in lockdown start new Web Series of classical music and including Vishwam Mohan Bhatt | लॉकडाउन के बीच ‘उत्साह’ पैदा करने के लिये शास्त्रीय संगीत की ‘वेब सीरीज’, विश्वमोहन भट्ट भी शामिल
(फोटो सोर्स- ट्विटर)

Highlightsजनता कर्फ्यू यानी 22 मार्च से शुरू हुआ यह सिलसिला 14 अप्रैल को लॉकडाउन के आखिरी दिन तक चलेगा ।दुर्गा जसराज की संस्था आर्ट एंड आर्टिस्ट्स द्वारा शुरू की गई पहल ‘उत्साह : स्प्रेडिंग हैप्पीनेस ’ में इंस्टाग्राम लाइव चैट पर इंटरव्यू के बाद कलाकार उनके फेसबुक पेज पर रोज बीस मिनट की प्रस्तुति देते हैं ।

चारों तरफ निराशा और नकारात्मकता है लेकिन शास्त्रीय संगीत में लोगों को कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में लड़ने की ताकत दे सकता है और माहौल में उत्साह का संचार कर सकता है , यह कहना है ग्रैमी पुरस्कार विजेता मोहनवीणा वादक पंडित विश्वमोहन भट्ट का । कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारतीय शास्त्रीय संगीतकारों ने संगीत की अनूठी ‘वेब सीरिज’ उत्साह शुरू की है जिसमें विश्वमोहन भट्ट समेत कई कलाकार भाग ले रहे हैं । दुर्गा जसराज की संस्था आर्ट एंड आर्टिस्ट्स द्वारा शुरू की गई पहल ‘उत्साह : स्प्रेडिंग हैप्पीनेस ’ में इंस्टाग्राम लाइव चैट पर इंटरव्यू के बाद कलाकार उनके फेसबुक पेज पर रोज बीस मिनट की प्रस्तुति देते हैं ।

जनता कर्फ्यू यानी 22 मार्च से शुरू हुआ यह सिलसिला 14 अप्रैल को लॉकडाउन के आखिरी दिन तक चलेगा । इसमें सात अप्रैल को विशेष प्रस्तुति देने जा रहे भट्ट ने जयपुर से भाषा से बातचीत में कहा ,‘‘इस माहौल में उत्साह के संचार के लिये शास्त्रीय संगीत से बेहतर कुछ नहीं है जो आत्मा को भी शुद्ध कर देता है । मैं सात अप्रैल को परफॉर्म करूंगा जो मेरे गुरू पंडित रविशंकर की सौवीं वर्षगांठ भी है । मैं उन्हीं पर प्रस्तुति केंद्रित रखकर उनके राग ही बजाऊंगा ।’’ उन्होंने बताया कि सात अप्रैल को लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में उनका शो था जबकि अमेरिका के सैन डिएगो में भी उन्हें कार्यक्रम देना था जहां भारत रत्न मशहूर सितार वादक पंडित रविशंकर ने अंतिम दिन बिताये थे ।

कोरोना वायरस के कारण सारे कार्यक्रम रद्द हो गए । भट्ट ने कहा ,‘‘ अब घर पर खाली बैठकर मोबाइल एैप के साथ रियाज कर रहा हूं जिसमें तबला, तानपुरा और स्वरमंडल तो मिल जाते हैं लेकिन असली संगत और साज की बात ही कुछ और होती है । उम्मीद है कि यह दौर जल्दी बीते और जिंदगी ढर्रे पर लौटे ।’’ वहीं उत्साह में सबसे पहले प्रस्तुति देने वाले संदीप रानाडे पेशे से कम्प्यूटर इंजीनियर हैं और अमेरिका में गूगल की नौकरी छोड़कर अपना शौक पूरा करने भारत आ बसे । पंडित जसराज के शिष्य और कोरोना वायरस पर अपने गीत ‘ ना कोरोना करो ’ से दुनिया भर में लोकप्रिय हुए रानाडे ने भाषा से कहा ,‘‘ राग वसंत पर आधारित इस गीत के लिये दुनिया भर से संदेश मिले और यही संगीत की ताकत है ।’’

रियाज के लिये आईओएस एैप ‘नादसाधना’ के अविष्कारक रानाडे ने कहा ,‘‘ यह कठिन और चिंताजनक दौर है और मैने लोगों में इस गीत के जरिये जागरूकता जगाने की कोशिश की । उनमें आशावाद, एकजुटता और साहस का संचार करने की यह पहल थी जो लोगों को पसंद आई ।’’ मेवाती घराने की शास्त्रीय गायिका अंकिता जोशी ने बताया ,‘‘ आम तौर पर कार्यक्रम के लिये पूरी महफिल सजाकर कलाकार रिकार्डिंग करते हैं या लाइव करते हैं लेकिन मौजूदा माहौल में हम कहीं आ जा नहीं सकते । इसलिये घर में ही मोबाइल या लैपटाप पर बिना अधिक तकनीकी सहायता के लोगों से जुड़ने का यह प्रयास है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ हमें 20 मिनट लगातार गाना है और मैने अपनी परफार्मेंस सरप्राइज रखी है लेकिन मैं गुरूजी (पंडित जसराज) के लोकप्रय गीत गाउंगी ।’’ ‘उत्साह’ की पहल करने वाली दुर्गा ने बताया ,‘‘पंडित जसराज की बेटी होने के कारण मुझे संगीत की ताकत पता है । हमने हालात सामान्य होने तक संगीत के जरिये अपना योगदान देने के लिये यह कोशिश की है । पहले हमने सोचा था कि छोटे स्तर पर रिकार्ड करके इसे सोशल मीडिया पर डालेंगे लेकिन हालात बिगड़ने के बाद अब सारे कलाकार अपने अपने घर से लाइव कर रहे हैं ।’’ इस सीरिज में मुनव्वर मासूम (कव्वाली), शशांक सुब्रहमण्यम (बांसुरी, कर्नाटक शास्त्रीय), ओंकार दर्डारकर (हिन्दुस्तानी शास्त्रीय), बर्नाली चटोपाध्याय (हिन्दुस्तानी शास्त्रीय), सत्येंद्र सिंह सोलंकी और रमेंद्र सिंह सोलंकी (संतूर और तबला), मेहताब अली नियाजी (सितार) समेत कई कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं ।

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