ब्लॉगः इतिहास को फिर से लिखने की कवायद, सरकारी-गौर सरकारी संस्थाएं अपने ढंग से चला रहीं अभियान

By वेद प्रताप वैदिक | Published: November 28, 2022 12:40 PM2022-11-28T12:40:18+5:302022-11-28T12:41:17+5:30

असम के महान सेनापति लाचित बरफुकन की 400 वीं जयंती पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए। यही बात कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह ने भी कही थी।  

the exercise of rewriting history government organizations are running campaigns in their own way. | ब्लॉगः इतिहास को फिर से लिखने की कवायद, सरकारी-गौर सरकारी संस्थाएं अपने ढंग से चला रहीं अभियान

ब्लॉगः इतिहास को फिर से लिखने की कवायद, सरकारी-गौर सरकारी संस्थाएं अपने ढंग से चला रहीं अभियान

Next

असम के महान सेनापति लाचित बरफुकन की 400 वीं जयंती पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए। यही बात कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह ने भी कही थी।  

यह ठीक है कि प्रत्येक इतिहासकार इतिहास की घटनाओं को अपने चश्मे से ही देखता है। इस कारण उसके अपने रूझान, पूर्वाग्रह और विश्लेषण-प्रक्रिया का असर उसके निष्कर्षों पर अवश्य पड़ता है। यह पाठक पर निर्भर करता है कि वह उन विवरणों से क्या निष्कर्ष निकालता है। यदि सरकारी संस्थाएं इतिहास को अपने ढंग से लिखने का अभियान चला रही हैं तो कई गैर-सरकारी संगठन भी इस दिशा में सक्रिय हो गए हैं। इन दोनों अभियानों का ध्यान भारतीय इतिहास के उन नायकों पर भी जाए, जो लाचित बरफुकन की तरह उपेक्षित रहे हैं तो भारतीय जनता के मनोबल में अपूर्व वृद्धि होगी। जैसे मानगढ़ के भील योद्धा गोविंद गुरू, बेंगलुरू के नादप्रभु केंपेगौडा, आंध्र के अल्लूरी सीताराम राजू, बहराइच के महाराजा सुहेलदेव, म.प्र. के टंट्या भील और 1857 के अनेक वीर शहीदों का स्मरण किया जाए तो भारतीय इतिहास के कई नए आयाम खुलेंगे। 

इसी तरह संपूर्ण दक्षिण, मध्य और आग्नेय एशिया में भारत के साधु-संतों, विद्वानों, वैद्यों और व्यापारियों ने जो अद्भुत छाप छोड़ी है, उस पर भी अभी बहुत काम बाकी है। वह वर्तमान खंडित भारत का नहीं, संपूर्ण आर्यावर्त्त का इतिहास होगा। इसी प्रकार अंग्रेजी-शासन के विरुद्ध भारत के क्रांतिकारियों ने भारत में रहकर और विदेशों में जाकर जो अत्यंत साहसिक कार्य किए हैं, उन पर भी अभी काम होना बाकी है। प्राचीन भारत का प्रभाव पूरे एशिया और यूरोप में कैसा रहा है और हमारी विद्याओं का विश्व के विकास में क्या योगदान रहा है, इसे भी अभी तक ठीक से रेखांकित नहीं किया गया है।  

Web Title: the exercise of rewriting history government organizations are running campaigns in their own way.

भारत से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा लाइक करे