GST blow after GDP collection in August was less than July Rs 86,449 crore | GDP के बाद GST ने दिया झटका, जुलाई से कम रहा अगस्त में संग्रह, 86,449 करोड़ रुपये
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अगस्त महीने में 86,449 करोड़ रुपये रहा। यह जुलाई महीने में प्राप्त 87,422 रुपये से कम है। (file photo)

Highlightsपिछले साल के इसी माह के मुकाबले जीएसटी संग्रह का यह 88 प्रतिशत है। अगस्त 2019 में जीएसटी संग्रह 98,202 करोड़ रुपये था। आईजीएसटी से सीजीएसटी मद में 18,216 करोड़ रुपये और एसजीएसटी में 14,650 करोड़ रुपये का निपटारा किया है। अगस्त, 2020 में नियमित निपटान के बाद केंद्र और राजय सरकारों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिये 34,122 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिये 35,714 करोड़ रुपये रहा।

नई दिल्लीः वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अगस्त महीने में 86,449 करोड़ रुपये रहा। यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह कम हुआ है।

इससे पहले, जुलाई में यह 87,422 रुपये था। सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह 12 प्रतिशत कम रहा। पिछले साल इसी महीने में माल एवं सेवा कर संग्रह 98,202 करोड़ रुपये था। सकल संग्रह में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) 15,906 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 21,064 करोड़ रुपये, एकीकृत माल एवं सेवा कर (आईजीएसटी) 42,264 करोड़ रुपये और उपकर 7,215 करोड़ रुपये रहा। आईजीएसटी में आयातित वस्तुओं पर प्राप्त 19,179 करोड़ रुपये शामिल है।

आंकड़ा संकेत देता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है

कर विशेषज्ञों ने कहा कि राजस्व संग्रह का आंकड़ा संकेत देता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है। संग्रह में कमी का मुख्य कारण आयात में कमी है। सरकार ने नियमित निपटान के तहत आईजीएसटी से सीजीएसटी मद में 18,216 करोड़ रुपये और एसजीएसटी में 14,650 करोड़ रुपये का निपटारा किया है। मंत्रालय के अनुसार अगस्त, 2020 में नियमित निपटान के बाद केंद्र और राज्य सरकारों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिये 34,122 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिये 35,714 करोड़ रुपये रहा।

बयान के अनुसार अगस्त में जीएसटी संग्रह पिछले साल 2019 के इसी माह में प्राप्त जीएसटी का 88 प्रतिशत है। अगस्त, 2020 के दौरान, बीते साल 2019 के समान महीने की तुलना में आयातित वस्तुओं से राजस्व 77 प्रतिशत और घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व 92 प्रतिशत रहा। मंत्रालय ने कहा कि 5 करोड़ रुपये से कम कारोबार वाले करदाताओं के लिए सितंबर तक रिटर्न भरने से छूट दी गयी है। जीएसटी संग्रह चालू वित्त वर्ष की शुरूआत से ही स्थिर है।

कोविड-19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ लगाया जाना

इसका कारण कोविड-19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ लगाया जाना है जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। अप्रैल में राजस्व 32,172 करोड़ रुपये, मई में 62,151 करोड़ रुपये, जून में 90,917 करोड़ रुपये और जुलाई में 87,422 करोड़ रुपये रहा। पीडब्ल्यूसी के प्रतीक जैन (अप्रत्यक्ष कर) ने कहा कि पिछले दो महीनों के रुख को दखें तो ऐसा लगता है कि संग्रह पिछले साल के इन्हीं महीनों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम होकर स्थिर हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘चीजें अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रही हैं, संग्रह आने वाले महीनों में बढ़ने की संभावना है।’’ डेलॉयट इंडिया के भागीदारी एम एस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह सुधार के रास्ते पर है। घरेलू लेन-देन से होने वाला जीएसटी संग्रह पिछले साल के इसी माह के मुकाबले केवल 8 प्रतिशत कम है। यह आर्थिक गतिविधियों में पुनरूद्धार का संकेत देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी संग्रह का राज्यवार आंकड़ा बताता है कि पुनरूद्धार प्रक्रिया से राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में संग्रह में मामूली वृद्धि हुई है। वहीं हरियाणा और गुजरात में मामूली कमी आयी है जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में उल्लेखनीय गिरावट आयी है।’’ ईवाई के कर भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि जीएसटी संग्रह में कमी का एक प्रमुख कारण आयात है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार कम होने से आयात में कमी आयी है।

कंपोजीशन डीलरों के लिये जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ी

सरकार ने सोमवार को कंपोजीशन योजना के तहत आने वाले डीलरों के लिये वित्त वर्ष 2019- 20 की जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को दो माह आगे बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 तक कर दिया। पिछले कुछ माह में यह दूसरी बार समयसीमा को बढ़ाया गया है।

इससे पहले यह रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 15 जुलाई थी जिसे बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया था। केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2019- 20 की जीएसटीआर 4 भरने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 कर दिया गया है।’’

माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत कोई भी करदाता जिसका सालाना कारोबार डेढ करोड़ रुपये तक है वह कंपाजीशन योजना को अपना सकता है। इस योजना के तहत आने वाले विनिर्माताओं और व्यापारियों को एक प्रतिशत की दर से जीएसटी का भुगतान करना होता है जबकि एल्कोहल नहीं परोसने वाले रेस्त्रां को पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी देना होता है। 

भारत 2021 तक सबसे ज्यादा कर्ज बोझ वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा: मूडीज

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2021 तक भारत उभरते बाजारों में सबसे अधिक कर्ज बोझ वाली अर्थवयवस्थाओं में शामिल होगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय गणित का बड़े उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा और अगले कुछ सालों तक उनका कर्ज बोझ काफी ऊंचा होगा।

मूडीज का कहना है कि उभरते बाजार की अर्थव्यवस्थाओं में बढ़े प्राथमिक घाटे की वजह से उनका कर्ज बोझ 2019 के मुकाबले 2021 तक प्रतिशत 10 अंक तक बढ़ सकता है। इनमें से कुछ पर ऊंचे ब्याज भुगतान का भी बोझ होगा जिससे उनका कर्ज बोझ और बढ़ेगा। मूडीज ने कहा कि बड़े उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्थाओं में ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका का कर्ज बोझ सबसे ज्यादा हो सकता है। एजेंसी ने कहा है कि कमजोर वित्तीय प्रणाली और आकस्मिक देनदारियों के चलते भारत, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के लिये यह जोखिम ज्यादा है।

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