Union Home Minister Amit Shah covid pm modi sushant singh bjp election Tanishq's advertisement Harish Gupta's blog | बदले-बदले से नजर आ रहे अमित शाह, हरीश गुप्ता का ब्लॉग
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शब्दों को बिना घुमाए-फिराए, सीधे बात करने के लिए जाने जाते हैं.

Highlightsअनुपस्थिति को कई लोगों ने महसूस किया क्योंकि प्रधानमंत्री मुखर होने के लिए नहीं जाने जाते हैं.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने सुरक्षा कवच से बाहर आ रहे हैं, लेकिन वे खुद को सौंपे गए कार्य तक ही सीमित रखते हैं. अमित शाह थे क्योंकि वे गुस्से और रोष से भरे हुए नहीं थे. बल्कि उन्होंने खुद को पूरी तरह से लो-प्रोफाइल में बनाए रखा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शब्दों को बिना घुमाए-फिराए, सीधे बात करने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में, कोविड और उससे संबंधित स्वास्थ्य दिक्कतों की चपेट में आने के बाद लगभग तीन महीने तक वे शांत रहे थे. उनकी अनुपस्थिति को कई लोगों ने महसूस किया क्योंकि प्रधानमंत्री मुखर होने के लिए नहीं जाने जाते हैं.

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी अपनी राय व्यक्त करने और मीडिया से दूर रहना पसंद करते हैं. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को बिहार चुनाव का प्रभारी बनाए जाने के बाद, भाजपा के शक्तिशाली महासचिव भूपेंद्र यादव ने भी लो-प्रोफाइल बने रहने का फैसला किया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने सुरक्षा कवच से बाहर आ रहे हैं, लेकिन वे खुद को सौंपे गए कार्य तक ही सीमित रखते हैं. इसी मोड़ पर अमित शाह ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कई मुद्दों पर बातचीत की. लेकिन ये एक अलग अमित शाह थे क्योंकि वे गुस्से और रोष से भरे हुए नहीं थे. बल्कि उन्होंने खुद को पूरी तरह से लो-प्रोफाइल में बनाए रखा.

फिर भी, उन्होंने अपना रिकॉर्ड साफ रखा और कई चीजों को अस्वीकार कर दिया जो परिवार में कट्टरपंथी कर रहे थे, चाहे वह महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र हो या ड्रग कार्टेल की जांच को केवल बॉलीवुड से जोड़ना, सुशांत सिंह राजपूत मामले में मीडिया ट्रायल, सांप्रदायिक सौहाद्र्र पर तनिष्क का विज्ञापन और इसी तरह की अन्य चीजें.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले तीन महीनों के दौरान जो भी हुआ, उसमें न तो केंद्र का और न ही उनका कोई हाथ था. एक तरह से, वे स्पष्ट कर रहे थे कि इन सब चीजों के लिए या इनसे यदि किसी को चोट पहुंची है तो उसके लिए न तो उन्हें और न ही पार्टी को दोषी ठहराया जाना चाहिए.

कोई चाहे तो अनुमान लगा सकता है कि वे शिवसेना के साथ टूटे संबंधों को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन उन्होंने बॉलीवुड को स्पष्ट रूप से बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जो किया है या टीवी चैनलों में पीछा करने वाले पत्रकार जो कर रहे थे, चाहे उनका कोई भी राजनीतिक जुड़ाव रहा हो, उन्हें मंजूर नहीं है. निश्चित रूप से, ये एक नए अमित शाह हैं जिसे देश अब तक नहीं जानता था.

घोड़े के आगे गाड़ी रखना!

चिकित्सा बिरादरी में काफी आश्चर्य है कि कोरोनो वायरस वैक्सीन को इतना बढ़ा-चढ़ा कर क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है. इन दिनों बैठकों की एक श्रृंखला उच्चतम स्तर पर आयोजित की जा रही है और राज्यों सहित सभी संबंधितों को विस्तृत योजना तैयार करने के बारे में कहा जा रहा है कि कैसे टीका वितरित किया जाएगा और किसे पहले टीका लगाया जाएगा.

प्राथमिकता वाले लगभग दो करोड़ लोगों की सूची पहले ही तैयार की जा चुकी है. उन दिनों को याद करें जब रेल मंत्रलय ने बिना किसी योजना के 20000 कोचों को कोविड बेड में बदल दिया था जो अभी भी बेकार पड़े हैं या आईसीएमआर कोविड के टीके के लिए 15 अगस्त की समय सीमा निर्धारित कर रहा था!

चीन को छोड़कर कोई भी देश कम से कम अप्रैल 2021 तक किसी भी वैक्सीन का दावा नहीं कर रहा है. यूएसए और यूरोप ने डब्ल्यूटीओ में टीकों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) माफ करने की भारत की मांग को खारिज कर दिया है. बेशक, भारतीय उद्यमों सहित कुछ कंपनियां एंटीबॉडी दवाओं पर काम कर रही हैं, जो करीब छह महीने तक राहत दे सकती हैं.  

चिराग के लिए आगे का रास्ता

सभी की निगाहें प्रधानमंत्री पर टिकी हैं, जो 23 अक्तूबर को अपने मेगा बिहार चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे, कि वे चिराग पासवान के बारे में क्या कहते हैं. हालांकि भाजपा की बिहार इकाई ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को ‘वोट कटुआ’ कहा, लेकिन बिहार के प्रभारी देवेंद्र फड़नवीस ने इस तरह के किसी भी विशेषण से परहेज किया.

यहां तक कि अमित शाह ने भी इस सवाल से बचते हुए कहा, ‘हम चुनाव के बाद देखेंगे.’ जनता दल (यू) भाजपा नेतृत्व पर पूरा दबाव डाल रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर लोजपा को राजग से बाहर किया जाए और रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद राज्यसभा की जो सीट खाली हुई है वह लोजपा को न दी जाए. ऐसा लगता है कि बिहार में राजग कुछ कमजोर विकेट पर है.

आत्मनिर्भर भारत का क्या हुआ?

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आयात करने के लिए 101 वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाते हुए दावा किया था कि आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत इनका निर्माण भारत में  किया जाएगा. जब रक्षा मंत्रलय द्वारा सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया गया, तो वह दिल्लगी साबित हुई. पता चला कि 40 से अधिक वस्तुओं का वर्षो से कभी आयात नहीं किया गया था.

मंत्रलय ने हल-माउंटेड सोनार पर प्रतिबंध लगा दिया, जबकि डीआरडीओ के एचयूएमएसए और यूएसएचयूएस सोनार सूट्स पहले ही भारी सफलता पा चुके हैं. मंत्रलय ने एक दर्जन से अधिक कंपनियों के टेंडर रद्द कर दिए, जिन्होंने केवल रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी इकाइयां शुरू की थीं. इन कंपनियों को राम भरोसे छोड़ दिया गया. वे बंद हो गईं. यह 2016 के बाद से गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए चर्चाओं के अनेक दौर के बाद किया गया था.

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