल रहे हैं। इसके साथ ही रुपये की विनिमय दर में गिरावट से तेल आयात बिल में वृद्धि हुयी है। जिसके चलते पेट्रोल और डीजल महंगे हुये।

वर्ष 2018 की शुरुआती से अब तक रुपये की विनिमय दर में 12 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और वर्तमान में रुपया 71.90 रुपये प्रति डॉलर के आस-पास है। दिल्ली में गुरुवार को पेट्रोल बढ़कर 81 रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया जबकि मुंबई में यह 88.39 रुपये पर था। इसी प्रकार दिल्ली में डीजल 73.08 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 77.58 रुपये हो गया। 

बुधवार को जारी हुये आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में घटकर 10 माह के न्यूनतम स्तर 3.69 प्रतिशत पर आ गयी।


Web Title: India's Wholesale Inflation Eases to 4.53 percent in August
कारोबार से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करे