Rajesh Badal's blog: Trump's antics also hurt his party | राजेश बादल का ब्लॉग: ट्रंप की हरकतों से उनकी पार्टी का भी बड़ा नुकसान
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

डोनाल्ड ट्रम्प की शामत आ गई है. उनके ताजा हथकंडों के पीछे की मंशा अमेरिकी समुदाय को भरमाने की भी थी. वे इस बात से वाकिफ थे कि पराजय उनकी नियति है और दूसरी पारी का अवसर उन्हें नहीं मिलने वाला है.

कुछ बरस बाद दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरने से उन्हें कौन रोक सकता था? इसलिए भविष्य के गर्भ में समाए उस अनदेखे कार्यकाल के बीज वे इन दिनों बो रहे थे. अंकुरित होकर वे अगले चुनाव के समय लाभ दें, यही ट्रम्प की योजना हो सकती थी.

तमाम अदालतों में चुनाव परिणाम के विरोध में याचिकाएं लगवाना, मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाना, व्हाइट हाउस नहीं छोड़ने की धमकियां देना, संसद में हिंसक वारदातें करवाना, अपनी पार्टी के बैनर तले खरीदे गए निजी कार्यकर्ताओं से मुल्क भर में उपद्रव करवाना इसी सोच के परिणाम हैं.

वे अमेरिकी मतदाताओं में यह विचार पैदा कर सकते हैं कि आखिर ट्रम्प के साथ कुछ तो अन्याय हुआ ही होगा. कोई इंसान आमतौर पर झूठ की बुनियाद पर अपने सपनों का महल खड़ा नहीं करता, इसलिए चुनाव में कुछ तो गड़बड़ हुई है. सहानुभूति का यह अंकुरण उन्हें अगली बार इस सर्वोच्च शिखर पद पर ले जा सकता है.

धनबल और उससे बाहुबल खरीदने वाले डोनाल्ड ट्रम्प का संभवतया यही चिंतन-दर्शन है. लेकिन उन पर महाभियोग भी चलाया जा सकता है, यह उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी. महाभियोग मंजूर होने की स्थिति में वे अमेरिका के ऐसे पहले राष्ट्रपति हो जाएंगे.

एक बार फिर राष्ट्रपति पद पर काम करने का ख्वाब हमेशा-हमेशा के लिए चूर-चूर हो जाएगा. डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ दोनों महाभियोग प्रस्ताव नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सदस्यों ने पेश किए हैं. इससे वहां संवैधानिक स्थिति बड़ी उलझ सी गई है.

डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी सांप-छछूंदर जैसे हाल में है. या तो उसके सांसद महाभियोग का समर्थन करें या फिर बीस जनवरी से पहले उन्हें पद से ही हटा दिया जाए. दोनों ही स्थितियों में पार्टी की साख पर बट्टा लगेगा. फिर भी महाभियोग से बेहतर उनका हटाया जाना सम्मानजनक रास्ता हो सकता है.

यह काम उपराष्ट्रपति माइक पेंस को करना है. उन्हें कैबिनेट की बैठक बुलाकर कम से कम 8 मंत्रियों का समर्थन हासिल करना होगा. सीनेट की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने उपराष्ट्रपति को इसके लिए आग्रह भी कर दिया है. माइक पेंस संविधान के 25 वें संशोधन का उपयोग करके कार्यवाहक राष्ट्रपति बन सकते हैं. यह संशोधन राष्ट्रपति के रूप में अपना कर्तव्य निभाने में अक्षम रहने वाले शख्स को पद से हटाने की इजाजत देता है. इस तरह शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण हो जाएगा.

दरअसल 57 बरस पहले तक अमेरिका में इसका कोई प्रावधान ही नहीं था. पैंतीसवें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या के बाद उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिए इस संशोधन की आवश्यकता पड़ी थी. इसी संशोधन में राष्ट्रपति की अयोग्यताएं भी निर्धारित कर दी गई थीं. 53 साल पहले यह संशोधन लागू हो गया था.

इसमें मौटे तौर पर चार खंड हैं. पहले खंड में राष्ट्रपति की मृत्यु होने या उनके इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति के राष्ट्रपति का पद संभालने का जिक्र है. दूसरे खंड में व्यवस्था है कि अगर उपराष्ट्रपति का पद भी उस समय खाली हो तो इस्तीफे से पहले राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को नामांकित करेंगे और संसद के दोनों सदन इसकी पुष्टि करेंगे.

तीसरा खंड अधिक महत्वपूर्ण है. यह कहता है कि यदि राष्ट्रपति अपनी अयोग्यता, अक्षमता अथवा स्वास्थ्य के हाल को स्वीकार करते हैं तो उपराष्ट्रपति ही कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम देखेंगे.

चौथा और अंतिम खंड मौजूदा परिस्थितियों में प्रासंगिक है. इसके अनुसार अगर उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के सदस्य बहुमत के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि राष्ट्रपति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं तो दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति को हटा सकते हैं. 

जहां तक महाभियोग का सवाल है तो रिपब्लिकन दल इस किरकिरी से बचना चाहेगा. उसके राष्ट्रपति ने अगले चुनाव में भी उम्मीदवार उतारने के लिए पार्टी की जड़ों पर मट्ठा डाल दिया है. दल के अधिकांश सांसद डोनाल्ड ट्रम्प के आचरण से दुखी और खफा हैं. अनुभवी नेता लिंडसे ग्राहम और मिट रोमनी तो खुलकर ट्रम्प के विरोध में उतर आए हैं.

अगर उनकी संख्या 16 या उससे ज्यादा हुई तो महाभियोग मंजूर हो जाएगा. पार्टी के माथे कलंक का टीका लगेगा. क्योंकि महाभियोग प्रस्ताव में साफ लिखा है कि ट्रम्प ने विद्रोह भड़काया और संसद में हिंसा को प्रोत्साहित किया. ऐसे दल के प्रति अमेरिकी वोटर कैसी धारणा बनाएंगे- यह अनुमान लगाया जा सकता है.

वैसे स्थिति यह है कि निचले सदन यानी हाउस ऑफरिप्रेजेंटेटिव्स में जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल है और सीनेट में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी सिर्फ दो मतों से बहुमत में है. यदि पार्टी के सांसद ट्रम्प के खिलाफ चले गए तो उनके सियासी सफर पर संकट के बादल जिंदगी भर मंडराते रहेंगे.

सेठजी बनकर बैठना ट्रम्प की नियति बन जाएगी. प्रसंग के तौर पर याद दिला दूं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफयह दूसरा महाभियोग प्रस्ताव है. अगर यह पारित होता है तो वे अमेरिका के इतिहास में ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे.

जाहिर है अमेरिका जैसे राष्ट्र का कोई राष्ट्रपति अपनी इस तरह विदाई नहीं चाहेगा. मौजूदा राष्ट्रपति अमेरिकी लोकतंत्न की पहले ही बहुत धज्जियां उड़ा चुके हैं. बचे-खुचे सम्मान, अपनी पार्टी तथा देश की प्रतिष्ठा की खातिर उन्हें सम्मानजनक विदाई का रास्ता खोज लेना चाहिए.

Web Title: Rajesh Badal's blog: Trump's antics also hurt his party

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